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शिवसागर के ऐतिहासिक जयसागर तालाब के सौंदर्यीकरण को लेकर प्रशासन की विशेष पहल : जिला आयुक्त मृदुल यादव ने किया निरीक्षण : आहोम कालीन धरोहर को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी

अतिरिक्त जिला आयुक्त लुकुमणि बोरा और विभागीय अधिकारियों के साथ विकास, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण योजनाओं पर विस्तृत चर्चा

शिवसागर, 3 जुलाई : असम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माने जाने वाले जयसागर तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण को लेकर शिवसागर जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिले के ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने और पर्यटन की संभावनाओं को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से शिवसागर के जिला आयुक्त मृदुल यादव ने शुक्रवार को जयसागर तालाब परिसर का क्षेत्रीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान जिला आयुक्त के साथ अतिरिक्त जिला आयुक्त लुकुमणि बोरा, लोक निर्माण विभाग (सड़क) सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र का जायजा लेते हुए तालाब परिसर के सौंदर्यीकरण, आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यटकों के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।

जयसागर तालाब : आहोम साम्राज्य की ऐतिहासिक विरासत और मातृ प्रेम का प्रतीक

जयसागर तालाब असम के गौरवशाली आहोम शासनकाल की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। इसका निर्माण आहोम राजा स्वर्गदेव रुद्र सिंह ने वर्ष 1697 ईस्वी में अपनी माता वीरांगना जयमती कुंवरी की स्मृति में करवाया था।

इतिहास के अनुसार, जयमती कुंवरी ने आहोम राज्य और अपने पति गदाधर सिंह की रक्षा के लिए अत्याचार सहते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उनके त्याग और साहस को अमर बनाने के लिए राजा स्वर्गदेव रुद्र सिंह ने इस विशाल जलाशय का निर्माण करवाया और इसका नाम अपनी माता के नाम पर “जयसागर” रखा।

भारत के सबसे बड़े मानव निर्मित ऐतिहासिक तालाबों में शामिल

जयसागर तालाब अपनी विशालता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। लगभग 318 एकड़ क्षेत्र में फैला यह जलाशय आहोम काल की उत्कृष्ट इंजीनियरिंग क्षमता और दूरदर्शिता का उदाहरण माना जाता है।

कहा जाता है कि इसका निर्माण बहुत कम समय में पूरा किया गया था और सदियों बाद भी यह तालाब शिवसागर की पहचान बना हुआ है। आज भी इसका जलस्तर, प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है।

ऐतिहासिक मंदिरों और पर्यटन स्थलों से घिरा है जयसागर क्षेत्र

जयसागर तालाब केवल एक जलाशय नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का केंद्र भी है। इसके आसपास आहोम काल में निर्मित कई ऐतिहासिक मंदिर स्थित हैं, जिनमें जय दौल, शिव दौल, विष्णु दौल, देवी दौल
प्रमुख है।

इन प्राचीन मंदिरों की वास्तुकला अहोम युग की कला, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को दर्शाती है। यही कारण है कि जयसागर क्षेत्र इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

सौंदर्यीकरण से पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

निरीक्षण के दौरान जिला आयुक्त मृदुल यादव ने अधिकारियों से तालाब और आसपास के क्षेत्र में किए जा सकने वाले विकास कार्यों की जानकारी ली।

संभावित योजनाओं में क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना, हरित क्षेत्र को बढ़ावा देना, पर्यटकों के लिए सुविधाएं मजबूत करना, सड़क एवं आवागमन व्यवस्था सुधारना और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए सौंदर्यीकरण करना शामिल है।

विरासत संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं का संतुलन बनाने पर जोर

जिला प्रशासन का उद्देश्य जयसागर जैसे ऐतिहासिक स्थलों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ते हुए उनकी मूल पहचान और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखना है।

जिला आयुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि विकास कार्यों की योजना बनाते समय इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा और सांस्कृतिक महत्व को प्राथमिकता दी जाए।

शिवसागर पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की उम्मीद

आहोम राजाओं की राजधानी रहे शिवसागर में रंगघर, तलातल घर, शिव दौल, शिवसागर तालाब और जयसागर जैसे ऐतिहासिक स्थल पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं।

जयसागर तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की यह पहल आने वाले समय में शिवसागर जिले को एक प्रमुख विरासत पर्यटन केंद्र (Heritage Tourism Destination) के रूप में और मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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