विधानसभा में अखिल गोगोई की जरूरत है, विधानसभा में नहीं रहने पर बाहर आंदोलन करते रहते : हिमंत विश्व शर्मा का एक और तीखा व्यंग्यात्मक हमला
अखिल गोगोई “अलग तरह के इंसान” हैं, वे मेरे सामने कुछ कहते हैं और बाहर जाकर कुछ और - मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा

गुवाहाटी / 5 मई : असम विधानसभा चुनाव 2026 में भारी बहुमत से जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने रायजोर दल के प्रमुख और शिवसागर सीट से निर्वाचित विधायक अखिल गोगोई पर तंज कसते हुए कहा कि “विधानसभा में अखिल गोगोई की जरूरत है। अगर वे विधानसभा में नहीं होते तो बाहर आंदोलन करते रहते।”
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यंग्य करते हुए दावा किया कि सदन में अखिल गोगोई “हमारे मत” के अनुसार बोलते हैं और भाजपा नेता पीयूष हजरिका सुबह फोन करके तय करते हैं कि सदन में उन्हें क्या बोलना है।
मंगलवार को दिसपुर स्थित सरकारी आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने अखिल गोगोई की चुनावी जीत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने शिवसागर में प्रचार नहीं किया क्योंकि उन्हें पता था कि अखिल वहां जीत जाएंगे। उन्होंने कहा कि “सदन में हमारे अनुसार बात करते हैं अखिल गोगोई। रोज सुबह पीयूष हजरिका फोन करते हैं और फिर तय होता है कि अखिल गोगोई को विधानसभा में क्या कहना है।”
चुनावी परिणामों के संदर्भ में बयान
असम विधानसभा की 126 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने 82 सीटें जीतीं, जबकि एनडीए को कुल 102 सीटें मिलीं। कांग्रेस मात्र 19 सीटों पर सिमट गई। रायजोर दल के अखिल गोगोई शिवसागर से दूसरी बार विधायक चुने गए। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार कुशल दुवारी को करीब 17 हजार से अधिक वोटों से हराया। यह सीट विपक्ष के लिए एकमात्र बड़ी राहत साबित हुई, जबकि ऊपरी असम सहित ज्यादातर क्षेत्रों में भाजपा का बोलबाला रहा।
मुख्यमंत्री शर्मा ने आगे कहा कि अगर अखिल गोगोई कुछ गलतियां न करते तो शेरमान अली सहित उनकी पार्टी के 4-5 और उम्मीदवार जीत सकते थे। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि अखिल गोगोई “अलग तरह के इंसान” हैं और उनकी बातें हमेशा एक समान नहीं होतीं। वे मेरे सामने कुछ कहते हैं और बाहर जाकर दूसरों के सामने कुछ और कहते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने चुनावी रणनीति, विपक्षी दलों की कमजोरियों और आगामी राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की।

अखिल गोगोई असम के प्रसिद्ध किसान आंदोलनकारी रहे हैं। CAA- NRC विरोधी आंदोलन के दौरान वे जेल गए थे। बाद में उन्होंने रायजोर दल की स्थापना की और 2021 में जेल में बंद रहते हुए ही शिवसागर सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। वे हिमंत सरकार की नीतियों के कड़े आलोचक रहे हैं। हाल के चुनावों में भी उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा था और विपक्षी गठबंधन असम सम्मिलित मोर्चा (कांग्रेस, रायजोर दल, असम जातीय परिषद) को मजबूत करने की कोशिश की। हालांकि, चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया कि असम की जनता ने हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व पर फिर भरोसा जताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हिमंत विश्व शर्मा का यह बयान व्यंग्यात्मक है, लेकिन इसमें अखिल गोगोई को “सदन का जरूरी हिस्सा” बताकर उन्हें राजनीतिक महत्व दिया गया है। एक ओर जहां असम में चुनावी हैट्रिक के साथ बीजेपी सरकार तीसरी बार सत्ता में आई है। वहीं अखिल गोगोई जैसे विपक्षी नेता सदन में सरकार के लिए चुनौती बने रहेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री शर्मा ने यह भी कहा कि अखिल गोगोई के बिना आंदोलन की स्थिति बनी रहती, इसलिए उनकी विधानसभा में मौजूदगी “लाभदायक” है।
असम की राजनीति में मुख्यमंत्री शर्मा का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ भाजपा की भारी जीत का जश्न मनाया जा रहा है, तो दूसरी ओर विपक्षी नेता अखिल गोगोई की जीत को “मजबूत विपक्ष” की नींव बता रहे हैं।
हिमंत विश्व शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी अभियान, उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया और विपक्ष की रणनीति पर भी विस्तार से टिप्पणी की। उन्होंने यह भी कहा कि अखिल गोगोई की कुछ गलतियों के कारण विपक्ष को नुकसान हुआ। मंत्री पीयूष हजरिका का नाम लेते हुए मुख्यमंत्री ने अखिल के सदन में भाषण को “निर्धारित” बताया।
मुख्यमंत्री का यह बयान असम की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है, जहां सत्ता पक्ष मजबूत है लेकिन विपक्षी आवाजें भी बरकरार हैं। अखिल गोगोई जैसे नेता सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह सरकार के लिए सवाल खड़े करते रहेंगे। असम की जनता अब नए मंत्रिमंडल और आने वाले विकास कार्यों की ओर नजरें जमाए हुए है।




