जोरहाट में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन : स्मार्ट मीटर, जलनिकासी संकट, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सरकार पर बड़ा हमला : विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा, संगठन मजबूत करने पर कांग्रेस का जोर

जितेन्द्र सोमानी
जोरहाट, 23 मई : ऊपरी असम के राजनीतिक माहौल के बीच शुक्रवार को जोरहाट जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कांग्रेस की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक राजनीतिक रूप से काफी चर्चित रही। लोकसभा सांसद एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई की मौजूदगी में हुई इस बैठक में संगठन को मजबूत बनाने, आगामी राजनीतिक रणनीति तैयार करने और राज्य व केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में कांग्रेस नेताओं ने स्मार्ट मीटर, नगर पालिका की बदहाल व्यवस्था, शहर की जर्जर जलनिकासी प्रणाली, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय हालात जैसे कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। जिला और प्रखंड स्तर के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और पार्टी समर्थक बड़ी संख्या में बैठक में शामिल हुए।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार की समीक्षा को माना जा रहा है। पार्टी नेताओं ने चुनावी परिणामों के बाद संगठनात्मक कमियों, बूथ स्तर की कमजोरियों, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी तथा जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंच नहीं बना पाने जैसे मुद्दों पर गंभीर मंथन किया।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कई क्षेत्रों में कांग्रेस अपेक्षित जनसमर्थन को वोट में परिवर्तित नहीं कर सकी। नेताओं ने माना कि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। बूथ प्रबंधन, युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान को तेज करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
राजनीतिक रूप से यह भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तथा जोरहाट लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा सांसद गौरव गोगोई स्वयं भी जोरहाट सदर विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। बैठक में इस हार के राजनीतिक कारणों, स्थानीय समीकरणों, संगठनात्मक चुनौतियों और चुनावी रणनीति की भी समीक्षा की गई। पार्टी नेताओं ने माना कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए संगठन को और अधिक सक्रिय तथा संगठित बनाना होगा।
बैठक को संबोधित करते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही है और भविष्य में भी लोगों की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि जोरहाट सहित पूरे असम में आम जनता विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी हुई है।

उन्होंने कहा कि बैठक में विशेष रूप से जोरहाट नगर क्षेत्र की समस्याओं की समीक्षा की गई। शहर में जलनिकासी की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जिसके कारण हल्की बारिश में भी कई इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। वर्षा जल निकासी व्यवस्था लगभग निष्क्रिय हो चुकी है और नगर पालिका के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं होने के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर पालिका कर संग्रह को लेकर आम लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है, जबकि मूलभूत नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में प्रशासन विफल साबित हो रहा है। नेताओं ने कहा कि शहर के कई हिस्सों में सड़क, नाली, सफाई और पेयजल जैसी सुविधाओं की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गांवों और कस्बों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में असामान्य बढ़ोतरी हो रही है। कई उपभोक्ताओं को तकनीकी समस्याओं और गलत बिल निर्धारण का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस आम लोगों की परेशानियों को गंभीरता से सुन रही है और इस मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा।

बैठक के दौरान भाजपा के अंदरूनी मतभेदों को लेकर भी कांग्रेस नेताओं ने तीखा हमला बोला। नेताओं ने दावा किया कि तिताबर, तियोक और जोरहाट क्षेत्रों में भाजपा नेताओं के बीच लंबे समय से असंतोष और गुटबाजी चल रही है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से नाराज हैं, जिसकी चर्चा अब सार्वजनिक रूप से होने लगी है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हाल के दिनों में भाजपा विधायकों और स्थानीय नेताओं के बीच मतभेद इतने बढ़ गए कि प्रदेश नेतृत्व को भी इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि भाजपा संगठन के भीतर बढ़ती असहमति का असर आने वाले समय में राजनीतिक रूप से दिखाई देगा।
बैठक में विपक्ष की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस लगातार समीक्षा बैठकों के माध्यम से संगठनात्मक स्थिति का आकलन कर रही है। मतदान केंद्र स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है ताकि जनता के मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी और लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना होगा। पार्टी ने आने वाले दिनों में जनसंपर्क अभियान, विरोध प्रदर्शन और विभिन्न जनहित आंदोलनों को तेज करने के संकेत भी दिए।
बैठक में देश की आर्थिक स्थिति और महंगाई का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि आम आदमी पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। रसोई गैस, खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अंतरराष्ट्रीय हालात का जिक्र करते हुए नेताओं ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पार्टी नेता राहुल गांधी पहले ही केंद्र सरकार को संभावित आर्थिक प्रभावों को लेकर आगाह कर चुके थे, लेकिन सरकार ने समय रहते आवश्यक तैयारी नहीं की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में केंद्र सरकार की रणनीति कमजोर दिखाई दे रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि हालात इसी तरह बने रहे तो आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।
बैठक में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने वाले लोगों और विपक्षी आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। सामाजिक माध्यम खातों को बंद किए जाने, विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई और विभिन्न मामलों में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाए जाने के आरोप भी लगाए गए।
नेताओं ने कहा कि युवाओं के भीतर बेरोजगारी और बढ़ती आर्थिक असुरक्षा को लेकर भारी असंतोष है। सामाजिक माध्यम मंचों पर लगातार सरकार विरोधी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और नए सामाजिक व राजनीतिक मंच उभर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि आने वाले समय में युवाओं की यह नाराजगी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में पार्टी कार्यकर्ताओं ने चर्चित “चिपरांग मारा” मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। नेताओं ने कहा कि पार्टी इस मामले पर नजर बनाए हुए है और जनता की भावनाओं के अनुरूप उचित राजनीतिक रुख अपनाया जाएगा। हालांकि इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी करने से नेताओं ने परहेज किया।
बैठक के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी व्यापक समीक्षा प्रक्रिया के तहत लगातार कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम जनता से राय ले रही है। इसी जनमत के आधार पर आगामी राजनीतिक रणनीति तैयार की जाएगी। नेताओं ने दावा किया कि कांग्रेस आने वाले समय में जनता के मुद्दों को लेकर और अधिक आक्रामक भूमिका निभाएगी तथा राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को जवाबदेह बनाने का प्रयास करेगी।




