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विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘आपदा से संपदा’ की अनूठी पहल : प्लास्टिक कचरे से बनेगी विकास की नई राह : जोरहाट में अत्याधुनिक प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई का शुभारंभ, अब प्लास्टिक से तैयार होंगे सड़क निर्माण के ब्लॉक

जिला आयुक्त जय शिवानी ने कहा— “कचरा नहीं, संसाधन है प्लास्टिक”

जोरहाट, 5 जून :

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर असम के जोरहाट जिले में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल की गई। तिताबर विकास खंड अंतर्गत 65 नंबर बाघचुंग ग्राम पंचायत के पुराने बाघचुंग विकास खंड परिसर में शुक्रवार को एक अत्याधुनिक प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (Plastic Waste Management Unit) का विधिवत उद्घाटन किया गया। यह परियोजना न केवल प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने का प्रभावी माध्यम बनेगी, बल्कि कचरे को संसाधन में बदलने की दिशा में भी एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगी।

इस आधुनिक इकाई का उद्घाटन जोरहाट जिला परिषद के अध्यक्ष सुरजीत सैकिया ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

प्लास्टिक कचरे से तैयार होंगे सड़क निर्माण के ब्लॉक

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि घरों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, नालों और अन्य स्थानों पर फेंके जाने वाले प्लास्टिक कचरे को अब वैज्ञानिक पद्धति से संसाधित किया जाएगा। प्रसंस्करण के बाद इस प्लास्टिक का उपयोग सड़क निर्माण में प्रयुक्त उच्च गुणवत्ता वाले इंटरलॉकिंग ब्लॉक, पेवर ब्लॉक तथा बिटुमिन मिश्रण तैयार करने में किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक मिश्रित सड़क निर्माण सामग्री पारंपरिक सामग्री की तुलना में अधिक टिकाऊ, मजबूत और जलरोधी होती है। इससे सड़क निर्माण की लागत में भी कमी आएगी तथा प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण का स्थायी समाधान भी मिलेगा।

PHED और तिताबर विकास खंड का संयुक्त प्रयास

यह महत्वाकांक्षी परियोजना जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) तथा तिताबर विकास खंड के संयुक्त प्रयास से स्थापित की गई है। इस पहल को मूर्त रूप देने में तिताबर विकास खंड अधिकारी शिखामनी गोगोई तथा सेंट्रल जोरहाट विकास खंड अधिकारी जन राजबंशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

परियोजना के अंतर्गत प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, पृथक्करण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की पूरी व्यवस्था विकसित की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

“प्लास्टिक को समस्या नहीं, संसाधन के रूप में देखने की जरूरत” — जय शिवानी

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जोरहाट के जिला आयुक्त जय शिवानी ने कहा कि वर्तमान समय में प्लास्टिक प्रदूषण विश्व की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। यदि इसका उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम प्लास्टिक को केवल कचरे के रूप में न देखें, बल्कि एक संभावित संसाधन के रूप में पहचानें। प्लास्टिक का वैज्ञानिक पुनर्चक्रण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास का भी माध्यम बन सकता है। यह इकाई ‘वेस्ट टू वेल्थ’ यानी ‘आपदा से संपदा’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

जिला आयुक्त ने आगे कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने लोगों से अपने घरों में कचरे का पृथक्करण करने, सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद अध्यक्ष सुरजीत सैकिया ने कहा कि यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की संभावनाएं भी उत्पन्न करेगी।

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरे को विकास कार्यों में उपयोग करना समय की मांग है और यह परियोजना आने वाले वर्षों में पूरे जिले के लिए एक मॉडल परियोजना सिद्ध होगी।

कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सहायक जिला आयुक्त बिपांची दत्ता, तिताबर आंचलिक पंचायत के अध्यक्ष मंदीप तुंगखुंगिया, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार बरुआ, PHED के कार्यकारी अभियंता मधुरज्य बोरा, सहायक कार्यकारी अभियंता मार्लिना गोवाला सहित अनेक विभागीय अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते खतरे के बीच इस प्रकार की परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

‘आपदा से संपदा’ का जीवंत उदाहरण बनेगी यह इकाई

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्लास्टिक कचरे के संग्रह और पुनर्चक्रण की यह प्रणाली सफल होती है तो इसे जिले के अन्य विकास खंडों और पंचायतों में भी लागू किया जा सकता है।

यह परियोजना न केवल प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी, बल्कि स्वच्छता अभियान, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) तथा हरित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।

विश्व पर्यावरण दिवस पर शुरू की गई यह पहल इस संदेश को भी मजबूत करती है कि यदि वैज्ञानिक सोच और सामुदायिक सहभागिता को साथ लेकर चला जाए तो कचरा भी विकास और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन सकता है। जोरहाट की यह परियोजना भविष्य में पूरे असम के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर सकती है।

रिपोर्ट : जितेन्द्र सोमानी, जोरहाट

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