शिवसागर में बाढ़ के बीच कालाबाज़ारी के गंभीर आरोप : पेयजल और मोमबत्ती के दुगने दाम वसूलने की शिकायतें, कृत्रिम किल्लत पैदा कर मुनाफाखोरी का आरोप : बाढ़ पीड़ितों में बढ़ा आक्रोश, प्रशासन से तत्काल छापेमारी, मूल्य निगरानी और कड़ी कार्रवाई की मांग

शिवसागर, 23 जुलाई : भीषण बाढ़ से जूझ रहे शिवसागर जिले में राहत एवं बचाव कार्यों के बीच अब पेयजल और आवश्यक वस्तुओं की कथित कालाबाज़ारी के आरोप सामने आने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ व्यापारी आपदा की स्थिति का लाभ उठाकर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर (बोतलबंद पानी), मोमबत्ती तथा अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री को निर्धारित कीमत से कहीं अधिक दरों पर बेच रहे हैं। इससे पहले से ही बाढ़ की मार झेल रहे हजारों परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
दुगने दाम वसूलने और कृत्रिम किल्लत पैदा करने का आरोप
स्थानीय नागरिकों के अनुसार कई प्रभावित इलाकों में पानी की बोतलों और मोमबत्तियों के दाम कथित रूप से लगभग दुगने तक वसूले जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ दुकानदार आवश्यक वस्तुओं की सीमित उपलब्धता दिखाकर कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) पैदा कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को मजबूरी में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और प्रशासन द्वारा जांच किए जाने की अपेक्षा की जा रही है।
पेयजल सबसे बड़ी जरूरत, मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा : स्थानीय लोगों का आरोप
बाढ़ के कारण अधिकांश हैंडपंप, कुएं और अन्य जलस्रोत दूषित हो चुके हैं। ऐसे में पैकेज्ड पेयजल ही बड़ी संख्या में लोगों की प्राथमिक आवश्यकता बन गया है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि इस आपदा की घड़ी में कुछ व्यापारी जरूरतमंदों की मजबूरी का फायदा उठाकर अधिक मुनाफा कमाने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि राहत सामग्री के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रशासन से छापेमारी और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से बाजारों में विशेष निगरानी अभियान चलाने, दुकानों का औचक निरीक्षण करने तथा कालाबाज़ारी, मुनाफाखोरी और निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले व्यापारियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई करने की अपील की गई है।
आपदा के दौरान आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी की जिम्मेदारी
असम सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों से जुड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की नियमित निगरानी की जाती है। संबंधित अधिकारियों को बाजार का निरीक्षण करने, कृत्रिम किल्लत, जमाखोरी और अनुचित मूल्य वृद्धि पर नजर रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
कानूनी प्रावधान भी उपलब्ध
यदि जांच में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, कृत्रिम किल्लत या अन्य संबंधित अनियमितताएं सामने आती हैं, तो परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act, 1955), उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, विधिक माप विज्ञान अधिनियम (Legal Metrology Act) तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कौन-सा कानून लागू होगा, यह प्रत्येक मामले के तथ्यों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
निरंतर निगरानी की मांग
बाढ़ प्रभावित लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि राहत कार्यों के साथ-साथ बाजारों पर भी लगातार निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी व्यापारी द्वारा ओवरप्राइसिंग, मुनाफाखोरी या कृत्रिम किल्लत पैदा कर आम लोगों का आर्थिक शोषण न किया जा सके। लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के समय आवश्यक वस्तुएं उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना प्रशासन और व्यापारिक समुदाय दोनों की सामाजिक जिम्मेदारी है।




