अखिल गोगोई ने शिवसागर सीट पर दर्ज की शानदार जीत, 17,272 वोटों के अंतर से मजबूत जनादेश : तीन गोगोई की एकता को झटका, गौरव और लुरिनज्योति को मिली करारी हार
विपक्ष के दावे हुए फेल : भाजपा को मिला बड़ा जनादेश

संजय पारीक, शिवसागर / 4 मई :
रायजोर दल के अध्यक्ष और वर्तमान विधायक अखिल गोगोई ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में 96-शिवसागर विधानसभा सीट पर निर्णायक जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा के कुशल दुवरी को 17,272 वोटों के अंतर से हराया। शिवसागर सीट से यह उनकी लगातार दूसरी जीत है, जो उनके जमीनी समर्थन, विधानसभा में सक्रिय विपक्षी नेता की भूमिका और क्षेत्रीय मुद्दों पर मुखरता को दोहराती है।
इस बार शिवसागर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला था। जिसमें अखिल गोगोई मुख्य रूप से भाजपा के कुशल दुवरी और एजीपी के प्रदीप हजारिका के खिलाफ मैदान में थे। गिनती के दौरान अखिल गोगोई लगातार आगे रहे और अंत में भारी अंतर से विजयी घोषित हुए।
अखिल गोगोई ने विगत 2021 के विधानसभा चुनाव में जेल में बंद रहते हुए भाजपा की सुरभि राजकुंवरी को 11,875 वोटों के अंतर से परास्त कर पहली बार विधानसभा पहुंचने का सफर तय किया था। इस बार उनका प्रदर्शन और बेहतर रहा। चुनाव से पहले अखिल गोगोई ने 50,000 वोटों के अंतर की भविष्यवाणी की थी, हालांकि वास्तविक अंतर 17,272 रहा, लेकिन इसे उनके लिए साफ जनादेश माना जा रहा है।
विपक्षी खेमे के “तीन गोगोई की एकजुटता” को करारा झटका, विपक्षी रणनीति हुई फेल
असम विधानसभा चुनाव में अखिल गोगोई की जीत विपक्ष के लिए एकमात्र सांत्वना साबित हुई। राज्य में कांग्रेस नीत विपक्षी गठबंधन की करारी शिकस्त मिली है। विपक्षी गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार तथा कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष गौरव गोगोई को 100-जोरहाट सीट पर भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से 23,182 वोटों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में जोरहाट लोकसभा क्षेत्र से सांसद गौरव गोगोई पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे और अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की विरासत को आगे बढ़ाने में असफल रहे।
इसी तरह असम जातीय परिषद (एजेपी) के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई को भी 89-खोवांग सीट पर भाजपा के चक्रधर गोगोई से करारी हार का सामना करना पड़ा। यह लुरिनज्योति गोगोई के राजनैतिक जीवन की लगातार तीसरी हार है। उन्होंने विगत 2021 के विधानसभा चुनाव में डिब्रुगढ़ जिले की दो सीटों दुलियाजान और नहरकटिया सीटों से और 2024 में डिब्रुगढ़ संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था और उन्हें हर बार पराजय का मुंह देखना पड़ा।
चुनाव से पहले अखिल गोगोई, गौरव गोगोई और लुरिनज्योति गोगोई की एकता असम की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी रही। कांग्रेस के नेतृत्व में रायजोर दल, असम जातीय परिषद, सीपीआई (एम), सीपीआई (एमएल) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस सहित 6 विपक्षी पार्टियों ने चुनावी गठबंधन करते हुए आम सम्मिलित मोर्चा में एकजुट होकर सीट समझौते के आधार पर चुनाव लड़ा था। मोर्चा के तहत इन तीनों ने सीट शेयरिंग का समझौता किया था और ऊपरी असम में भाजपा के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाने का दावा किया था। अखिल गोगोई ने यहां तक कहा था कि तीन गोगोई मिलकर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को ब्रह्मपुत्र में फेंक देंगे।
तीनों गोगोई ने दावा किया था कि इस बार असम की जनता भाजपा को नकार देगी और तीन गोगोई की एकता को बड़ा जनादेश मिलेगा और 4 मई को परिणाम आने के बाद असम में विपक्षी दलों की सरकार बनेगी। हालांकि तीन गोगोई की एकता और सरकार बनाने के सभी दावे फेल हो गए। असम की जनता ने लगातार तीसरी बार भाजपा-नीत एनडीए को पहले की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली रूप से बड़ा बहुमत दिया है।
अखिल गोगोई ने अन्य सहयोगियों की हार को “दुखद” बताया और कहा कि असम की अस्मिता बचाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अब विधानसभा में विपक्ष की संख्या कम हो जाने से उन्हें अधिक सक्रिय हो कर काम करना पड़ेगा।
अखिल गोगोई का प्रोफाइल :
स्नातक डिग्रीधारी 51 वर्षीय अखिल गोगोई असम के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और किसान आंदोलन के चेहरे रहे हैं। नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA) विरोधी आंदोलन में सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था।
उनकी राजनीति का मुख्य फोकस स्वदेशी लोगों की पहचान की रक्षा, सीएए विरोध और लोकतंत्र की रक्षा पर रहा है।
आहोम शासनकाल की राजधानी रही ऐतिहासिक शिवसागर सीट असम का अन्यतम प्रतिष्ठित विधानसभा क्षेत्र है। यहां के मतदाताओं का रुख हमेशा लीक से हटकर होता है। इस सीट पर हमेशा कड़ा मुकाबला देखा जाता है। अखिल गोगोई की जमीनी कार्यशैली और क्षेत्रीय मुद्दों पर मुखरता ने उन्हें यहां मजबूत पकड़ दिलाई है।
शिवसागर सीट से अखिल गोगोई की यह जीत रायजोर दल की उपस्थिति को मजबूत करती है। जबकि असम विधानसभा चुनाव का परिणाम कांग्रेस और एजेपी सहित विपक्षी पार्टियों के लिए सबक भरा हुआ है। शिवसागर की जनता ने एक बार फिर अखिल गोगोई के नेतृत्व और संघर्षशील छवि पर भरोसा जताया है। तीन गोगोई की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। करारी हार के बाद अब विपक्ष अब एकजुट होकर भविष्य के लिए क्या रणनीति तैयार करता है यह समय ही बताएगा।




