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ऐतिहासिक जमुना संरक्षण पर आटासू का बड़ा बयान : ‘सिर्फ सफाई नहीं, पहले अतिक्रमण हटाइए’ : केंद्रीय अध्यक्ष बसंत गोगोई ने विधायक अखिल गोगोई और जिला प्रशासन से पूछा— अतिक्रमण हटाए बिना कैसे सफल होगा संरक्षण अभियान ?

सफाई कार्य शुरू होने का किया स्वागत, लेकिन कहा— ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण वोट बैंक या ठेकेदारों के हित में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए

‘यदि प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करेगा तो आटासू हर स्तर पर सहयोग करेगा’— बसंत गोगोई

शिवसागर, 29 जून : शिवसागर की ऐतिहासिक धरोहर जमुना जलाशय श्रृंखला (Jamuna Wetlands) के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सोमवार को शिवसागर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में ऑल ताई आहोम स्टूडेंट्स यूनियन (आटासू) के केंद्रीय अध्यक्ष बसंत गोगोई ने ऐतिहासिक जमुना जलाशयों में चल रहे सफाई अभियान, अतिक्रमण और संरक्षण प्रक्रिया को लेकर विस्तार से अपनी संस्था का पक्ष रखा।

उन्होंने एक ओर वर्षों से लंबित सफाई कार्य प्रारंभ होने का स्वागत करते हुए विधायक अखिल गोगोई को धन्यवाद दिया, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन और विधायक से यह सवाल भी पूछा कि जब तक ऐतिहासिक जलाशयों से अवैध अतिक्रमण नहीं हटाया जाएगा, तब तक करोड़ों रुपये खर्च कर किए जा रहे सौंदर्यीकरण और सफाई कार्यों का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।

‘जमुना केवल जलाशय नहीं, हमारी ऐतिहासिक पहचान है’

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बसंत गोगोई ने कहा कि शिवसागर की ऐतिहासिक जमुना श्रृंखला केवल जलाशय नहीं, बल्कि ताई-अहोम सभ्यता, असम की सांस्कृतिक विरासत और शिवसागर की ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि इन जलाशयों का संरक्षण केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इन्हें मूल स्वरूप में संरक्षित करने के लिए वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और दीर्घकालिक योजना तैयार की जानी चाहिए।

‘आटासू वर्षों से उठा रहा है अतिक्रमण हटाने की मांग’

बसंत गोगोई ने कहा कि सदौ ताई आहोम छात्र संस्था लंबे समय से सरकार और जिला प्रशासन के समक्ष यह मांग रखती रही है कि ऐतिहासिक जमुनाओं को सबसे पहले पूर्ण रूप से अतिक्रमण मुक्त किया जाए।

उन्होंने कहा कि संस्था ने कई बार ज्ञापन, आंदोलन और विभिन्न मंचों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाए बिना केवल जलाशयों की सफाई कर देना स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

उनके अनुसार यदि जलाशयों की प्राकृतिक सीमा पर अवैध कब्जे बने रहेंगे तो भविष्य में फिर वही समस्या उत्पन्न होगी।

‘सफाई अभियान स्वागत योग्य, लेकिन मूल समस्या अभी भी कायम’

आटासू अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान में ऐतिहासिक जमुनाओं की सफाई का कार्य प्रारंभ होना निश्चित रूप से सकारात्मक कदम है और इसके लिए विधायक अखिल गोगोई को धन्यवाद दिया जाना चाहिए।

हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई अभियान प्रारंभ करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे—अतिक्रमण हटाने—को प्राथमिकता नहीं दी गई।

उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद अवैध कब्जे यथावत बने रहते हैं तो पूरी परियोजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

विधायक अखिल गोगोई पर भी उठाए सवाल

प्रेस वार्ता में बसंत गोगोई ने आरोप लगाया कि विधायक अखिल गोगोई ने सफाई अभियान पर विशेष जोर दिया है, लेकिन अतिक्रमण के मुद्दे पर स्पष्ट और ठोस पहल अभी तक दिखाई नहीं दी।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए सबसे पहले जलाशयों की मूल सीमा को बहाल करना आवश्यक है। यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो भविष्य में फिर से जलाशय संकट में पड़ जाएंगे।

‘क्या परियोजना संरक्षण के लिए है या ठेकेदारों के लाभ के लिए?’

बसंत गोगोई ने प्रेस वार्ता के दौरान यह भी सवाल उठाया कि वर्तमान में चल रहे करोड़ों रुपये के सफाई अभियान का वास्तविक उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण है या फिर इससे किसी ठेकेदार को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जनता के बीच इस प्रकार के प्रश्न उठ रहे हैं और सरकार तथा संबंधित विभागों को पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य करते हुए इन आशंकाओं का निराकरण करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि परियोजना पूरी तरह पारदर्शी होगी तो किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

‘वोट बैंक की राजनीति स्वीकार नहीं’

आटासू के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर वोट बैंक की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आधे-अधूरे कदम उठाकर केवल राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास उचित नहीं है। ऐतिहासिक धरोहरें किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों की साझा विरासत हैं।

प्रशासन करेगा कार्रवाई तो आटासू देगा पूरा सहयोग

बसंत गोगोई ने स्पष्ट कहा कि यदि शिवसागर जिला प्रशासन ऐतिहासिक जमुनाओं से अतिक्रमण हटाने की दिशा में निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करता है तो सदौ ताई आहोम छात्र संस्था हर स्तर पर प्रशासन का सहयोग करेगी।

उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य किसी व्यक्ति, विधायक या राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

प्रेस वार्ता के अंत में बसंत गोगोई ने दोहराया कि ऐतिहासिक जमुनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने के मुद्दे पर संस्था किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा और सरकार एवं प्रशासन पर उचित कार्रवाई के लिए लगातार दबाव बनाया जाएगा।

जमुना श्रृंखला का ऐतिहासिक महत्व

उल्लेखनीय है कि शिवसागर की ऐतिहासिक जमुना जलाशय श्रृंखला को अहोम शासनकाल की महत्वपूर्ण जल संरचनाओं में माना जाता है। इन जलाशयों का उपयोग ऐतिहासिक रूप से जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन तथा स्थानीय जल निकासी व्यवस्था के लिए किया जाता रहा है।

वर्तमान में इन जलाशयों के संरक्षण, गाद निकासी और सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपये की लागत से कार्य कराया जा रहा है। हाल ही में विधायक अखिल गोगोई ने भी परियोजना स्थल का निरीक्षण कर कार्यों की समीक्षा की थी।

अब आटासू द्वारा अतिक्रमण हटाने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद यह विषय एक बार फिर सार्वजनिक, सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक आटासू द्वारा लगाए गए आरोपों पर शिवसागर जिला प्रशासन अथवा विधायक अखिल गोगोई की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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