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सदिया में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की दस्तक से हड़कंप : तिनसुकिया प्रशासन ने लागू किए सख्त प्रतिबंध, संक्रमित क्षेत्र में तीन दिन चलेगा कूलिंग ऑपरेशन

न्यूज डेस्क, 27 मई : असम के तिनसुकिया जिले के सदिया उप-जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के मामलों की पुष्टि होने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने रोग के तेजी से फैलाव को रोकने के लिए तत्काल सख्त कदम उठाते हुए कई प्रतिबंध लागू कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, सदिया उप-जिले के काकोपथार क्षेत्र अंतर्गत उत्तर रंगपुरिया गांव में सूअरों के नमूनों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई। इसके बाद जिला प्रशासन और पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग ने आपात नियंत्रण योजना लागू कर दी।

प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र को “एपिसेंटर” मानते हुए गांव और उसके आसपास 1 किलोमीटर के दायरे को “संक्रमित क्षेत्र” घोषित किया है, जबकि 10 किलोमीटर तक के इलाके को “सर्विलांसजोन” घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में पशुओं की आवाजाही, बिक्री और परिवहन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan for Preparedness, Control and Containment of African Swine Fever) के तहत 27, 28 और 29 मई को संक्रमित क्षेत्र में सूअरों की कूलिंग (मारने की प्रक्रिया) चलाई जाएगी। यह अभियान पशु चिकित्सा अधिकारियों की निगरानी में जैव-सुरक्षा मानकों के अनुसार किया जाएगा ताकि संक्रमण को अन्य इलाकों में फैलने से रोका जा सके।

जिला प्रशासन ने सदिया उप-जिले की सभी पोर्क दुकानों को अगले आदेश तक बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही सदिया से अन्य जिलों तथा पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश की ओर सूअर, पोर्क अथवा उससे बने उत्पादों के परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। बाजारों और दुकानों में पोर्क की बिक्री भी तत्काल प्रभाव से निषिद्ध कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, निगरानी क्षेत्र में पशुपालन विभाग की विशेष टीमें लगातार निरीक्षण करेंगी। गांवों और फार्मों में जाकर बीमार सूअरों की पहचान, सैंपल जांच और सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से मृत अथवा बीमार सूअरों को छिपाने के बजाय तुरंत विभाग को सूचित करने की अपील की है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो घरेलू और जंगली सूअरों को प्रभावित करती है। इस बीमारी में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। हालांकि यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती, लेकिन सूअर पालन उद्योग और पशुपालकों की अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।

असम में इससे पहले भी कई जिलों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2020 में पहली बार राज्य में इस बीमारी की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद हजारों सूअरों की मौत हुई और बड़ी संख्या में पशुपालक प्रभावित हुए थे। बाद के वर्षों में तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और ऊपरी असम के कई क्षेत्रों में संक्रमण फैलने के कारण बड़े पैमाने पर कूलिंग अभियान चलाए गए थे।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विशेष रूप से संक्रमित और निगरानी क्षेत्रों से सूअरों, पोर्क, पशु आहार तथा संबंधित उत्पादों के परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की है। सहायता अथवा सूचना के लिए पशुपालन विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1962 तथा जिला नियंत्रण कक्ष के नंबर 0374-2331000 पर संपर्क करने को कहा गया है।

पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते संक्रमण नियंत्रण नहीं किया गया तो यह बीमारी पूरे क्षेत्र के सूअर पालन व्यवसाय को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में प्रशासन, पशुपालन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय बेहद जरूरी माना जा रहा है।

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