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जोरहाट के टिलिकी आम बेज गांव में घर के पीछे मिला मृत तेंदुआ, पूरे इलाके में सनसनी और दहशत का माहौल : मौत का कारण अभी अज्ञात : वन विभाग जांच में जुटा

जोरहाट, 3 जून : ऊपरी असम के जोरहाट जिले के टिलिकी आमबेज गांव में एक चौंकाने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। गांव के एक व्यक्ति के घर के पीछे मृत तेंदुए का शव बरामद होने से स्थानीय लोगों में सनसनी और दहशत फैल गई है। सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई और घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।

रिहायशी क्षेत्र के समीप शव मिलने से बढ़ी चिंता

गांव के रिहायशी इलाके के बेहद करीब तेंदुए का शव मिलने से स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में तेंदुओं की आवाजाही हो रही है, तो मानव जीवन और पालतू पशुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

फिलहाल इस घटना में किसी भी इंसान या पालतू पशु पर हमले की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन तेंदुए के शव की मौजूदगी ने ही डर का माहौल पैदा कर दिया है।

मौत का कारण अभी अज्ञात, वन विभाग जांच में जुटा

तेंदुए की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। विभाग ने शव को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक वैज्ञानिक, कानूनी और फॉरेंसिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही तेंदुए की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि मौत प्राकृतिक कारणों, चोट, बीमारी, जहर या किसी अन्य कारण से हुई है या नहीं।

ग्रामीणों की मांग – निगरानी बढ़ाओ, सुरक्षा दो

घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से इलाके में निगरानी बढ़ाने, नियमित गश्त लगाने और आवश्यक सुरक्षा उपाय करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में तेंदुओं की ऐसी घटनाएं चिंताजनक हैं और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।

असम में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की पृष्ठभूमि

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब असम के जंगलों में तेंदुओं की संख्या और उनकी भटकाव की घटनाएं बढ़ रही हैं। खासकर जोरहाट, गोलाघाट और काजीरंगा के आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए अक्सर मानव बस्तियों के करीब दिखाई देते हैं।

असम में पिछले कुछ वर्षों में तेंदुओं से संबंधित मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले बढ़े हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस दिशा में सतर्क हैं, लेकिन सीमावर्ती गांवों में अभी भी प्रभावी रोकथाम और जागरूकता की जरूरत महसूस की जा रही है।

वन विभाग पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है। तब तक इलाके में सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारी किसी भी तरह की अफवाहों से बचने और विभाग पर भरोसा करने की अपील कर रहे हैं।

यह घटना एक बार फिर असम में वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को रेखांकित करती है।

जोरहाट से जितेंद्र सोमानी की रिपोर्ट।

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