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उपरी असम की भीषण बाढ़ पर बदरुद्दीन अजमल की बड़ी मांग : शिवसागर पहुंचे विधायक अजमल ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से 1,000 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की अपील : अधिक NDRF टीमें, सेना के हेलिकॉप्टर, पुनर्वास पैकेज और स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान की उठाई मांग

अजमल फाउंडेशन ने शुरू किया 'Emergency Flood Relief–2026 in Upper Assam' अभियान

शिवसागर, 23 जुलाई : उपरी असम में आई अभूतपूर्व और विनाशकारी बाढ़ को लेकर जमीयत उलेमा-ए-असम के अध्यक्ष, पूर्व सांसद  तथा बिन्नकांडी से विधायक मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने केंद्र सरकार से प्रभावित जिलों के लिए 1,000 करोड़ रुपये के विशेष बाढ़ राहत पैकेज की घोषणा करने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भारत की राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट सहित उपरी असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

शिवसागर के जोला गांव से राहत अभियान का शुभारंभ

मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने गुरुवार को शिवसागर शहर के निकट जोला गांव से Ajmal Foundation द्वारा संचालित “Emergency Flood Relief–2026 in Upper Assam” अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री वितरित की तथा लोगों की समस्याओं को निकट से जाना। उन्होंने कहा कि उपरी असम में आई इस भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है और अनेक लोग आज भी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव में भारी तबाही

अजमल ने कहा कि लगातार हुई मूसलाधार वर्षा, नदियों के उफान और व्यापक जलभराव के कारण जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव जिलों में अभूतपूर्व तबाही हुई है। हजारों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं तथा कई गांवों का संपर्क अब भी पूरी तरह से कटा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवीय संकट का रूप ले चुकी है।

‘आपदा में धर्म और जाति नहीं, केवल मानवता मायने रखती है’

मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों में लगभग 99 प्रतिशत हिंदू समुदाय के लोग हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदा के समय धर्म और जाति का कोई महत्व नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है और अजमल फाउंडेशन बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद तक राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में सभी को मिलकर पीड़ित परिवारों की सहायता करनी चाहिए।

स्वास्थ्य संकट और महामारी की आशंका जताई

पूर्व सांसद ने कहा कि बाढ़ के कारण 60–70 से अधिक लोगों एवं पशुओं की मृत्यु की घटनाएं सामने आई हैं। बड़ी संख्या में पशुओं के शव, दूषित जल और गंदगी के कारण प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर जनस्वास्थ्य संकट उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने, पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तथा महामारी की रोकथाम के लिए विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाने की मांग की।

केंद्र सरकार से रखीं प्रमुख मांगें

मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने केंद्र सरकार से तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने की अपील की—

उपरी असम के लिए 1,000 करोड़ रुपये का विशेष बाढ़ राहत पैकेज घोषित किया जाए।

दुर्गम एवं जलमग्न क्षेत्रों में फंसे लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए भारतीय सेना के हेलिकॉप्टरों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाए।

प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के लिए अधिक NDRF टीमों की तैनाती की जाए।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण तथा किसानों और पशुपालकों को विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

खाद्यान्न, दवाइयों, स्वच्छ पेयजल और आवश्यक जीवनोपयोगी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

तीन दिनों तक राहत कार्यों की निगरानी करेंगे अजमल

मौलाना अजमल ने घोषणा की कि वह स्वयं तीन दिनों तक उपरी असम में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करेंगे। उन्होंने बताया कि “Emergency Flood Relief–2026 in Upper Assam” अभियान के तहत हजारों बाढ़ प्रभावित परिवारों तक खाद्यान्न, दवाइयां, स्वच्छ पेयजल, आवश्यक घरेलू सामग्री तथा अन्य राहत सामग्री पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उपरी असम अब भी गंभीर बाढ़ संकट से जूझ रहा

उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिले अभूतपूर्व बाढ़ की चपेट में हैं। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है तथा NDRF, SDRF, भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटी हुई हैं। राज्य सरकार द्वारा हेलिकॉप्टरों के माध्यम से एयरलिफ्ट और एयरड्रॉप अभियान भी संचालित किया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं और प्रशासन को युद्धस्तर पर सहायता अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

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