DIBRUGARHhttps://nenews24x7.com/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifUncategorizedधर्मराज्य

पुरुषोत्तम मास में भक्ति की अविरल धारा : डिब्रूगढ़ में माँ अंजनी पुत्र की लाड़ल्यां के श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य समापन

नौ दिवसीय धर्मायोजन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ : हवन यज्ञ एवं महाप्रसाद के साथ संपन्न हुआ नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान

डिब्रुगढ़, 25 मई : माँ अंजनी पुत्र की लाड़ल्यां द्वारा पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का रविवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में भव्य समापन हुआ। धार्मिक नगरी जैसे माहौल में परिवर्तित हुए डिब्रूगढ़ शहर में कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और भक्तिमय वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीहरि के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

धार्मिक आयोजन का शुभारंभ गत 17 मई को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ था। यह शोभायात्रा श्री हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर थाना चाराली स्थित बाबा रामदेव मंदिर तक पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, जयकारों और धार्मिक उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया।

बाबा रामदेव मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस धार्मिक अनुष्ठान का संचालन विद्वान आचार्य पंडित महेश शर्मा बिवाल एवं उनके सहयोगी पंडित विजय कुमार झा के सान्निध्य में किया गया। इसके पश्चात चित्रकूट से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य बृज गोपाल जी शास्त्री व्यासपीठ पर विराजमान हुए और उन्होंने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का रसपान कराया।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्म, गोवर्धन लीला, रासलीला, सुदामा चरित्र, भक्त प्रह्लाद एवं ध्रुव चरित्र जैसे प्रसंगों के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचक ने अपने प्रवचनों में मानव जीवन में धर्म, सेवा, भक्ति एवं संस्कारों के महत्व को विस्तार से समझाया। उनके मधुर वचनों और भक्तिमय शैली ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आयोजन समिति की ओर से कथा को और अधिक जीवंत एवं आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न धार्मिक झांकियों की भी प्रस्तुति दी गई। इन झांकियों ने श्रद्धालुओं को वृंदावन एवं द्वापर युग की दिव्य अनुभूति कराई। कथा प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से सायं 6 बजे तक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एवं युवा श्रद्धालु नियमित रूप से उपस्थित रहे।

विशेष बात यह रही कि कथा के प्रत्येक दिन संस्था परिवार के अलग-अलग नौ यजमानों ने सहभागिता निभाई और धार्मिक अनुष्ठान में अपनी आस्था व्यक्त की। आयोजन को सफल बनाने में संस्था की सभी सदस्याओं ने तन-मन-धन से सहयोग प्रदान किया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को विशेष पहचान दी।

24 मई को कथा पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में वैदिक हवन यज्ञ एवं पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व शांति, परिवार की सुख-समृद्धि एवं मानव कल्याण की कामना की। वहीं रविवार 25 मई को विशाल महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

संस्था की सदस्याओं ने बताया कि पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस माह में किए गए जप, तप, दान, कथा एवं धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। इसी उद्देश्य से संस्था द्वारा इस विशाल धार्मिक आयोजन का आयोजन किया गया, ताकि समाज में आध्यात्मिक चेतना एवं धार्मिक संस्कारों का प्रसार हो सके।

धार्मिक वातावरण, भक्तिमय संगीत, वैदिक मंत्रोच्चार एवं श्रद्धालुओं की अपार आस्था के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने डिब्रूगढ़ के धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिवेश को नई ऊर्जा प्रदान की। श्रद्धालुओं ने आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे आध्यात्मिक अनुभूति से परिपूर्ण बताया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!