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3.5 लाख करोड़ की परीक्षा अर्थव्यवस्था और करोड़ों युवाओं का संघर्ष : कोटा में राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल : कोटा की ‘छात्रों की गूंज’ महारैली में पेपर लीक, बेरोजगारी, कोचिंग संस्कृति और प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव पर केंद्र सरकार को घेरा

भारत का एजुकेशन सिस्टम चयन नहीं, अस्वीकृति का सिस्टम बन गया है — राहुल गांधी

न्यूज डेस्क, 17 जून : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) महारैली में देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, कोचिंग संस्कृति, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि भारत की पांच प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं— NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB — की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर वर्ष लगभग ₹3.5 लाख करोड़ खर्च करते हैं, जो कई प्रमुख मंत्रालयों के संयुक्त बजट के बराबर है।

राहुल गांधी ने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों पर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का आर्थिक एवं मानसिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि सफलता की संभावना बेहद सीमित है।

कोटा से शुरू हुआ छात्रों को लेकर राष्ट्रीय अभियान

कांग्रेस ने हाल के पेपर लीक विवादों, परीक्षा अनियमितताओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर देशव्यापी छात्र संवाद अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। इसी अभियान की शुरुआत राजस्थान के कोटा से की गई, जिसे देश की “कोचिंग राजधानी” माना जाता है।

राहुल गांधी ने हजारों छात्रों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि यह केवल राजनीतिक सभा नहीं है, बल्कि उन युवाओं की आवाज़ सुनने का प्रयास है जो अपने भविष्य को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

“भारत का एजुकेशन सिस्टम एक एक्सटॉर्शन मशीन बन गया है”

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था छात्रों को अवसर देने के बजाय उन्हें लगातार अस्वीकृति का सामना करवाती है।

उन्होंने कहा कि भारत का एजुकेशन सिस्टम एक चयन प्रणाली नहीं, बल्कि रिजेक्शन सिस्टम बन गया है। यह बच्चों पर दबाव डालता है, उन्हें तनाव देता है और कई बार उनकी उम्मीदों को कुचल देता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों से भारी आर्थिक कीमत वसूलती है, लेकिन बदले में उन्हें सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं देती।

3.5 लाख करोड़ खर्च का दावा

कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि देश की पांच सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं — SSC, UPSC, RRB, JEE और NEET — आज युवाओं के सपनों का पर्याय बना दी गई हैं।

उन्होंने कहा कि इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्र और उनके परिवार हर साल लगभग ₹3.5 लाख करोड़ खर्च करते हैं। उनके अनुसार यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा महिला एवं बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के संयुक्त बजट के बराबर है।

राहुल गांधी ने कहा कि यह खर्च कोचिंग फीस, स्कूलिंग, हॉस्टल, परिवहन, अध्ययन सामग्री और अन्य शैक्षणिक खर्चों पर होता है।

केवल NEET पर परिवार खर्च करते हैं 1.32 लाख करोड़

राहुल गांधी ने दावा किया कि अकेले NEET परीक्षा में लगभग 22 लाख छात्र शामिल होते हैं और उनकी तैयारी पर परिवार सामूहिक रूप से लगभग ₹1.32 लाख करोड़ खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के बजट के लगभग बराबर है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी संख्या में छात्र और परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा प्रतियोगी परीक्षाओं पर खर्च कर रहे हैं, तब भी अधिकांश युवाओं को सफलता नहीं मिल पाती।

22 लाख में एक लाख से भी कम का चयन

राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा इतनी तीव्र हो चुकी है कि लाखों छात्र वर्षों तक तैयारी करने के बावजूद सफलता से वंचित रह जाते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि NEET में लगभग 22 लाख छात्र परीक्षा देते हैं, जबकि चयनित होने वालों की संख्या एक लाख से भी कम रहती है। ऐसे में लाखों छात्रों और परिवारों को भारी आर्थिक एवं मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है।

इंजीनियर, डॉक्टर और आईएएस तक सीमित सपनों पर सवाल

कोटा में छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने युवाओं से पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे सोचने की अपील की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था बच्चों को मुख्य रूप से इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस अधिकारी या कुछ सीमित पेशों की ओर धकेलती है, जबकि देश में अनेक अन्य क्षेत्रों में भी प्रतिभा और अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं के सपनों को सीमित करना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर देना होना चाहिए।

पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर सरकार को घेरा

राहुल गांधी ने हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक मामलों और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा विवादों ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है और उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

उन्होंने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली की खामियों के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पाता।

बेरोजगारी का मुद्दा भी उठाया

राहुल गांधी ने रोजगार के मुद्दे को भी शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि बड़ी संख्या में डिग्रीधारी युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि देश में बड़ी संख्या में इंजीनियर और प्रशिक्षित युवा रोजगार से वंचित हैं। उनका कहना था कि शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करवाना नहीं, बल्कि युवाओं को सम्मानजनक रोजगार और अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए।

कोटा क्यों बना राष्ट्रीय बहस का केंद्र ?

राजस्थान का कोटा शहर पिछले तीन दशकों में देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब बनकर उभरा है। हर वर्ष लाखों छात्र यहां JEE, NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। कोटा की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कोचिंग उद्योग पर आधारित है।

हाल के वर्षों में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव, तनाव, प्रतिस्पर्धा और आत्महत्या की घटनाओं ने भी कोटा मॉडल को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। इसी पृष्ठभूमि में राहुल गांधी ने कोटा को अपने छात्र संवाद अभियान की शुरुआत के लिए चुना।

यह राजनीतिक नहीं, युवाओं के भविष्य की लड़ाई 

अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के युवाओं की समस्याओं को समझने और उनके भविष्य को लेकर चर्चा करने का मंच है।

उन्होंने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर दे, न कि केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की संकीर्ण दौड़ तक सीमित रखे।

शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग

राहुल गांधी ने अंत में कहा कि देश को ऐसी शिक्षा नीति की आवश्यकता है जो छात्रों को केवल परीक्षा मशीन न बनाए, बल्कि उनकी प्रतिभा, रचनात्मकता और व्यक्तिगत क्षमताओं को विकसित करे। उन्होंने शिक्षा, रोजगार और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं की आवाज़ को नीति निर्माण के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

कोटा की ‘छात्रों की गूंज’ महारैली के माध्यम से राहुल गांधी ने शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने का प्रयास किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक और नीतिगत स्तर पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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