भालुकी मकड़ी के दंश पर जीवन की जीत : गोलाघाट की पशु सखी मृदुस्मिता बोरा ने जीती मौत से जंग, 12 दिन बाद स्वस्थ होकर लौटीं घर : डॉ. सुरजीत गिरी के विशेष उपचार और सतत निगरानी से मिली नई जिंदगी
टैरेंटुला प्रजाति की विषैली चिलोब्रैकिस (भालुकी) मकड़ी के दंश से हुई थीं गंभीर रूप से बीमार

शिवसागर, 16 जून : असम में इन दिनों चर्चा का विषय बनी टैरेंटुला प्रजाति की विषैली विशालकाय चिलोब्रैकिस (Chilobrachys) अथवा ‘भालुकी’ मकड़ी के दंश से गंभीर रूप से बीमार हुई गोलाघाट जिले की पशु सखी मृदुस्मिता बोरा आखिरकार पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट आई हैं। लगभग 12 दिनों तक असहनीय दर्द, सूजन और गंभीर शारीरिक जटिलताओं से जूझने के बाद उनकी सफल चिकित्सा ने एक बार फिर इस विषैली मकड़ी के बढ़ते खतरे और समय पर सही उपचार की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।

मृदुस्मिता बोरा की सफल रिकवरी न केवल उनके परिवार के लिए राहत और खुशी की खबर है, बल्कि पूरे समाज के लिए जागरूकता और सतर्कता का संदेश भी बनकर सामने आई है।
वन विभाग की नर्सरी में हुआ था दंश
प्राप्त जानकारी के अनुसार जीविका सखी परियोजना के अंतर्गत पशु सखी के रूप में कार्यरत गोलाघाट निवासी मृदुस्मिता बोरा गत 4 जून को बोकियाल वन विभाग कार्यालय की नर्सरी से पौधे लेने गई थीं। इसी दौरान उन्हें विषैली भालुकी मकड़ी ने काट लिया।
मकड़ी के दंश के कुछ ही समय बाद उनके शरीर में गंभीर प्रतिक्रिया शुरू हो गई। दंश वाले हिस्से में तेज दर्द, सूजन और असहनीय जलन उत्पन्न होने लगी, जिसके बाद परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए गोलाघाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लेकर पहुंचे।

प्रारंभिक उपचार के बावजूद बिगड़ती रही हालत
गोलाघाट मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय उपचार शुरू किया गया, लेकिन उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। समय के साथ दंश वाले स्थान पर सूजन और दर्द बढ़ता गया तथा अन्य जटिलताएं भी सामने आने लगीं।
स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए जोरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JMCH) रेफर कर दिया। 8 जून से वह वहां भर्ती रहीं, लेकिन परिवार के अनुसार उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई थी।

सोशल मीडिया से मिली नई उम्मीद
इसी बीच परिवार की नजर सोशल मीडिया पर सर्प एवं विषदंश रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरजीत गिरी द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान पर पड़ी। अभियान में डॉ. गिरी ने भालुकी मकड़ी के दंश, उसके प्रभाव, संभावित जटिलताओं और उपचार की विस्तृत जानकारी साझा की थी।
इस जानकारी से आशान्वित होकर मृदुस्मिता बोरा और उनके परिजनों ने डॉ. गिरी से संपर्क किया और विशेषज्ञ सलाह प्राप्त की।

डिमौ ग्रामीण अस्पताल में शुरू हुआ विशेष उपचार
डॉ. सुरजीत गिरी के मार्गदर्शन में 12 जून से डिमौ ग्रामीण अस्पताल में मृदुस्मिता बोरा का उपचार शुरू किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सा, उचित दवाओं और निरंतर चिकित्सकीय निगरानी के परिणामस्वरूप उनकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा।
लगातार चार दिनों तक चले उपचार के बाद उनकी सूजन, दर्द और अन्य जटिलताओं में उल्लेखनीय कमी आई तथा अंततः वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौटने में सफल रहीं।
“मुझे नया जीवन मिला” : मृदुस्मिता बोरा
स्वस्थ होने के बाद भावुक मृदुस्मिता बोरा ने डॉ. सुरजीत गिरी और उनकी टीम के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि सही समय पर उचित उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकीय मार्गदर्शन मिलने के कारण ही उन्हें नया जीवन मिला। उन्होंने डिमौ ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की भी सराहना करते हुए उनके समर्पण, संवेदनशीलता और सेवा भावना के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
असम में बढ़ रहे हैं भालुकी मकड़ी के दंश के मामले
उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में असम के विभिन्न जिलों—विशेषकर गोलाघाट, जोरहाट, चराईदेव, शिवसागर, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, डिमौ, गेलेकी, टियोक और बोकोटा क्षेत्र—से भालुकी मकड़ी के दंश के कई मामले सामने आए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मकड़ी मानसून और बरसात के मौसम में अधिक सक्रिय रहती है तथा घरों, लकड़ी के ढेर, बागानों, पौधशालाओं और नम स्थानों में पाई जाती है।

डॉ. सुरजीत गिरी के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
सर्प एवं विषदंश विशेषज्ञ डॉ. सुरजीत गिरी द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से जून 2026 तक भालुकी मकड़ी के दंश के 55 से अधिक मामलों का उपचार किया जा चुका है।
डॉ. गिरी के अनुसार —
– प्रारंभिक 10 मरीज सभी महिलाएं थीं।
– कई मामलों में उंगलियों और हाथों में गंभीर संक्रमण एवं ऊतक क्षति देखी गई।
– पूर्व में छह मरीजों की उंगलियां काटनी पड़ी थीं।
– समय पर उपचार मिलने से अनेक मरीजों को गंभीर शारीरिक क्षति से बचाया जा सका।
– मई से सितंबर तक इस मकड़ी की सक्रियता सबसे अधिक रहती है।
विशेषज्ञों ने जारी की चेतावनी
डॉ. सुरजीत गिरी ने लोगों से अपील की है कि भालुकी मकड़ी के दंश को सामान्य कीट के काटने की घटना समझकर नजरअंदाज न करें।
उन्होंने कहा कि यदि मकड़ी के काटने के बाद असामान्य सूजन, तेज दर्द, जलन, त्वचा का रंग बदलना, संक्रमण या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता लें।
जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान, शीघ्र चिकित्सा और सही उपचार ही ऐसे मामलों में जीवन बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। मृदुस्मिता बोरा की सफल रिकवरी इस बात का प्रमाण है कि उचित चिकित्सा और जागरूकता से गंभीर परिस्थितियों पर भी विजय पाई जा सकती है।
समाज के लिए प्रेरक संदेश
मृदुस्मिता बोरा की स्वास्थ्य लाभ की यह कहानी केवल एक मरीज के स्वस्थ होने की घटना नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि विषैले जीवों के दंश को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
यह घटना एक ओर जहां भालुकी मकड़ी के बढ़ते खतरे के प्रति चेतावनी देती है, वहीं दूसरी ओर यह भी दर्शाती है कि समय पर सही चिकित्सकीय हस्तक्षेप किसी भी गंभीर स्थिति में जीवन रक्षक साबित हो सकता है।




