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असम विधानसभा में गूंजी शहीद पियली फुकन और जिउराम दुलियाबरुआ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग : विधायक धर्मेश्वर कोंवर ने सदन में उठाई ऐतिहासिक आवाज : “भारत के प्रथम शहीदों के रूप में मिले राष्ट्रीय स्वीकृति”— असम के वीर सपूतों के संघर्ष और बलिदान को पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग

वरिष्ठ पत्रकार भैरव मुंडा, इतिहासविद प्रवीण शर्मा और प्रो. संजय दास के लंबे प्रयासों का भी विधानसभा में हुआ उल्लेख

न्यूज डेस्क, 7 जुलाई : असम के गौरवशाली स्वतंत्रता इतिहास और राज्य के वीर सपूतों को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिलाने की मांग एक बार फिर असम विधानसभा के पवित्र सदन में जोरदार तरीके से उठाई गई।

षष्ठदश असम विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सोनारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक धर्मेश्वर कोंवर ने नियम 301 के तहत असम के महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद पियली फुकन और शहीद जिउराम दुलियाबरुआ के ऐतिहासिक योगदान का विषय सदन में प्रमुखता से रखा।

विधायक कोंवर ने मांग की कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रारंभिक स्वतंत्रता संघर्ष में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले इन दोनों वीरों को भारत के प्रथम शहीदों के रूप में राष्ट्रीय मान्यता प्रदान की जाए और उनके जीवन संघर्ष को देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में उचित स्थान दिया जाए।

असम की धरती ने दिए स्वतंत्रता संघर्ष के अमर योद्धा : धर्मेश्वर कोंवर

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान विधायक धर्मेश्वर कोंवर ने कहा कि असम की धरती हमेशा से वीरता, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक रही है।

उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती दौर से ही असम के अनेक वीर योद्धाओं ने विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।

इन्हीं महान वीरों में शहीद पियली फुकन और शहीद जिउराम दुलियाबरुआ का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए।

ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान

विधायक कोंवर ने कहा कि शहीद पियली फुकन और जिउराम दुलियाबरुआ ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आवाज बुलंद करते हुए स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि इन वीरों के साहस, त्याग और देशभक्ति ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में एक अमिट अध्याय जोड़ा है।

लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद इन महान स्वतंत्रता सेनानियों को आज तक राष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान और सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।

“असम के वीरों की गाथा पूरे देश तक पहुंचे”

विधायक धर्मेश्वर कोंवर ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि असम के स्वतंत्रता सेनानियों की वीर गाथा केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि शहीद पियली फुकन और जिउराम दुलियाबरुआ के जीवन, विचारधारा, संघर्ष और ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियां इन महान वीरों के त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम से प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगी।

भैरव मुंडा, प्रवीण शर्मा और प्रो. संजय दास के प्रयासों की विधानसभा में सराहना

इस ऐतिहासिक विषय को सदन में उठाते हुए विधायक धर्मेश्वर कोंवर ने उन लोगों के प्रयासों का भी विशेष उल्लेख किया, जो लंबे समय से इन वीर शहीदों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने विशेष रूप से शिवसागर के वरिष्ठ पत्रकार भैरव मुंडा, इतिहास के जानकार एवं बुद्धिजीवी प्रवीण शर्मा और प्रोफेसर संजय दास द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

विधायक ने कहा कि इतिहास के भूले-बिसरे अध्यायों को सामने लाने और असम के महान सपूतों को उनका उचित स्थान दिलाने में ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

असम का स्वतंत्रता संघर्ष भारत के इतिहास का अभिन्न हिस्सा

धर्मेश्वर कोंवर ने कहा कि असम का स्वतंत्रता आंदोलन भारत के राष्ट्रीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि राज्य के वीर योद्धाओं द्वारा देश की स्वतंत्रता के लिए दिए गए बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान मिलना चाहिए।

ऐसी पहल न केवल असम के गौरवपूर्ण इतिहास को मजबूत करेगी, बल्कि नई पीढ़ी में देशभक्ति, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना की भावना को भी बढ़ावा देगी।

राष्ट्रीय सम्मान की दिशा में पहल की उम्मीद

अपने संबोधन के अंत में विधायक धर्मेश्वर कोंवर ने उम्मीद जताई कि सरकार इस ऐतिहासिक और भावनात्मक विषय को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगी।

उन्होंने कहा कि शहीद पियली फुकन और शहीद जिउराम दुलियाबरुआ को राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाना केवल दो वीर सपूतों को सम्मान देने का विषय नहीं है, बल्कि यह असम की ऐतिहासिक अस्मिता, गौरव और स्वतंत्रता आंदोलन में राज्य के योगदान को देश के सामने स्थापित करने का विषय है।

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