राजस्थान के ‘मारवाड़ी योद्धाओं’ और रणनीतिकारों ने बंगाल में रचा इतिहास : राजेंद्र राठौड़ का ‘मास्टरस्ट्रोक’ और भवानीपुर में दीदी की हार : बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर पहली बार बनाई सरकार
बंगाल चुनाव में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का राजनैतिक अनुभव काम आया : उत्तर बंगाल की 28 में से 26 सीटों पर कमल खिला

कोलकाता 7 मई : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया। भाजपा ने 294 सदस्यीय सदन में 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल कर लिया। जबकि दीदी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। ममता बनर्जी 15 साल पुरानी सरकार का अंत हो गया। सबसे बड़ा झटका खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगा, जो अपने गढ़ भवानीपुर सीट से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों के अंतर से हार गईं।
राजेंद्र राठौड़ का ‘मास्टरस्ट्रोक’ और भवानीपुर में दीदी की हार
भवानीपुर की हार टीएमसी के लिए सबसे बड़ा झटका थी। इस सीट पर भाजपा की जीत की स्क्रिप्ट राजस्थान में लिखी गई थी। राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने दो महीने तक भवानीपुर में डेरा डाला। उन्होंने ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ की रणनीति अपनाई। राजस्थान के 8 विधायकों-नेताओं की टीम को भवानीपुर भेजा गया था। स्थानीय मारवाड़ी समुदाय और पन्ना प्रमुखों को सक्रिय किया गया।

स्वयं सुवेंदु अधिकारी ने अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद राजेंद्र राठौड़ को सार्वजनिक रूप से ‘थैंक्यू’ कहकर प्रणाम किया और उन्हें अपनी जीत का ‘असली हीरो’ बताया। राजेंद्र राठौड़ राजस्थान के पूर्व संसदीय कार्य व स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं। अब तक सात बार विधायक निर्वाचित हुए राजेंद्र राठौड़ ने अपने लंबे सियासी करियर में चूरू और तारानगर विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व किया है। उनका पैतृक गांव राजस्थान के चूरू जिले की सरदारशहर तहसील का हरपालसर गांव है। पूर्व में वसुंधरा राजे सरकार में कैबिनेट मंत्री और 15वीं राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं। उन्हें बीजेपी के कुशल रणनीतिकार और जनता के बीच ‘बाहुबली’ नेता के रूप में जाना जाता है। प्रखर वक्ता राठौड़ छात्र राजनीति से सक्रिय रहे और अब राजस्थान की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं।

बंगाल चुनाव में गजेंद्र सिंह शेखावत का राजनैतिक अनुभव काम आया : उत्तर बंगाल की 28 में से 26 सीटों पर कमल खिला
उत्तर बंगाल के कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी आदि जिलों की 28 सीटों की जिम्मेदारी राजस्थान के जोधपुर से भाजपा सांसद और वर्तमान में भारत सरकार में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को सौंपी गई थी। शेखावत ने दो महीने तक बूथ-स्तरीय रणनीति, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया। नतीजा…? भाजपा ने उत्तर बंगाल की 28 में से 26 सीटें जीत लीं। केवल सीताई और चोपड़ा दो ही सीटों पर भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। शेखावत का 93% स्ट्राइक रेट रहा।

बंगाल में भाजपा को प्रचंड बहुमत के साथ मिली ऐतिहासिक जीत पर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। पश्चिम बंगाल के जनादेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता की प्राथमिकता विकास, सुशासन और सुरक्षा है। बंगाल का परिवर्तन उतना ही महत्व रखता है, जितना कि कश्मीर से धारा 370 का हटना। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य के एक ओर बंगाल की खाड़ी की लंबी तटीय सीमा है तो दूसरी ओर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं। ऐसे में पश्चिम बंगाल की सुरक्षा पूरे देश के लिए अहम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता, बेहतर प्रशासन और मजबूत नीतियां समय की मांग है। बंगाल की जनता ने जिस विश्वास के साथ अपना निर्णय दिया है, वह एक सकारात्मक बदलाव पर यकीन को दर्शाता है।
बंगाल में विधायक चुने गए राजस्थान के 5 प्रवासी मारवाड़ी
इस चुनाव में राजस्थान मूल के 5 मारवाड़ी नेताओं ने भाजपा के टिकट पर शानदार जीत दर्ज की। प्रवासी मारवाड़ी परिवार पुश्तों से बंगाल में बसे हैं। सैंकड़ों साल पहले इनके पूर्वज नौकरी और व्यापार के सिलसिले में बंगाल आए और यहां की सभ्यता, संस्कार, भाषा, संस्कृति को अपनाकर यहीं रच बस गए। लेकिन अब प्रवासी मारवाड़ी समुदाय के लोग यहां की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका अदा कर रहे हैं।
95-बनगांव उत्तर सीट से अशोक कीर्तनिया
भाजपा उम्मीदवार अशोक कीर्तनिया ने 95-बनगांव उत्तर सीट से टीएमसी प्रत्याशी विश्वजीत दास को 40,670 वोटों के भारी अंतर से चुनाव मैदान में पछाड़ते हुए शानदार जीत हासिल की है।
282-कुल्टी सीट से अजय कुमार पोद्दार
भाजपा उम्मीदवार अजय कुमार पोद्दार 282-कुल्टी सीट से 26,498 वोटों के अंतर से विजयी हुए हैं। उन्होंने टीएमसी प्रत्याशी अभिजीत घटक को हराया।
106-जगतदल सीट से डॉ. राजेश कुमार
भाजपा उम्मीदवार डॉ. राजेश कुमार ने 106-जगतदल सीट से 20,909 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है।
71-बेलडांगा सीट से भरत कुमार झंवर
भरत कुमार झंवर ने 71-बेलडांगा सीट से 13,208 वोटों के अंतर से जीते हैं।
165-जोरासांको सीट से विजय ओझा
165-जोरासांको सीट से भाजपा उम्मीदवार विजय ओझा ने कांटे के मुकाबले में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी टीएमसी प्रत्याशी विजय उपाध्याय को 5797 वोटों से पराजित किया।
इन पांचों प्रवासी मारवाड़ी नेताओं ने बंगाल की मिट्टी पर ‘कमल’ खिलाया और इतिहास रच दिया।
सुवेंद्र अधिकारी का प्रणाम : राजस्थानी नेताओं को सलाम
सुवेंद्र अधिकारी ने जीत के बाद राजस्थान के नेताओं को खास तौर पर प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि राजेंद्र राठौड़ और गजेंद्र सिंह शेखावत की रणनीति ने टीएमसी का किला ढहाया। भाजपा की इस ‘सुनामी’ ने टीएमसी को पूरी तरह हिलाकर रख दिया।

बीजेपी 207 सीटों के बड़े बहुमत के साथ पश्चिम बंगाल में पहली बार अकेले अपने दम पर सरकार बनने जा रही है। उल्लेखनीय है कि 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 148 है। ममता बनर्जी ने हार के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। लेकिन बंगाल की जनता ने राज्य में सत्ता परिवर्तन के लिए भाजपा को स्पष्ट जनादेश दिया है।
कुल मिलाकर राजस्थान मॉडल ने बंगाल में काम कर दिखाया। जो कि अब चर्चा का विषय बन गया है। मारवाड़ियों की मेहनत, राजस्थानी नेताओं की रणनीति और भाजपा के पन्ना प्रमुखों और निष्ठावान जमीनी कार्यकर्ताओं की बूथ स्तरीय मेहनत ने 2026 के चुनाव को यादगार बना दिया। बंगाल अब ‘परिवर्तन’ की नई सुबह देख रहा है।




