2028 में 500 वर्ष पूरे करेगा ऐतिहासिक ढेकियाखोवा बरनामघर—आस्था, विरासत और आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगी नई ऊंचाई : मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बरनामघर में माथा टेककर लिया आशीर्वाद, 500वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारी
महापुरुष श्रीश्री माधवदेव द्वारा 1528 में स्थापित पवित्र बरनामघर को प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर सरकार का जोर

टियोक, 15 सितंबर : असम की समृद्ध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैष्णव विरासत के प्रमुख केंद्रों में शामिल ऐतिहासिक ढेकियाखोवा बरनामघर वर्ष 2028 में अपनी स्थापना के गौरवशाली 500 वर्ष पूरे करने जा रहा है। महापुरुष श्रीश्री माधवदेव द्वारा वर्ष 1528 में स्थापित यह पवित्र बरनामघर करीब पांच शताब्दियों से असम की वैष्णव संस्कृति, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है। इस ऐतिहासिक पड़ाव को यादगार बनाने के साथ बरनामघर को आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी राज्य सरकार विशेष पहल करने जा रही है।

500वीं वर्षगांठ की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री ने किए दर्शन
ढेकियाखोवा बरनामघर की वर्ष 2028 में होने वाली 500वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर को लेकर विशेष तैयारियों की बात कही गई है। इसी क्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को ढेकियाखोवा बरनामघर पहुंचकर श्रद्धापूर्वक माथा टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री ने बरनामघर के पवित्र वातावरण में अपनी श्रद्धा अर्पित करने के साथ इसकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को नमन किया। इस दौरान स्थानीय टियोक विधायक विकास सैकिया भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे।

‘500 वर्ष पूरे होना पूरे असम के लिए गौरव का विषय’
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने ढेकियाखोवा बरनामघर की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2028 में इसके 500 वर्ष पूरे होना पूरे असम के लिए गौरव का विषय है। लगभग पांच शताब्दियों की यह यात्रा प्रदेश की धार्मिक आस्था के साथ असम की वैष्णव संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की निरंतरता को भी दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर को विशेष रूप से मनाने के साथ बरनामघर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। परिसर के आध्यात्मिक वातावरण को और बेहतर बनाने तथा श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ढेकियाखोवा बरनामघर को असम के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था के इस महत्वपूर्ण केंद्र की ऐतिहासिक पहचान को और व्यापक बनाना तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को असम की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को असम की वैष्णव परंपरा, आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक इतिहास को समझने तथा अनुभव करने का अवसर मिले, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाओं और सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।

आस्था, इतिहास और पर्यटन का होगा संगम
मुख्यमंत्री ने कहा कि ढेकियाखोवा बरनामघर की 500वीं वर्षगांठ के अवसर पर धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन विकास को एक साथ जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर आयोजन की तैयारियां की जाएंगी। इस ऐतिहासिक अवसर के माध्यम से बरनामघर की पांच शताब्दियों पुरानी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ इसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
500वीं वर्षगांठ का आयोजन असम की गौरवशाली वैष्णव परंपरा और संस्कृति को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का भी अवसर बनेगा। इससे ढेकियाखोवा बरनामघर की पहचान एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के साथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में और मजबूत होने की संभावना है।

देश-दुनिया के सामने आएगी असम की पांच शताब्दियों पुरानी विरासत
ढेकियाखोवा बरनामघर की 500वीं वर्षगांठ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि असम की समृद्ध वैष्णव परंपरा, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिक चेतना को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर बनने जा रही है।
महापुरुष श्रीश्री माधवदेव द्वारा 1528 में स्थापित इस पवित्र स्थल की पांच शताब्दियों की यात्रा असम की आध्यात्मिक विरासत की जीवंत पहचान है। वर्ष 2028 में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक समारोह जहां श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखेगा, वहीं इसके माध्यम से क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की भी उम्मीद है।
राज्य सरकार की पहल और 500वीं वर्षगांठ की व्यापक तैयारियों के साथ ढेकियाखोवा बरनामघर आने वाले वर्षों में असम की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने वाले महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।




