मोरानहाट में “समन्वय 2026” ने रचा इतिहास : पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के दो दिवसीय लघु अधिवेशन में दिखी संस्कृति, संगठन और सामाजिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल : असम और राजस्थान की सांस्कृतिक छटा से सजा मोरानहाट, राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर स्थानीय समाज तक ने की आयोजन की मुक्तकंठ से सराहना
“मोरानहाट शाखा ने पूर्वोत्तर में अधिवेशन आयोजन का नया बेंचमार्क स्थापित किया” — कैलाश काबरा

मोरानहाट, 23 मई : पूर्वोत्तर भारत में सामाजिक समन्वय, सांस्कृतिक एकता और संगठनात्मक शक्ति का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन का दो दिवसीय प्रांतीय लघु अधिवेशन “समन्वय 2026”। गत 16 एवं 17 मई को मोरानहाट शाखा के आतिथ्य में आयोजित इस भव्य अधिवेशन ने न केवल संगठनात्मक दृष्टि से सफलता के नए आयाम स्थापित किए, बल्कि स्थानीय समाज और मारवाड़ी समाज के बीच सौहार्द, सहभागिता और सांस्कृतिक समन्वय की भी नई इबारत लिख दी।

हालांकि प्रांतीय स्तर पर यह आयोजन दो दिवसीय था, लेकिन मेजबान मोरानहाट शाखा ने इसकी शुरुआत एक दिन पूर्व यानी 15 मई से ही कर दी थी। शुक्रवार की शाम श्री राधाकृष्ण विवाह भवन में निर्मित भव्य पंडाल परिसर में भगवान गणेश के आह्वान के साथ इस समन्वय पर्व का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा, निवर्तमान प्रांतीय अध्यक्ष ओमप्रकाश खंडेलवाल, प्रांतीय महामंत्री रमेश चांडक, प्रांतीय उपाध्यक्ष बिनोद लोहिया, राजेंद्र हरलालका, प्रांतीय सलाहकार रमेश अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

स्वागताध्यक्ष ओमप्रकाश गाड़ोदिया द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ अधिवेशन के प्रारंभ की औपचारिक घोषणा की गई। स्वागत मंत्री पवन मोर के संचालन में आयोजित इस प्रारंभिक सत्र में संगठनात्मक एकता और सामाजिक समन्वय की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
सुबह 3 बजे से शुरू हुआ प्रतिनिधियों का आगमन
16 मई की सुबह तड़के 3 बजे से ही प्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। पूरे आयोजन में कुल 258 प्रतिनिधियों ने पंजीकरण करवाया, जिनमें 209 पुरुष और 49 महिला प्रतिनिधि शामिल थे। इसके अतिरिक्त विभिन्न शाखाओं, महिला सम्मेलन, युवा मंच और स्थानीय सामाजिक संगठनों के सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

आयोजन में मोरानहाट शाखा के 133 सदस्य, मारवाड़ी युवा मंच तथा मारवाड़ी महिला सम्मेलन की मातृशक्ति लगातार कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रही। पूरे कार्यक्रम के दौरान संगठनात्मक अनुशासन, अतिथि सत्कार और व्यवस्थाओं ने सभी को प्रभावित किया।
राष्ट्रीय से लेकर मंडलीय नेतृत्व तक की ऐतिहासिक उपस्थिति
इस अधिवेशन में सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गोयनका, राष्ट्रीय संगठन मंत्री बसंत सुराणा, प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा, निवर्तमान अध्यक्ष ओमप्रकाश खंडेलवाल, सभी छह प्रांतीय उपाध्यक्ष, प्रांतीय महामंत्री रमेश चांडक, कोषाध्यक्ष दिनेश गुप्ता सहित प्रदेश और मंडलीय स्तर के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा युवा मंच के प्रांतीय अध्यक्ष राज चौधरी, महिला सम्मेलन की प्रांतीय अध्यक्ष शालिनी बगड़िया, टॉक शो स्पीकर गोपाल जालान और ललित अजमेरा, मोटिवेशनल स्पीकर अंकुर झुनझुनवाला तथा हास्य कलाकार हरीश हिंदुस्तानी ने भी आयोजन में भाग लेकर इसे और अधिक आकर्षक बना दिया।
असम और राजस्थान की संस्कृति का अनूठा संगम
पूरे विवाह भवन परिसर को “समन्वय” थीम के अनुरूप सजाया गया था। कहीं असम की लोकसंस्कृति की झलक दिखाई दे रही थी तो कहीं राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति की खुशबू महसूस हो रही थी। प्रवेश द्वार को झांपि, पेपा और सराय जैसे असमिया सांस्कृतिक प्रतीकों से सजाया गया था।

विशेष आकर्षण का केंद्र रही महिला सम्मेलन और युवा मंच की मातृशक्ति, जिन्होंने दोनों दिनों में असमिया और राजस्थानी परिधानों में उपस्थित होकर सभी का मन मोह लिया।

स्वागत गीत भी इस आयोजन की विशेष पहचान बना। महिला सम्मेलन की मातृशक्ति द्वारा बिना किसी वाद्य यंत्र के असमिया और हिंदी मिश्रित स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया, जिसकी सभी ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
असम के महान सपूतों को दी गई श्रद्धांजलि
उद्घाटन सत्र के बाद राष्ट्रीय और प्रांतीय नेतृत्व द्वारा श्रद्धांजलि मंडप में असम के महान विभूतियों — स्वर्गीय ज्योतिप्रसाद अग्रवाल, डॉ. भूपेन हजारिका और जुबिन गर्ग — के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

यह क्षण आयोजन में मौजूद सभी लोगों के लिए भावुक और गौरवपूर्ण रहा। इससे स्पष्ट संदेश दिया गया कि मारवाड़ी समाज असम की संस्कृति, साहित्य और परंपरा के प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान रखता है।
“समन्वय” पर हुआ व्यापक मंथन
16 मई की संध्या आयोजित टॉक शो अधिवेशन का बौद्धिक केंद्र बनकर उभरा। बिमल अग्रवाल के संचालन में आयोजित इस सत्र में गोपाल जालान और ललित अजमेरा ने वक्ता के रूप में भाग लिया, जबकि पैनलिस्ट के रूप में कैलाश काबरा, राज चौधरी और शालिनी बगड़िया उपस्थित रहे।

“इतर समाज के साथ समन्वय कैसे स्थापित किया जाए” विषय पर आयोजित इस चर्चा में सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक साझेदारी और भविष्य की संगठनात्मक दिशा पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कई महत्वपूर्ण सुझाव और प्रस्ताव भी तैयार किए गए जिन्हें आगे संगठनात्मक स्तर पर लागू करने की बात कही गई।
सम्मान समारोह बना आयोजन का भावनात्मक केंद्र
म्यूजिकल सम्मान समारोह इस अधिवेशन का सबसे भावुक और आकर्षक चरण साबित हुआ। सबसे पहले मोरान के प्रतिष्ठित शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ. अनिल सैकिया का नागरिक अभिनंदन किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो, शॉल, साफा और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया।

डॉ. सैकिया को शिक्षा, साहित्य, कविता, नाटक और सामाजिक क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इसके बाद सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गोयनका का भव्य म्यूजिकल अभिनंदन हुआ। मंच पर संगीत के बीच उन्हें साफा पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में सम्मेलन के दिवंगत प्रांतीय नेतृत्व को LED स्क्रीन पर उनके कार्यकाल की झलक दिखाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही वर्तमान और पूर्व प्रांतीय तथा शाखा स्तरीय नेतृत्व का भी नागरिक अभिनंदन किया गया।

मोरानहाट शाखा के वर्तमान अध्यक्ष बिनोद अग्रवाल का सम्मान समारोह विशेष रूप से भावुक रहा। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने साष्टांग प्रणाम कर पूरे समाज के प्रति आभार व्यक्त किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बांधा समां
सांस्कृतिक संध्या में असमिया और मारवाड़ी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। ध्रुव और अरविंद गाड़ोदिया द्वारा डिज़ाइन किया गया “शार्क टैंक” कॉमेडी प्रेजेंटेशन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

इसके अलावा असमिया और मारवाड़ी लोकनृत्य, पुराने और नए गीतों की पैरोडी, भारत की “अनेकता में एकता” को दर्शाते विभिन्न राज्यों की वेशभूषा पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम समाप्त होने तक परिसर खचाखच भरा रहा, जो आयोजन की लोकप्रियता और गुणवत्ता का प्रमाण था।
नामघर दर्शन और सेवा ने बढ़ाया समन्वय का संदेश
दूसरे दिन 17 मई को प्रतिकूल मौसम के बावजूद प्रतिनिधियों का एक बड़ा दल मोरान के निकट थॉमसन तिनाली नामघर पहुंचा। वहां दर्शन करने के साथ-साथ प्रतिनिधिमंडल ने सराय भेंट कर सेवा भी दी और नामघर के विकास के लिए आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया।

यह पहल “समन्वय 2026” की मूल भावना को साकार करती नजर आई।
संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान
प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा ने मोरानहाट शाखा के आयोजन को “बेमिसाल” बताते हुए कहा कि इस आयोजन ने भविष्य के अधिवेशनों के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है। उन्होंने पूर्वोत्तर में 125 शाखाओं और 10,000 सदस्यों के लक्ष्य को प्राप्त करने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय संगठन मंत्री बसंत सुराणा ने संस्कारशाला अभियान को मजबूत करने और विवाह समारोहों में फिजूलखर्ची कम करने पर बल दिया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गोयनका ने अपने संबोधन में कहा कि मोरानहाट शाखा द्वारा दिया गया नागरिक अभिनंदन उनके जीवन की सबसे बड़ी धरोहर बन गया है। उन्होंने समाज सुधार, संस्कार, मायड़ भाषा के संरक्षण, दिन में विवाह, प्री-वेडिंग शूट के बहिष्कार और शादी समारोहों में शराब से दूरी जैसे विषयों पर समाज को जागरूक किया।

उन्होंने सम्मेलन सदस्यों के लिए विशेष मेडिकल डिस्काउंट कार्ड योजना की जानकारी भी साझा की, जिसके माध्यम से देशभर के कई अस्पतालों में विशेष छूट प्राप्त की जा सकेगी।
डॉ. लुहित बोरा ने कहा — “आप असमिया मारवाड़ी हैं”
दूसरे दिन आयोजित मोटिवेशनल शो से पूर्व साहित्यकार डॉ. लुहित बोरा का नागरिक अभिनंदन किया गया। उन्हें साफा, शॉल, दुपट्टा, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन में डॉ. बोरा ने कहा कि असम के विकास में मारवाड़ी समाज का योगदान अभूतपूर्व रहा है। उन्होंने कहा, “मारवाड़ी समाज असम में समन्वय की भावना को सदियों से मजबूत करता आया है। आप लोग केवल मारवाड़ी नहीं, बल्कि असमिया मारवाड़ी हैं।”
मोटिवेशन और हास्य का शानदार समापन
शिलांग से आए मोटिवेशनल स्पीकर अंकुर झुनझुनवाला ने “BG से BETTER” विषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति देकर युवाओं को प्रेरित किया।

इसके बाद राजस्थान से आए हास्य कवि हरीश हिंदुस्तानी ने अपने नॉन-स्टॉप हास्य कार्यक्रम से पूरे सभागार को हंसी से सराबोर कर दिया।
भावुक माहौल में हुआ “समन्वय 2026” का समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी प्रतिनिधि, महिला सम्मेलन, युवा मंच और आयोजक शाखा के सदस्य संगीत की धुन पर झूमते हुए भावुक माहौल में “समन्वय 2026” को विदाई देते नजर आए।

आयोजक शाखा ने सभी प्रतिनिधियों, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार प्रेम, स्नेह और सहयोग बनाए रखने की अपील की।

कुल मिलाकर “समन्वय 2026” केवल एक अधिवेशन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और संगठनात्मक शक्ति का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया, जिसने पूर्वोत्तर भारत में समाज और संस्कृति के समन्वय को नई दिशा देने का कार्य किया।





