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सपनों से टीम इंडिया तक : राजस्थान के लाल ने किया कमाल : श्रीगंगानगर के साधारण घर का बेटा बना भारत का नया क्रिकेट सितारा : मानव सुथार की प्रेरणादायक कहानी : पिता का अधूरा सपना, बेटे का जुनून और संघर्ष की वह दास्तान जिसने करोड़ों युवाओं को दिया नया विश्वास

विशेष फीचर |

न्यूज डेस्क, 9 जून : हर युवा के मन में कोई न कोई सपना होता है। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, तो कोई देश के लिए खेलकर तिरंगा ऊंचा करने का सपना देखता है। लेकिन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए अथक मेहनत, धैर्य, संघर्ष और अटूट विश्वास की आवश्यकता होती है। ऐसे ही एक सपने को साकार कर दिखाया है राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के युवा क्रिकेटर मानव सुथार ने, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, मेहनत और समर्पण के दम पर भारतीय क्रिकेट टीम तक का सफर तय किया है।

श्रीगंगानगर की मिट्टी से निकला भारतीय क्रिकेट का नया सितारा

राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर की तपती धरती पर जन्मे मानव जगदुसाकुमार सुथार का क्रिकेट सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 3 अगस्त 2002 को जन्मे मानव एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता जगदीश कुमार सुथार शारीरिक शिक्षा शिक्षक (पीटीआई) हैं, जबकि उनकी माता सुशीला देवी गृहिणी हैं। परिवार आर्थिक रूप से बेहद समृद्ध नहीं था, लेकिन बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए माता-पिता ने हर संभव प्रयास किया।

पिता का अधूरा सपना बना बेटे की प्रेरणा

मानव के पिता स्वयं क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। उन्होंने यह निश्चय किया कि बेटे के सपनों को कभी अधूरा नहीं रहने देंगे। जब मानव मात्र 12 वर्ष के थे, तब उनके पिता ने उन्हें श्रीगंगानगर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के अंतर्गत एस.के. बिहानी क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया। बेहतर अभ्यास सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद टर्फ पिच की व्यवस्था करवाई और कई बार कर्ज लेकर भी बेटे के क्रिकेट प्रशिक्षण में कोई कमी नहीं आने दी।

जब कोच ने पहचानी असली प्रतिभा

शुरुआत में जगदीश सुथार चाहते थे कि उनका बेटा एक सफल बल्लेबाज बने, लेकिन मानव के कोच धीरज शर्मा ने उनकी प्रतिभा को अलग नजर से देखा। कोच को मानव में एक उत्कृष्ट बाएं हाथ का स्पिन गेंदबाज दिखाई दिया। उनके मार्गदर्शन में मानव ने गेंदबाजी पर विशेष ध्यान देना शुरू किया और यही फैसला आगे चलकर उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

50 डिग्री की गर्मी में तपकर बना मैच विनर

श्रीगंगानगर की गर्मियां पूरे देश में अपनी भीषण गर्मी के लिए जानी जाती हैं। यहां तापमान कई बार 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। लेकिन यही गर्मी मानव की सबसे बड़ी परीक्षा और ताकत बन गई। जब अधिकांश लोग घरों में आराम करते थे, तब मानव मैदान में घंटों अभ्यास करते दिखाई देते थे। बताया जाता है कि वे कई बार एक दिन में 40 से 45 ओवर तक गेंदबाजी का अभ्यास करते थे। यही अथक मेहनत आगे चलकर उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी पहचान बनी।

17 साल की उम्र में दिखा भविष्य का सितारा

मानव ने कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था। महज 17 वर्ष की आयु में उन्हें भारत की अंडर-19 टीम में मौका मिला। अफगानिस्तान अंडर-19 टीम के खिलाफ तीन मैचों की श्रृंखला में उन्होंने 10 विकेट हासिल किए और ‘मैन ऑफ द सीरीज’ का खिताब अपने नाम किया। इस शानदार प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम चर्चा में आने लगा।

रणजी ट्रॉफी में मचाया धमाल

17 फरवरी 2022 को मानव ने राजस्थान के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। अपने पहले ही सत्र में उन्होंने यह संकेत दे दिया कि भारतीय क्रिकेट को एक नया स्पिनर मिलने वाला है। रणजी ट्रॉफी 2022-23 सीजन में उन्होंने छह मैचों में 39 विकेट लेकर सनसनी मचा दी। उनकी घातक गेंदबाजी ने विपक्षी बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया।

इमर्जिंग एशिया कप और इंडिया ‘ए’ तक का सफर

घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद मानव को बड़े मंचों पर अवसर मिलने लगे। 2023 में उन्हें इमर्जिंग एशिया कप के लिए भारतीय टीम में चुना गया, जहां उन्होंने पांच मैचों में 10 विकेट लेकर अपनी प्रतिभा साबित की। पाकिस्तान के खिलाफ तीन महत्वपूर्ण विकेट लेकर उन्होंने चयनकर्ताओं और क्रिकेट विशेषज्ञों को प्रभावित किया। इसके बाद उन्हें इंडिया ‘ए’ टीम के लिए भी अवसर मिला।

आईपीएल ने बदली पहचान

मानव की प्रतिभा को पहचानते हुए गुजरात टाइटंस ने उन्हें पहले नेट गेंदबाज के रूप में अपने साथ जोड़ा। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन का पुरस्कार उन्हें 2024 में मिला, जब आईपीएल नीलामी में गुजरात टाइटंस ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया। आईपीएल के अनुभव ने उनके खेल को और निखार दिया।

सिर्फ गेंदबाज नहीं, एक शानदार ऑलराउंडर भी

मानव केवल एक स्पिन गेंदबाज ही नहीं, बल्कि एक उपयोगी ऑलराउंडर भी हैं। बाएं हाथ से बल्लेबाजी करने वाले मानव ने कई महत्वपूर्ण पारियां खेलकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता भी साबित की है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका शतक इस बात का प्रमाण है कि वे टीम के लिए दोनों विभागों में योगदान देने की क्षमता रखते हैं।

दलीप ट्रॉफी में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन

घरेलू क्रिकेट में निरंतर शानदार प्रदर्शन के बाद मानव को दलीप ट्रॉफी में खेलने का अवसर मिला। अपने पदार्पण मुकाबले में सात विकेट लेकर उन्होंने नया रिकॉर्ड स्थापित किया और यह साबित कर दिया कि वह बड़े मंचों पर भी दबाव को संभालना जानते हैं।

टीम इंडिया का सपना हुआ साकार

आखिरकार वह दिन भी आया जिसका इंतजार मानव, उनके परिवार और उनके समर्थक वर्षों से कर रहे थे। अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के लिए उन्हें भारतीय टीम में शामिल किया गया। यह वह क्षण था जिसके लिए उन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी।

डेब्यू टेस्ट में रचा इतिहास

अपने पहले ही टेस्ट मैच में मानव ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे क्रिकेट जगत को प्रभावित कर दिया। उन्होंने पहली पारी में छह विकेट लेकर अफगानिस्तान की बल्लेबाजी को ध्वस्त कर दिया। उनकी घातक स्पिन के सामने विरोधी बल्लेबाज पूरी तरह असहाय नजर आए। भारत ने मुकाबले को मात्र तीन दिनों में जीत लिया और इस ऐतिहासिक जीत के नायकों में सबसे प्रमुख नाम मानव सुथार का रहा। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

जब मैदान से मां को किया वीडियो कॉल

मैच समाप्त होने के बाद का एक भावुक दृश्य भी खूब चर्चा में रहा। भारतीय टीम की जर्सी पहने मानव ने मैदान से ही अपने माता-पिता को वीडियो कॉल किया। मुस्कुराते हुए उन्होंने अपनी मां से कहा, “मां, अब खुश हो ना? देखो, मैं आज कहां पहुंच गया हूं।”

दूसरी ओर मां सुशीला देवी की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। पिता जगदीश सुथार भी गर्व से भर उठे। यह केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं थी, बल्कि पूरे परिवार के वर्षों के संघर्ष, त्याग और विश्वास की जीत थी।

गंगानगर का गौरव बना देश की नई उम्मीद

आज श्रीगंगानगर का हर युवा मानव सुथार में अपना सपना देख रहा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सफलता के लिए बड़े शहर में जन्म लेना आवश्यक नहीं है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का साथ मिले तो एक छोटे से कस्बे या गांव का युवा भी विश्व मंच पर अपनी पहचान बना सकता है।

मानव सुथार की सफलता से युवाओं को क्या सीख मिलती है?

मानव सुथार की कहानी यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगी अकादमी की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग, निरंतर मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण किसी भी युवा को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उनका सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।

यह मंजिल नहीं, एक नई शुरुआत है

मानव सुथार का शानदार टेस्ट पदार्पण उनकी मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। भारतीय क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वह भारत के स्पिन आक्रमण की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं। श्रीगंगानगर की तपती धरती से निकला यह युवा आज भारतीय क्रिकेट का नया सितारा बन चुका है और उसकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।

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