दक्षिण असम में आरएसएस संघ शिक्षा वर्ग 2026 का भव्य समापन : श्रीगौरी माधवधाम में 81 स्वयंसेवकों ने सीखा अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सद्भाव
समापन समारोह में एनआईटी सिलचर के निदेशक प्रोफेसर डॉ. दिलीप वैद्य और आरएसएस असम क्षेत्र संघचालक डॉ. उमेश चक्रवर्ती की गरिमामय उपस्थित रही

बदरपुर 7 मई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दक्षिण असम प्रांत द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) 2026 श्रीगौरी स्थित माधवधाम में 15 दिवसीय गहन प्रशिक्षण के बाद रविवार को समारोहपूर्वक समाप्त हो गया। इस वर्ग में विभिन्न समुदायों और भाषाओं के 81 स्वयंसेवक शामिल हुए, जिन्होंने शारीरिक, बौद्धिक और सांगठनिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

वर्ग का शुभारंभ और पथ संचलन
18 अप्रैल को दीप प्रज्वलन के साथ वर्ग का शुभारंभ हुआ। प्रांत संघचालक ज्योत्स्नामय चक्रवर्ती और प्रांत कार्यवाह विमान बिहारी नाथ ने दीप प्रज्वलित किया। उद्घाटन समारोह में दक्षिण कछार जिला संघचालक एवं वर्ग सर्वाधिकारी अशोक बर्मन तथा जिला सह-कार्यवाह एवं वर्ग कार्यवाह भानु प्रताप कैरी भी उपस्थित रहे।

27 अप्रैल को वर्ग के पथ संचलन का आयोजन किया गया। माधवधाम से शुरू होकर यह संचलन मालुआ, चैतन्य नगर तथा श्रीगौरी सड़क होते हुए पुनः माधवधाम पर समाप्त हुआ। इस मार्ग पर स्वयंसेवकों ने अनुशासन और एकता का अद्भुत प्रदर्शन किया।

विविधता भरा प्रशिक्षण शिविर
इस शिक्षा वर्ग में दक्षिण असम प्रांत के 67 विभिन्न स्थानों से 81 स्वयंसेवक शामिल हुए। आयु सीमा 15 से 40 वर्ष रखी गई थी। भाग लेने वाले युवाओं में उच्च माध्यमिक, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राओं के साथ व्यवसायी और नौकरीपेशा स्वयंसेवक भी शामिल थे।

इस शिक्षा वर्ग का विशेष आकर्षण यह रहा कि बांग्ला, नेपाली, मणिपुरी, हिंदी भाषा बोलने वाले तथा चाय जनजाति, डिमासा, कार्बी सहित विभिन्न समुदायों के स्वयंसेवक एक साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। वर्ग में कुल 12 शिक्षक और 29 प्रबंधक नियुक्त किए गए थे। जिनके मार्गदर्शन में नियमित शारीरिक व्यायाम, बौद्धिक सत्र और सांगठनिक प्रशिक्षण चले। अनुशासन और समयबद्धता पर विशेष जोर दिया गया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि
रविवार को आयोजित समापन समारोह में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) सिलचर के निदेशक प्रोफेसर डॉ. दिलीप वैद्य बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं आरएसएस असम क्षेत्र संघचालक डॉ. उमेश चक्रवर्ती मुख्य वक्ता थे। उन्होंने संघ के इतिहास, उद्देश्यों और वर्तमान कार्यों पर प्रकाश डाला तथा ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की।
समारोह में स्वयंसेवकों ने दंड, निःयुद्ध, दंडयुद्ध, आसन, सामूहिक समता और घोष का शानदार प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को मुग्ध कर दिया।

सामाजिक सद्भाव का अनुपम उदाहरण
३० अप्रैल को बदरपुर नगर तथा आसपास के 41 परिवारों ने अपने घरों से स्वयं रसोई बनाकर सभी प्रशिक्षणार्थियों के साथ सामूहिक भोजन किया। यह भोज केवल भोजन साझा करने तक सीमित नहीं था, बल्कि विभिन्न स्तरों के लोगों के बीच भ्रातृत्व और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक बन गया।
संघ शिक्षा वर्ग का महत्व
आरएसएस का संघ शिक्षा वर्ग स्वयंसेवकों को शारीरिक रूप से सुदृढ़, बौद्धिक रूप से जागरूक और सांगठनिक रूप से तैयार करने का एक पारंपरिक कार्यक्रम है। असम के बाराक घाटी, दीमा हसाओ आदि क्षेत्र को लेकर गठित दक्षिण असम प्रांत में यह वर्ग विविधता को एकता में बदलने का अनूठा माध्यम साबित हुआ।

समापन समारोह में दक्षिण असम प्रांत के विभिन्न कार्यकर्ता और स्थानीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह शिक्षा वर्ग न केवल प्रशिक्षण का सफल आयोजन था, बल्कि अनुशासन, राष्ट्र सेवा और सामाजिक सद्भाव का जीवंत उदाहरण भी बन गया।




