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दिखौ नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन अलर्ट : जिला आयुक्त मृदुल यादव ने किया संवेदनशील एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण : नंगलामरा सहित कई जोखिमग्रस्त इलाकों का दौरा : अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

संभावित बाढ़ एवं कटाव से निपटने के लिए तैयारियों की समीक्षा : लोगों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

शिवसागर, 18 जून : शिवसागर जिले में लगातार हो रही वर्षा और दिखौ नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। संभावित बाढ़, जलभराव एवं कटाव की आशंकाओं के मद्देनजर जिला प्रशासन ने निगरानी और तैयारियों को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में गुरुवार को जिला आयुक्त मृदुल यादव ने जिले के नंगलामरा सहित विभिन्न संवेदनशील एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का स्थल निरीक्षण किया तथा संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

नंगलामरा सहित जोखिमग्रस्त क्षेत्रों का किया दौरा

निरीक्षण के दौरान जिला आयुक्त ने दिखौ नदी के तटवर्ती क्षेत्रों, संभावित रूप से प्रभावित गांवों तथा बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने नदी के वर्तमान जलस्तर, तटों की स्थिति तथा कटाव की संभावनाओं का आकलन करते हुए संबंधित अधिकारियों से क्षेत्रवार जानकारी प्राप्त की।

मृदुल यादव ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों, आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता तथा संवेदनशील क्षेत्रों में की जा रही निगरानी की समीक्षा भी की।

बाढ़ से निपटने की तैयारियों का किया आकलन

जिला आयुक्त ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ चर्चा कर संभावित बाढ़ की स्थिति में अपनाई जाने वाली रणनीतियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी विभाग आपसी समन्वय बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

उन्होंने कहा कि राहत शिविरों, नावों, खाद्य सामग्री, पेयजल, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता प्रदान की जा सके।

जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान जिला आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दिखौ नदी के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि जलस्तर में अचानक वृद्धि होती है तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंचाई जाए, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

उन्होंने स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने तथा लोगों को समय-समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

लोगों से की बातचीत, समस्याओं को सुना

दौरे के दौरान जिला आयुक्त ने स्थानीय निवासियों से भी बातचीत की और उनकी समस्याओं तथा चिंताओं की जानकारी ली। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में प्रशासन हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा।

मृदुल यादव ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और जीवन की रक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों को तैयार रखा गया है।

अतिरिक्त जिला आयुक्त मीनाक्षी पर्मे भी रहीं उपस्थित

निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त जिला आयुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीनाक्षी पर्मे भी उपस्थित थीं। उन्होंने विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया।

उन्होंने विशेष रूप से राहत एवं बचाव कार्यों, संचार व्यवस्था तथा संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया।

प्रशासन ने नागरिकों से की सतर्क रहने की अपील

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही नदी किनारे रहने वाले लोगों से विशेष सतर्कता बरतने तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन को सूचित करने का आग्रह किया गया है।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौसम और जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव उपाय शुरू किए जाएंगे।

संभावित आपदा से पहले सक्रिय हुआ प्रशासन

दिखौ नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा किया गया यह निरीक्षण संभावित बाढ़ और कटाव की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समय रहते किए जा रहे निरीक्षण, तैयारियों की समीक्षा और विभागीय समन्वय से प्रशासन यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि किसी भी आपात स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम रखा जा सके और प्रभावित लोगों तक शीघ्र सहायता पहुंचाई जा सके।

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