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कोच-राजवंशी सहित असम की पिछड़ी जातियों को शीघ्र जनजाति का दर्जा देने की मांग तेज : आक्रासु ऊपरी-मध्य शिवसागर जिला समिति ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन : “सिर्फ आश्वासन नहीं, अब चाहिए स्थायी समाधान”— वर्षों से लंबित जनजातिकरण मुद्दे पर संगठन ने सरकार से उठाए सवाल

मांग पूरी नहीं होने पर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी, कहा— जातीय पहचान और संवैधानिक अधिकारों से समझौता नहीं

शिवसागर, 7 जुलाई : कोच-राजवंशी सहित असम की अन्य पिछड़ी जातियों को शीघ्र अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा प्रदान करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। लंबे समय से लंबित जनजातिकरण की मांग को लेकर ऑल कोच राजवंशी स्टूडेंट्स यूनियन (आक्रासु), ऊपरी-मध्य शिवसागर जिला समिति ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।

इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने शिवसागर जिला आयुक्त के माध्यम से असम के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया, जिसमें वर्षों से चली आ रही इस मांग को जल्द पूरा करने का आग्रह किया गया।

आक्रासु जिला अध्यक्ष राजीव नेओग और महासचिव राजकमल दत्ता ने किया ज्ञापन पर हस्ताक्षर

मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन पर ऑल कोच राजवंशी स्टूडेंट्स यूनियन, ऊपरी-मध्य शिवसागर जिला समिति के अध्यक्ष राजीव नेओग और महासचिव राजकमल दत्ता ने हस्ताक्षर किए।

ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने कहा कि कोच-राजवंशी सहित असम की पिछड़ी जातियों को जनजाति का दर्जा देने का मुद्दा वर्षों से चर्चा में है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

“समस्या को केवल रिपोर्ट और आश्वासनों तक सीमित रखा गया”— आक्रासु

संगठन ने आरोप लगाया कि असम की एक गंभीर जातीय और सामाजिक समस्या को अब तक केवल मंत्रिमंडलीय समिति की रिपोर्टों और सरकारी आश्वासनों तक सीमित रखा गया है।

आक्रासु का कहना है कि अलग-अलग समय पर सरकारों द्वारा जनजातिकरण की मांग को पूरा करने का वादा किया गया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कोई प्रभावी और निर्णायक कदम नहीं उठाया गया।

संगठन के अनुसार, लगातार देरी के कारण संबंधित समुदायों के लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।

चुनाव के समय वादे, बाद में उपेक्षा का लगाया आरोप

आक्रासु ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल कोच-राजवंशी सहित पिछड़ी जातियों के जनजातिकरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हैं और समाधान का भरोसा दिलाते हैं।

लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद इस महत्वपूर्ण मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया जाता है। संगठन ने कहा कि किसी समुदाय की ऐतिहासिक मांग और अधिकारों को केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

“सड़क और विकास कार्य ही पर्याप्त नहीं, जातीय अधिकारों की रक्षा भी सरकार की जिम्मेदारी”

छात्र संगठन ने कहा कि केवल सड़क, भवन और अन्य आधारभूत संरचनाओं का विकास ही सरकार की जिम्मेदारी नहीं है।

आक्रासु के अनुसार, असम की विभिन्न जातियों की पहचान, सम्मान, संवैधानिक अधिकार और लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करना भी सरकार का कर्तव्य है।

संगठन ने कहा कि कोच-राजवंशी सहित अन्य पिछड़ी जातियों को उनका उचित संवैधानिक अधिकार और सामाजिक सम्मान मिलना चाहिए।

मांग पूरी नहीं हुई तो होगा व्यापक जनआंदोलन

ऑल कोच राजवंशी स्टूडेंट्स यूनियन, ऊपरी-मध्य शिवसागर जिला समिति ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द जनजातिकरण की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में संगठन व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा।

आक्रासु ने कहा कि जरूरत पड़ने पर जनआंदोलन के माध्यम से सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा और समुदाय अपने अधिकारों की प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखेगा।

संगठन ने साफ कहा— अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस समाधान चाहिए।

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