सोनारी में कथित फर्जी नौकरी रैकेट का बड़ा खुलासा : जिला सरकारी अस्पताल में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी का आरोप : नाजिरुद्दीन नामक व्यक्ति पर नेटवर्क संचालन के आरोप, निष्पक्ष जांच की उठी मांग
नियुक्ति पत्र तक बांट रहा था कथित गिरोह : नौकरी ज्वाइन करने अस्पताल पहुंचते ही खुली सच्चाई

शिवसागर, 11 जून : ऊपरी असम के चराईदेव जिले के मुख्यालय सोनारी में शिक्षित बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर कथित रूप से ठगी करने वाले एक फर्जी भर्ती गिरोह के सक्रिय होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि यह गिरोह युवाओं को सोनारी के राजापुखुरी स्थित चराईदेव जिला सरकारी अस्पताल में नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर उनसे धनराशि वसूल रहा था।
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है और स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

नौकरी के नाम पर हजारों रुपये वसूलने का आरोप
सूत्रों के अनुसार, इस कथित नेटवर्क का संचालन नाजिरुद्दीन नामक व्यक्ति के नेतृत्व में किया जा रहा था। आरोप है कि वह और उसके सहयोगी विभिन्न क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को अस्पताल में विभिन्न पदों पर नियुक्ति का भरोसा दिलाकर उनसे ऑनलाइन माध्यम से अपने बैंक खातों में धनराशि जमा करवा रहे थे।
पीड़ितों का दावा है कि उन्हें बताया गया था कि चराईदेव जिला नागरिक अस्पताल, राजापुखुरी में डॉक्टर के निजी सहायक (पर्सनल असिस्टेंट), सुपरवाइजर तथा अन्य पदों पर भर्ती की जा रही है। सरकारी नौकरी की उम्मीद में कई युवाओं ने कथित रूप से निर्धारित राशि जमा कर दी।
भरोसा दिलाने के लिए बांटे गए कथित नियुक्ति पत्र
मामले को विश्वसनीय बनाने के लिए उम्मीदवारों को कथित रूप से नियुक्ति पत्र (अपॉइंटमेंट लेटर) भी प्रदान किए गए। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं को यह विश्वास हो गया कि भर्ती प्रक्रिया वास्तविक है और उन्हें शीघ्र ही नौकरी मिल जाएगी।
इसी विश्वास के आधार पर कई उम्मीदवार नौकरी ज्वाइन करने की तैयारी में जुट गए।

अस्पताल पहुंचने पर खुला पूरा मामला
मामले ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया जब नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले कुछ उम्मीदवार नौकरी ज्वाइन करने के लिए सीधे चराईदेव जिला नागरिक अस्पताल पहुंच गए।
अस्पताल प्रशासन से संपर्क करने पर उन्हें पता चला कि अस्पताल की ओर से ऐसी किसी भर्ती प्रक्रिया का संचालन ही नहीं किया जा रहा है। यह जानकारी मिलते ही उम्मीदवारों को ठगी की आशंका हुई और पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हो गईं।
अस्पताल अधीक्षक ने नियुक्ति पत्रों को बताया फर्जी
चराईदेव जिला नागरिक अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रेहानुद्दीन शेख ने बताया कि भैरव गोगोई और नयनमणि गोगोई नामक दो व्यक्ति नियुक्ति पत्र लेकर अस्पताल में नौकरी ज्वाइन करने पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि एक उम्मीदवार को सुपरवाइजर तथा दूसरे को डॉक्टर के पर्सनल असिस्टेंट के पद के लिए नियुक्ति पत्र दिया गया था। जांच के दौरान दोनों नियुक्ति पत्र फर्जी पाए गए।
डॉ. शेख ने स्पष्ट किया कि ये नियुक्ति पत्र किसी भी सरकारी विभाग अथवा अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी नहीं किए गए हैं। उन्होंने पीड़ितों को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।

कई सवालों के घेरे में पूरा प्रकरण
मामले के सामने आने के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं। यदि अस्पताल के नाम पर नियुक्ति पत्र जारी किए गए, तो उन पर अस्पताल का नाम और पदों का उल्लेख किस आधार पर किया गया? क्या इस कथित नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं? और क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण भी इस पूरे तंत्र को प्राप्त था?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी सुनियोजित तरीके से संचालित इस कथित फर्जीवाड़े की गहन और निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाने का आरोप
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि बढ़ती बेरोजगारी के बीच नौकरी की तलाश कर रहे युवा ऐसे गिरोहों का आसान शिकार बन जाते हैं। सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर उनसे धन वसूलना न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि उनके भविष्य और विश्वास के साथ भी खिलवाड़ है।

प्रशासन और पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग
हालांकि इस मामले में अभी तक पुलिस अथवा जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। फिर भी मामले के उजागर होने के बाद लोगों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिस से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बेरोजगार युवाओं की भावनाओं और उनके भविष्य के साथ किए गए गंभीर छल के रूप में भी देखा जाएगा।




