शिवसागर सिविल हॉस्पिटल में हंगामा : जिला विकास आयुक्त पर चिकित्सा कर्मचारी का हमला ? कर्मचारी का पलटवार : दोनों पक्षों ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई

शिवसागर 10 मई : रविवार को शिवसागर सिविल हॉस्पिटल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिला विकास आयुक्त (डीडीसी) पवित्र कुमार दास पर एक चतुर्थ श्रेणी के अनियमित कर्मचारी द्वारा हमले का आरोप लगा है। जबकि कर्मचारी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए डीडीसी पर ही मारपीट का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों ने स्थानीय जयसागर पुलिस चौकी में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है।
मिली जानकारी के अनुसार डीडीसी पवित्र कुमार दास टिटनस का टीका लगवाने रविवार सुबह 10 बजे हॉस्पिटल पहुंचे थे। उनके साथ उनका ड्राइवर और एक चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी भी मौजूद था। डीडीसी टीका लगवाने की प्रक्रिया में थे, तभी अस्पताल के अनियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अकोनी फुकन ने कथित तौर पर आयुक्त के शर्ट के कॉलर को पकड़कर उन्हें मारने की कोशिश की।
डीडीसी पवित्र कुमार दास ने इस घटना की लिखित शिकायत जयसागर पुलिस चौकी में दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अकोनी फुकन ने उन पर हमला करने की कोशिश की।
वहीं हॉस्पिटल के कर्मचारी अकोनी फुकन ने पलटवार करते हुए इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनके अनुसार जिला विकास आयुक्त खड़े होकर टीका लगवाना चाहते थे, जिस पर उन्होंने सलाह दी कि टीका बैठकर लगवाना ज्यादा उचित रहेगा। इस सलाह पर आयुक्त नाराज हो गए और उन्होंने खुद अकोनी फुकन को मारा।
इधर अकोनी फुकन ने भी जयसागर पुलिस चौकी में डीडीसी पवित्र कुमार दास के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। अकोनी फुकन पिछले 25 वर्षों से शिवसागर सिविल हॉस्पिटल में चतुर्थ श्रेणी के अनियमित कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इतने लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें मात्र 3500 रुपये मासिक पारिश्रमिक मिलता है। इस घटना में सिविल हॉस्पिटल के अन्य चिकित्सा कर्मचारियों ने भी हंगामा किया।
शिवसागर पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर ली हैं। पुलिस अधिकारी का कहना है कि जांच में ही सच्चाई सामने आएगी कि वास्तव में कौन दोषी है। मौके पर मौजूद गवाहों के बयान, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर जांच चल रही है।
यह घटना जिला सदर के सरकारी हॉस्पिटल में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही कम वेतन, अनियमित नियुक्ति और कार्यभार की समस्याओं को भी उजागर करती है। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य कर्मचारियों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। कुछ लोग डीडीसी के पद का सम्मान बनाए रखने की बात कर रहे हैं, तो कुछ अनियमित कर्मचारियों की दयनीय स्थिति पर सहानुभूति जता रहे हैं।
शिवसागर जिला प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। जिले के शीर्ष प्रशासनिक और स्वास्थ्य सेवा विभाग के कर्मचारी के बीच का यह मामला आम जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सच्चाई सामने आने तक दोनों पक्षों के दावों को लेकर जनता में कौतूहल बना हुआ है।




