संस्कृत भाषा में शपथ लेने वाले देश के राज्यों के पहले मंत्री बने बिमल बोरा : संस्कृत भारती ने किया विशेष सम्मान : ‘संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति, दर्शन और सनातन विरासत की अमूल्य धरोहर है’ — मंत्री बिमल बोरा
असम विधानसभा में संस्कृत भाषा में शपथ लेने वाले 17 विधायकों में से 13 का सम्मान, संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर दिया गया जोर

गुवाहाटी, 6 जुलाई : देवभाषा संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान, संस्कृति, दर्शन और सनातन परंपरा की एक अमूल्य वाहक है। संस्कृत भारत की आध्यात्मिक, वैचारिक और बौद्धिक विरासत की पहचान रही है। यह बात असम सरकार के उद्योग, वाणिज्य एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग के मंत्री बिमल बोरा ने कही।

वे संस्कृत भारती, उत्तर असम प्रांत के तत्वावधान में असम विधानसभा के केंद्रीय सभागार में आयोजित “विशेष सम्मान समारोह” में बतौर अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर संस्कृत भाषा के संरक्षण, प्रचार और जन-जन तक इसके प्रसार के प्रयासों को लेकर विशेष चर्चा की गई।

संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास सराहनीय — बिमल बोरा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री बिमल बोरा ने कहा कि संस्कृत भारतीय सभ्यता की जड़ों से जुड़ी हुई भाषा है। इस भाषा में भारत के प्राचीन ज्ञान, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों का विशाल भंडार समाहित है।
उन्होंने संस्कृत को और अधिक लोकप्रिय तथा जनमुखी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे संगठन संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना करते हुए संगठन को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
मंत्री बोरा ने कहा कि संस्कृत एक अत्यंत व्यवस्थित, परिष्कृत और वैज्ञानिक भाषा है। हजारों वर्षों से यह भाषा भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला रही है।

‘ऋग्वेद जैसी प्राचीन रचनाओं की भाषा रही संस्कृत’
अपने संबोधन में मंत्री बिमल बोरा ने कहा कि लगभग डेढ़ हजार वर्ष ईसा पूर्व विकसित हुई संस्कृत भाषा में विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में शामिल ऋग्वेद की रचना हुई थी।
उन्होंने कहा कि संस्कृत ने न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में, बल्कि साहित्य, दर्शन, विज्ञान और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
बोरा ने कहा कि वर्तमान समय में असम सहित पूरे भारत में देवभाषा संस्कृत के प्रति नई रुचि, जागरूकता और सम्मान का सकारात्मक वातावरण बन रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए शुभ संकेत है।

संस्कृत में शपथ लेने वाले देश के पहले राज्य मंत्री के रूप में बिमल बोरा का उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान संस्कृत भारती के सांगठनिक सचिव भवेन सैकिया ने समारोह का उद्देश्य बताते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों की सरकारों में संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों में बिमल बोरा देश के पहले मंत्री हैं।
उन्होंने कहा कि यह कदम संस्कृत भाषा के प्रति सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भवेन सैकिया ने कहा कि संस्कृत भारती लंबे समय से संस्कृत को केवल अध्ययन की भाषा नहीं, बल्कि आम संवाद और व्यवहार की भाषा बनाने के उद्देश्य से कार्य कर रही है।

संस्कृत में शपथ लेने वाले 13 विधायकों को किया गया सम्मानित
विशेष सम्मान समारोह के दौरान असम विधानसभा में संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण करने वाले कुल 17 विधायकों में से उपस्थित 13 विधायकों को सम्मानित किया गया।
आयोजकों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा संस्कृत भाषा को अपनाना भाषा के संरक्षण और इसके प्रति समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला कदम है।

असम विधानसभा अध्यक्ष सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस विशेष कार्यक्रम में असम विधानसभा के अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी, मंत्री जयंत मल्ल बरुवा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता रंजीत कुमार दास तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) उत्तर असम प्रांत के कार्यवाह खगेन सैकिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
वक्ताओं ने संस्कृत भाषा की ऐतिहासिक भूमिका, भारतीय संस्कृति में इसके महत्व और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

23 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
संस्कृत भारती उत्तर असम प्रांत की अध्यक्ष डॉ. सुदेष्णा भट्टाचार्य के संचालन में आयोजित इस सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमियों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम में असम विधानसभा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास, सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी असम प्रदेश के अध्यक्ष दिलीप कुमार सैकिया, मंत्री जयंत मल्ल बरुवा, मंत्री नीलिमा देवी, मंत्री विश्वजीत दैमारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) उत्तर असम प्रांत के कार्यवाह खगेन सैकिया, कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं प्राच्य अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. प्रह्लाद जोशी, संस्कृत भारती के महासचिव पंकज शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इसके अलावा राज्य के 23 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर संस्कृत भाषा के प्रति अपनी रुचि और समर्थन व्यक्त किया।

संस्कृत संरक्षण और प्रचार को नई ऊर्जा देने का संदेश
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान परंपरा का आधार है। आधुनिक समय में इसके अध्ययन और प्रयोग को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने संस्कृत भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने, इसके अध्ययन को प्रोत्साहित करने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का संकल्प लिया।




