मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नाम से फर्जी ई-मेल बनाकर लोगों को ठगने की साजिश का पर्दाफाश : CID साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई : फर्जी सरकारी संचार भेजने के आरोप में एक आरोपी गिरफ्तार, तीन दिन की पुलिस रिमांड
मुख्यमंत्री के नाम पर ई-मेल आईडी बनाकर लोगों को गुमराह करने का आरोप, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज

न्यूज डेस्क, 19 जुलाई : असम पुलिस की अपराध अन्वेषण विभाग (CID) की साइबर शाखा ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नाम पर कथित रूप से फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर लोगों को गुमराह करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान पंकज दास (34 वर्ष) के रूप में हुई है, जिसे रविवार को कामरूप जिले के चांगसारी थाना क्षेत्र स्थित धोपारतरी गांव स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

16 जुलाई को दर्ज हुआ था साइबर अपराध का मामला
CID के आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 16 जुलाई 2026 को CID साइबर पुलिस थाना कांड संख्या 11/2026 दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सामने आया कि “cmassamgov.in@gmail.com” नाम से एक संदिग्ध ई-मेल आईडी बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा का प्रतिरूप (इम्पर्सोनेशन) तैयार कर आम नागरिकों को कथित रूप से फर्जी “सरकारी संचार” भेजना था। प्रारंभिक जांच में इसे दुर्भावनापूर्ण गतिविधि माना गया है।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 61(2), 340(2), 336(3), 319(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धाराओं 66, 66C और 66D के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में पहचान की चोरी, कंप्यूटर संसाधनों का दुरुपयोग, ऑनलाइन प्रतिरूपण के माध्यम से धोखाधड़ी तथा साइबर अपराध से जुड़े अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं।
चांगसारी से हुई गिरफ्तारी
जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर CID साइबर टीम ने आरोपी पंकज दास को उसके घर से गिरफ्तार किया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी ई-मेल के माध्यम से कितने लोगों से संपर्क किया गया, क्या किसी प्रकार की आर्थिक ठगी या अन्य साइबर अपराध का प्रयास हुआ तथा इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी या नहीं। प्रेस विज्ञप्ति में अब तक किसी अन्य गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।
तीन दिन की पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। इस दौरान जांच एजेंसियां ई-मेल निर्माण, उपयोग किए गए डिजिटल उपकरणों, संभावित सहयोगियों और कथित फर्जी संदेशों के प्रसार से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच करेंगी।
साइबर प्रतिरूपण से सतर्क रहने की सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार आगाह करते रहे हैं कि सरकारी अधिकारियों, संस्थानों अथवा जनप्रतिनिधियों के नाम से बनाए गए फर्जी ई-मेल, वेबसाइट या सोशल मीडिया खातों के माध्यम से लोगों को भ्रमित करने और ठगी का प्रयास किया जाता है। भारत सरकार का राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (I4C) भी नागरिकों को केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त संदेशों पर ही भरोसा करने तथा किसी भी संदिग्ध ई-मेल, वेबसाइट या ऑनलाइन पहचान की तुरंत शिकायत करने की सलाह देता है।
जांच जारी
CID ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मुख्यमंत्री कार्यालय या किसी सरकारी विभाग के नाम से आने वाले संदिग्ध ई-मेल अथवा संदेशों की सत्यता की पुष्टि किए बिना उन पर भरोसा न करें।




