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सेवा, गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक अभियान : मारवाड़ी महिला समिति शिवसागर ने एक साथ पूरे किए चार सेवा प्रकल्प : गौ सेवा से लेकर महिला बंदियों के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण तक सामाजिक उत्तरदायित्व का दिया उत्कृष्ट उदाहरण

सेवा केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का आधार है — सारिका देवड़ा 

शिवसागर, 29 जून : “मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है। जब सेवा का भाव जीवों, पर्यावरण और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचता है, तभी समाज में संवेदनशीलता, संस्कार और सकारात्मक परिवर्तन का संचार होता है।”

इसी प्रेरणादायी विचार को आत्मसात करते हुए अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के असम प्रांत अंतर्गत मारवाड़ी महिला समिति, शिवसागर ने सेवा, गौसेवा, महिला कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े चार महत्वपूर्ण सामाजिक सेवा प्रकल्पों का सफल आयोजन कर समाज के सामने सेवा और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

समिति द्वारा संचालित इन सेवा अभियानों का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में करुणा, सह-अस्तित्व, जीव दया, महिला सम्मान तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरण उत्पन्न करना भी रहा।

प्रथम सेवा प्रकल्प : तस्करों के चंगुल से रेस्क्यू की गई गौमाताओं की सेवा

समिति के प्रथम सेवा प्रकल्प के अंतर्गत शिवसागर पुलिस रिजर्व में संरक्षित लगभग 40 रेस्क्यू की गई गौमाताओं के लिए विशेष सेवा अभियान चलाया गया। गौमाताओं को हरा चारा, तरबूज, केले तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया गया।

समिति ने बताया कि इससे पूर्व भी रेस्क्यू की गई गौमाताओं के लिए इसी प्रकार का सेवा अभियान संचालित किया जा चुका है। समिति के अनुसार गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है तथा केवल गौ संरक्षण ही नहीं, बल्कि उनके उचित पालन-पोषण एवं स्वास्थ्य की जिम्मेदारी निभाना भी समाज का नैतिक दायित्व है।

निर्जला एकादशी पर राहगीरों की प्यास बुझाने का अभियान

भीषण गर्मी एवं निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर शहर के एटी रोड़ स्थित श्री मारवाड़ी पंचायत मिलन मंदिर के समक्ष समिति द्वारा सेवा शिविर आयोजित किया गया।

इस दौरान राहगीरों को 250 गिलास ताजा गन्ने का रस वितरित किया गया। समाजसेविका रेणु अग्रवाल एवं अंजना अग्रवाल द्वारा अतिरिक्त 150 गिलास आम रस का वितरण किया गया, जबकि नीतू झुरिया ने इस सेवा कार्य में आर्थिक सहयोग प्रदान किया।

समिति की सभी सदस्यों ने स्वयं उपस्थित रहकर राहगीरों को शीतल पेय वितरित किया तथा मानव सेवा की भावना को साकार किया।

महिला बंदियों के सम्मान और स्वास्थ्य का भी रखा विशेष ध्यान

समाज के उपेक्षित एवं संवेदनशील वर्ग तक सेवा पहुँचाने के उद्देश्य से समिति ने शिवसागर जिला कारागार की 35 महिला बंदियों को 35 सेनेटरी नैपकिन एवं 35 साबुन वितरित किए। इसके अतिरिक्त समाजसेविका सरोज चोखानी ने कारागार में रह रहे छोटे बच्चों के लिए आवश्यक वस्त्र भी भेंट किए। इस सेवा प्रकल्प की संयोजिका सरोज चोखानी तथा सह-संयोजिका संगीता झूरिया रहीं।

समिति का मानना है कि कारागार में रह रहे व्यक्तियों के प्रति भी संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार समाज की सभ्यता का परिचायक है।

हरित भविष्य के लिए बीज वितरण अभियान

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से समिति ने व्यापक स्तर पर बीज संग्रह कर पौधों के रूप में विकसित करने का अभियान भी चलाया। इस अभियान के अंतर्गत गाजियाबाद के मोहननगर सहित विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण हेतु 130 आम के बीज, 170 लीची के बीज, 40 चेरी के बीज और 3 खुबानी के बीज भेजे गए हैं।

इस अभियान का उद्देश्य आने वाले वर्षों में अधिकाधिक फलदार एवं छायादार वृक्ष तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है। इस प्रकल्प की संयोजिका कविता अग्रवाल तथा सह-संयोजिका स्वाति बुखरेड़िया रहीं।

सेवा हमारी संस्कृति का आधार है — सारिका देवड़ा

मारवाड़ी महिला समिति शिवसागर की अध्यक्षा सारिका देवड़ा ने कहा कि हमारी संस्था का मूल उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक सेवा पहुँचाना है। गौसेवा, महिला कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा भारतीय संस्कृति के मूल संस्कार हैं। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने सामर्थ्य के अनुसार सेवा का संकल्प लेता है, तभी सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

उन्होंने कहा कि समिति भविष्य में भी इसी प्रकार के समाजोपयोगी कार्यक्रम निरंतर संचालित करती रहेगी।

छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिवर्तन लाते हैं — प्रीति केजरीवाल

समिति की सचिव प्रीति केजरीवाल ने कहा कि छोटे-छोटे सेवा कार्य समाज में बड़े परिवर्तन की शुरुआत करते हैं। महिला शक्ति यदि सेवा के क्षेत्र में आगे आए तो समाज का हर वर्ग लाभान्वित हो सकता है। हमारा प्रयास रहेगा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएं।

सेवा ही सबसे बड़ा निवेश है — संगीता झूरिया

समिति की कोषाध्यक्ष संगीता झूरिया ने कहा कि समाज के सहयोग, दानदाताओं के विश्वास और सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से ही ऐसे सेवा प्रकल्प सफल हो पाते हैं। सेवा में लगाया गया प्रत्येक संसाधन समाज के उज्ज्वल भविष्य में किया गया निवेश है।

उन्होंने सभी सहयोगकर्ताओं, संयोजिकाओं एवं स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।

सामूहिक प्रयास बना सफलता की कुंजी

समिति ने बताया कि इन चारों सेवा प्रकल्पों की सफलता में संस्था की सभी सदस्यों, संयोजिकाओं, स्वयंसेवकों, सहयोगकर्ताओं एवं दानदाताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के समापन पर सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी समाज सेवा, जीव दया, गौसेवा, महिला कल्याण, स्वास्थ्य जागरूकता तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐसे कार्यक्रम निरंतर संचालित करने का संकल्प दोहराया गया।

समिति की जनसंपर्क अधिकारी पायल अग्रवाल ने बताया कि संस्था आगे भी समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सेवा कार्यों की श्रृंखला निरंतर जारी रखेगी, ताकि “सेवा ही संगठन की पहचान” का उद्देश्य सार्थक रूप से पूरा किया जा सके।

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