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थार के रेगिस्तान में मिला प्राकृतिक गैस का नया खजाना : जैसलमेर के डांडेवाला फील्ड में ऑयल इंडिया लिमिटेड को बड़ी सफलता, नए गैस भंडार ने बढ़ाई भारत की ऊर्जा ताकत

लगभग 75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MMSCM) गैस मौजूद होने का अनुमान : डांडेवाला फील्ड की यह खोज केवल एक क्षेत्रीय उपलब्धि नहीं बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा

न्यूज डेस्क, 23 मई : राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्र जैसलमेर से देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने डांडेवाला गैस फील्ड में प्राकृतिक गैस का नया भंडार खोजने में सफलता हासिल की है। यह खोज केवल एक सामान्य गैस उत्पादन उपलब्धि नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, घरेलू गैस उत्पादन और पश्चिमी राजस्थान को नए ऊर्जा हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कंपनी के अनुसार डांडेवाला फील्ड के सानू फॉर्मेशन में पहली बार सफल गैस उपस्थिति स्थापित हुई है। लगभग 950 मीटर की गहराई से औसतन 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (SCMD) प्राकृतिक गैस का प्रवाह रिकॉर्ड किया गया है।

पहली बार सानू फॉर्मेशन में मिला गैस प्रवाह

विशेषज्ञों के अनुसार डांडेवाला क्षेत्र में पहले भी गैस उत्पादन गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन सानू फॉर्मेशन में पहली बार गैस की सफल मौजूदगी दर्ज की गई है। यही कारण है कि इस खोज को तकनीकी रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऑयल इंडिया ने बताया कि यह सफलता “मिस्ड ऑपर्च्युनिटी अप्रोच” और उन्नत भू-वैज्ञानिक विश्लेषण का परिणाम है। कंपनी ने पुराने भूगर्भीय डेटा, पेट्रोफिजिकल मूल्यांकन, संरचनात्मक अध्ययन और सब-सर्फेस एनालिसिस के आधार पर नए गैस ज़ोन की पहचान की।

75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का अनुमान

कंपनी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में लगभग 75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MMSCM) गैस मौजूद होने का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगे के विस्तृत परीक्षण और विकास कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिले तो यह उत्पादन आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है। देश अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत और गैस जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर नए गैस भंडारों की खोज रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे घरेलू गैस उत्पादन बढ़ेगा, एलएनजी आयात पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, उद्योगों को गैस आपूर्ति मजबूत होगी, बिजली उत्पादन और उर्वरक क्षेत्र को फायदा मिलेगा और स्वच्छ ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

राजस्थान बन रहा देश का नया ऊर्जा केंद्र

पिछले दो दशकों में राजस्थान का पश्चिमी इलाका भारत के ऊर्जा मानचित्र पर तेजी से उभरा है। विशेषकर जैसलमेर और बाड़मेर बेसिन देश के महत्वपूर्ण तेल एवं गैस क्षेत्रों में शामिल हो चुके हैं।

जानकारों के अनुसार राजस्थान का बाड़मेर बेसिन देश के सबसे बड़े ऑनशोर तेल क्षेत्रों में शामिल है। Cairn-Vedanta के मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या फील्ड भारत के कुल घरेलू तेल उत्पादन में बड़ा योगदान देते हैं।

राजस्थान ब्लॉक से देश के कुल घरेलू तेल उत्पादन का लगभग 23 प्रतिशत तक उत्पादन हुआ है। जैसलमेर बेसिन मुख्यतः प्राकृतिक गैस क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है।

डांडेवाला फील्ड का इतिहास भी महत्वपूर्ण

डांडेवाला गैस फील्ड कोई नया क्षेत्र नहीं है। ऑयल इंडिया ने यहां 1980 और 1990 के दशक में अन्वेषण कार्य शुरू किया था।

कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार जैसलमेर बेसिन में पहली बड़ी खोज 1988 में तनोट-1 कुएं से हुई थी। इसके बाद डांडेवाला और बागीटिब्बा क्षेत्रों में गैस खोजी गई। डांडेवाला फील्ड में 1996 से व्यावसायिक गैस उत्पादन शुरू हुआ था। क्षेत्र से उत्पादित गैस GAIL को आपूर्ति की जाती है। गैस का उपयोग राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) सहित विभिन्न क्षेत्रों में होता है।

डांडेवाला गैस प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स की भूमिका

डांडेवाला गैस प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स पश्चिमी राजस्थान की ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऑयल इंडिया के अनुसार डांडेवाला और बागीटिब्बा फील्ड की गैस यहां प्रोसेस की जाती है। गैस से पानी और भारी हाइड्रोकार्बन अलग किए जाते हैं। इसके बाद गैस गेल इंडिया लिमिटेड को भेजी जाती है। यहां से गैस राज्य के विभिन्न औद्योगिक और बिजली क्षेत्रों तक पहुंचती है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दी बधाई

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस उपलब्धि पर ऑयल इंडिया की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह खोज भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन को मजबूत करेगी।

आधुनिक तकनीक से मिली सफलता

ऑयल इंडिया ने बताया कि यह खोज उन्नत तकनीकों की मदद से संभव हुई। कंपनी ने हाई-रिजॉल्यूशन सब-सर्फेस मैपिंग, संरचनात्मक मॉडलिंग, पेट्रोफिजिकल विश्लेषण, फॉर्मेशन टेस्टिंग, डिजिटल डेटा इंटरप्रिटेशन जैसी तकनीकों का उपयोग किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजस्थान में नए गैस भंडारों की खोज की संभावनाएं और बढ़ गई हैं।

उत्पादन क्षमता और संभावित आर्थिक प्रभाव

ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों के अनुसार यदि आगे उत्पादन बढ़ता है तो जैसलमेर क्षेत्र में नए निवेश आएंगे और गैस आधारित उद्योग विकसित होंगे। जिससे कि रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पाइपलाइन और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। साथ ही राजस्थान की औद्योगिक क्षमता को नई गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक गैस को “ट्रांजिशन फ्यूल” माना जाता है क्योंकि यह कोयले और पारंपरिक ईंधन की तुलना में कम प्रदूषण फैलाती है। ऐसे में घरेलू गैस उत्पादन बढ़ना भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों के लिए भी अहम माना जा रहा है।

राजस्थान में ऑयल इंडिया का विस्तार

ऑयल इंडिया पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में अपनी गतिविधियां तेजी से बढ़ा रही है। कंपनी ने हाल ही में थार रेगिस्तान क्षेत्र में कच्चे तेल उत्पादन में भी लगभग 70 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की थी। कंपनी के अनुसार राजस्थान क्षेत्र में उन्नत ड्रिलिंग तकनीकों और नए अन्वेषण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भारत की ऊर्जा रणनीति को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि डांडेवाला फील्ड की यह खोज केवल एक क्षेत्रीय उपलब्धि नहीं बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत सरकार का लक्ष्य है घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाकर गैस आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करना और प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना। इसके साथ ही आयात बिल कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। ऐसे में राजस्थान से मिली यह नई सफलता आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा नीति को नई मजबूती दे सकती है।

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