असम में अपराध, आधार, आर्य नगर और घुसपैठ पर मुख्यमंत्री की बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस : हिमंत विश्व शर्मा बोले— कानून-व्यवस्था पर शून्य सहनशीलता, अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा : 18 वर्ष से ऊपर आधार पर सख्ती, आर्य नगर विवाद को नलबाड़ी-गुवालपाड़ा मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया
👉 एक अपराधी पूरे समाज का प्रतिनिधि नहीं, समुदायों को बदनाम करना गलत 👉 समाज को बांटने की राजनीति से बचें, आंदोलनकाल जैसे हालात नहीं लौटने चाहिए 👉 किसी व्यक्ति की गलती के लिए पूरी जाति या समुदाय को दोषी ठहराना उचित नहीं 👉 आर्य नगर विवाद पर बोले मुख्यमंत्री— नलबाड़ी और गुवालपाड़ा घटनाओं के बाद बदला माहौल 👉 तिवारी उपनाम होने मात्र से कोई पूरे हिंदीभाषी समाज का प्रतिनिधि नहीं 👉 अपराधी की पहचान उसके अपराध से हो, उसकी जाति और भाषा से नहीं 👉 सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील, भड़काऊ नैरेटिव से सावधान रहने को कहा

गुवाहाटी, 13 जून : असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने असम मंत्रिमंडल की बैठक के बाद शनिवार को गुवाहाटी में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की कानून-व्यवस्था, अपराध दर में गिरावट, आधार कार्ड जारी करने की नई नीति, अवैध घुसपैठ, गुवाहाटी के आर्य नगर प्रकरण, नलबाड़ी एनकाउंटर, गुवालपाड़ा विवाद तथा विधायक अखिल गोगोई की सुरक्षा व्यवस्था सहित कई संवेदनशील विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि असम सरकार अपराध, घुसपैठ और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली गतिविधियों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है।

कानून-व्यवस्था में बड़ा सुधार, अपराध दर में आई उल्लेखनीय गिरावट
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में असम में कानून-व्यवस्था की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण, त्वरित पुलिस कार्रवाई और आधुनिक जांच प्रणाली के कारण राज्य में अपराध दर लगातार कम हुई है। सरकार का लक्ष्य केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं बल्कि अपराध की रोकथाम को प्राथमिकता देना है।
उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि, संगठित अपराध, रंगदारी, मादक पदार्थों के कारोबार और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिशों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
आधार कार्ड पर सख्ती, अवैध घुसपैठ रोकने की नई रणनीति
प्रेस कॉन्फ्रेंस की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा आधार कार्ड जारी करने की नई नीति को लेकर रही।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को सामान्य प्रक्रिया के तहत आधार कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ जिलों में आधार कवरेज 100 प्रतिशत से भी अधिक पाया गया है, जिससे यह संदेह पैदा हुआ है कि अवैध रूप से रह रहे कुछ लोगों ने भी आधार कार्ड प्राप्त कर लिए हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार यह निर्णय राज्य की जनसांख्यिकीय सुरक्षा, स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा तथा अवैध घुसपैठियों को सरकारी पहचान प्रणाली का लाभ लेने से रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और चाय बागान समुदाय के लोगों को मार्च 2027 तक आधार प्राप्त करने की सुविधा रहेगी। इसके बाद यदि किसी वयस्क व्यक्ति को आधार की आवश्यकता होगी तो जिला आयुक्त के माध्यम से राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा और जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी।
हालांकि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए आधार नामांकन की प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी।
आर्य नगर विवाद पर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान
गुवाहाटी के चर्चित आर्य नगर प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना को जिस प्रकार सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर प्रस्तुत किया गया, उससे यह प्रतीत होता है कि कुछ लोग अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्य नगर मामले को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर नलबाड़ी एनकाउंटर और गोलपाड़ा से जुड़े विवादों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि किसी भी घटना की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आती है और सरकार तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करती है, न कि सोशल मीडिया के नैरेटिव के आधार पर।

असमिया-बिहारी और असमिया-बंगाली विवाद पर मुख्यमंत्री की दो टूक
👉 एक अपराधी पूरे समाज का प्रतिनिधि नहीं, समुदायों को बदनाम करना गलत
👉 समाज को बांटने की राजनीति से बचें, आंदोलनकाल जैसे हालात नहीं लौटने चाहिए
👉 किसी व्यक्ति की गलती के लिए पूरी जाति या समुदाय को दोषी ठहराना उचित नहीं
👉 आर्य नगर विवाद पर बोले मुख्यमंत्री— नलबाड़ी और गुवालपाड़ा घटनाओं के बाद बदला माहौल
👉 तिवारी उपनाम होने मात्र से कोई पूरे हिंदीभाषी समाज का प्रतिनिधि नहीं
👉 अपराधी की पहचान उसके अपराध से हो, उसकी जाति और भाषा से नहीं
👉 सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील, भड़काऊ नैरेटिव से सावधान रहने को कहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि असमिया बिहारी, असमिया बंगाली इसको लेकर यदि हम झगड़ते रहे तो हम फिर से आंदोलन के समय के हालातों में वापस पहुंच जाएंगे। एक अपराधी हिंदीभाषी हो सकता है, परंतु वह तो पूरी हिंदीभाषी कम्युनिटी को रिप्रेजेंट नहीं करता। यदि किसी एक असमिया लड़के का नाम रेप केस में आता है तो क्या पूरे असमिया समाज को रेपिस्ट कहेगा तो हम मानेंगे क्या ? इसीलिए असम में किसी एक बिहारी व्यक्ति ने झगड़ा किया और हम पूरी बिहारी जाति को घसीटना, पूरे असमिया समाज को घसीटना यह बात कतई समर्थन योग्य नहीं है। हां यदि वह व्यक्ति मीटिंग करके कहता कि हां मैं पूरे बिहारी समाज की ओर से यह झगड़ा कर रहा हूं तब बात अलग होती। किसी व्यक्ति की उपाधि तिवारी होने से वह पूरे हिंदीभाषी कम्युनिटी का प्रतिनिध है यह कैसे कहा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नलबाड़ी और गुवालपाड़ा की घटना नहीं होती तो आर्य नगर की घटना नहीं होती।
सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील
मुख्यमंत्री ने लोगों से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों और भ्रामक वीडियो से सावधान रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आजकल किसी भी घटना को कुछ सेकंड की वीडियो क्लिप और भावनात्मक पोस्ट के जरिए अलग दिशा देने का प्रयास किया जाता है। इससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और पुलिस प्रत्येक मामले की जांच निष्पक्ष रूप से कर रही है और जनता को केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करना चाहिए।

पुलिस जांच में जातीय संघर्ष का कोई प्रमाण नहीं
मुख्यमंत्री ने बताया कि आर्य नगर मामले में पुलिस जांच के दौरान अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जिससे इसे असमिया बनाम गैर-असमिया या किसी जातीय संघर्ष का मामला माना जा सके।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि घटना की पृष्ठभूमि रंगदारी और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी थी। कुछ लोगों ने कथित रूप से असमिया भावनाओं का सहारा लेकर मामले को जातीय रंग देने का प्रयास किया।
नलबाड़ी और गुवालपाड़ा मामलों पर भी सरकार गंभीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नलबाड़ी एनकाउंटर और गुवालपाड़ा में उत्पन्न विवादों को भी पूरी गंभीरता से देख रही है।
उन्होंने दोहराया कि कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी व्यक्ति, संगठन या समूह को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अपराधी चाहे किसी भी समुदाय, भाषा या क्षेत्र से जुड़ा हो, उसके खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होगी।
अखिल गोगोई की सुरक्षा बढ़ाने पर मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसागर के विधायक एवं रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान किए जाने के विषय पर भी मुख्यमंत्री ने विस्तार से अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि मतगणना के दिन अखिल गोगोई और कुशल दुवरी दोनों को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। बाद में सुरक्षा वापस ले ली गई, लेकिन अखिल गोगोई ने पुलिस को सुरक्षा जारी रखने का अनुरोध किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब आईजीपी ने मुझे बताया कि ऐसा अनुरोध आया है, तब हमने तुरंत सुरक्षा उपलब्ध करा दी। उनके मन में कोई आशंका हो सकती है। यदि भविष्य में कोई घटना हो जाए तो बदनामी सरकार और मेरी ही होगी।”
उन्होंने कहा कि सरकार के लिए एक विधायक का जीवन महत्वपूर्ण है और इसी कारण सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने हल्के अंदाज में कहा कि संभव है कुछ दिनों बाद स्वयं अखिल गोगोई ही सुरक्षा हटाने का अनुरोध कर दें, क्योंकि हर समय पुलिस साथ रहने से व्यक्ति की निजता प्रभावित होती है।
व्यापार, कृषि और निवेश पर भी सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम को पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख व्यापारिक, लॉजिस्टिक और निवेश केंद्र बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क, रेल, हवाई और जल संपर्क सुविधाओं के कारण असम आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर का आर्थिक प्रवेश द्वार बन सकता है।
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने हाल ही में सिंगापुर के लिए रवाना की गई जीआई टैग प्राप्त तेजपुर लीची की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप को राज्य के किसानों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
पूर्वोत्तर के लिए विशेष विकास मॉडल की मांग
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए “जियोग्राफिक इक्विटी” मॉडल अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि केवल जनसंख्या के आधार पर संसाधनों का आवंटन उचित नहीं है। सीमावर्ती और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाई जानी चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकले तीन बड़े संदेश
मुख्यमंत्री की विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस से तीन स्पष्ट संदेश सामने आए —
पहला : अपराध, रंगदारी, मादक पदार्थों के कारोबार और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
दूसरा : अवैध घुसपैठ रोकने के लिए पहचान प्रणाली और आधार जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक कठोर बनाया जाएगा।
तीसरा : असम को सुरक्षा, विकास, कृषि निर्यात, निवेश और क्षेत्रीय व्यापार के नए मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार तथ्यों और कानून के आधार पर निर्णय लेती रहेगी तथा किसी भी प्रकार की अफवाह, दुष्प्रचार या समाज को बांटने वाली राजनीति को सफल नहीं होने दिया जाएगा।




