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शिवसागर नगर पालिका में सियासी भूचाल : पालिका अध्यक्ष मृणाली कुंवर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश, 7 पार्षदों ने विशेष सभा बुलाने की मांग : भाजपा और अगप के पार्षदों ने खोला मोर्चा, जिला आयुक्त, सीईओ और पालिका अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

बहुमत से अधिक पार्षदों के समर्थन से बढ़ी राजनीतिक हलचल, नगर पालिका की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव के संकेत

शिवसागर, 16 जून : शिवसागर नगर पालिका की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब नगर पालिका अध्यक्ष मृणाली कुंवर के खिलाफ सात निर्वाचित पार्षदों ने औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिया। इस घटनाक्रम ने न केवल नगर प्रशासन बल्कि जिले की राजनीतिक फिजा को भी गर्म कर दिया है।

अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले पार्षदों ने नगर पालिका प्रशासन से नियमानुसार शीघ्र विशेष सभा बुलाकर प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान कराने की मांग की है। इस संबंध में एक संयुक्त ज्ञापन नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (सीईओ) देवब्रत शर्मा, अध्यक्ष मृणाली कुंवर तथा शिवसागर के जिला आयुक्त मृदुल यादव को सौंपा गया है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नगर पालिका के कार्यकाल के अंतिम चरण में सामने आया यह घटनाक्रम केवल प्रशासनिक असंतोष का परिणाम नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत है।

किन पार्षदों ने किया अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन

सूत्रों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वालों में भारतीय जनता पार्टी और असम गण परिषद के कुल सात पार्षद शामिल हैं।

इनमें —

– वार्ड संख्या 14 की पार्षद जूली पाटर (भाजपा)
– वार्ड संख्या 12 की पार्षद ज्योति दत्त (भाजपा)
– वार्ड संख्या 4 की पार्षद सुरभि सैकिया (भाजपा)
– वार्ड संख्या 6 के पार्षद समीर दत्त (भाजपा)
– वार्ड संख्या 8 की पार्षद स्मृति रेखा दत्त (भाजपा)
– वार्ड संख्या 7 की पार्षद बंटी हजारिका (भाजपा)
– वार्ड संख्या 3 के पार्षद दीपू हजारिका (अगप)

विशेष रूप से भाजपा पार्षद जूली पाटर वर्तमान में भाजपा महिला मोर्चा, शिवसागर जिला इकाई की जिलाध्यक्ष भी हैं। उनके अविश्वास प्रस्ताव का हिस्सा बनने से इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।

बहुमत के आंकड़े से आगे पहुंचा विरोधी गुट

अप्रैल 2022 में गठित शिवसागर नगर पालिका में कुल 14 वार्ड हैं। चुनाव में भाजपा के 10, सहयोगी दल असम गण परिषद के 2 तथा रायजोर दल के 2 पार्षद निर्वाचित हुए थे।

हालांकि एक महिला पार्षद के निधन के बाद वर्तमान में निर्वाचित पार्षदों की संख्या घटकर 13 रह गई है।

ऐसे में 13 सदस्यीय सदन में 7 पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह संख्या आवश्यक बहुमत के आंकड़े से अधिक है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सात पार्षदों के अतिरिक्त दो अन्य पार्षदों ने भी इस समूह को समर्थन देने का आश्वासन दिया है। हालांकि उनके नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

यदि यह समर्थन औपचारिक रूप से सामने आता है तो नगर पालिका की वर्तमान सत्ता संरचना पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

लंबे समय से चल रहा था असंतोष

सूत्रों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव अचानक नहीं आया है।

बताया जा रहा है कि अध्यक्ष मृणाली कुंवर की कार्यशैली, प्रशासनिक निर्णयों तथा नगर पालिका के संचालन को लेकर कुछ पार्षदों में लंबे समय से असंतोष था।

इन मुद्दों को लेकर संबंधित पार्षदों द्वारा पार्टी नेतृत्व तथा संगठन के विभिन्न स्तरों पर शिकायतें भी की गई थीं। हालांकि लंबे समय तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के कारण असंतोष बढ़ता गया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब अविश्वास प्रस्ताव उसी असंतोष का औपचारिक और सार्वजनिक रूप है।

कार्यकाल समाप्ति से पहले क्यों बढ़ा राजनीतिक तापमान?

सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि शिवसागर नगर पालिका का वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने में अब केवल कुछ महीने ही शेष हैं।

ऐसे समय में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाना कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी नहीं बल्कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक पुनर्संरेखण का भी संकेत हो सकता है।

नगर पालिका के भीतर उभर रहे मतभेद भविष्य की चुनावी रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

भाजपा के भीतर मतभेदों की चर्चा तेज

अविश्वास प्रस्ताव के बाद राजनीतिक गलियारों में भाजपा भीतर मतभेदों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से आधिकारिक राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन नगर पालिका के भीतर सत्ता पक्ष के पार्षदों द्वारा ही अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलना स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में जिले की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

अब क्या होगा आगे ?

नगर पालिका अधिनियम और नियमों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत विशेष बैठक बुलानी होगी।

उस बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा तथा मतदान कराया जाएगा।

यदि आवश्यक समर्थन प्रस्ताव के पक्ष में बना रहता है तो नगर पालिका के नेतृत्व में परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

फिलहाल पूरे जिले की निगाहें नगर पालिका प्रशासन द्वारा बुलाई जाने वाली संभावित विशेष बैठक पर टिकी हुई हैं।

शिवसागर की राजनीति में नया मोड़

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसागर नगर पालिका में उत्पन्न यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि स्थानीय राजनीति में उभर रहे नए समीकरणों का संकेत भी है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विशेष बैठक में अविश्वास प्रस्ताव किस दिशा में जाता है और क्या यह प्रस्ताव केवल असंतोष की अभिव्यक्ति साबित होगा या फिर वास्तव में शिवसागर नगर पालिका की सत्ता में बड़ा बदलाव लेकर आएगा।

फिलहाल इतना तय है कि शिवसागर नगर पालिका में शुरू हुआ यह सियासी संग्राम आने वाले दिनों में जिले की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बनने जा रहा है।

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