सिलचर में पहली बार आर्यिका संघ के सानिध्य में दसलक्षण महापर्व की भव्य आराधना : श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में दस दिनों तक गूंजे धर्म, तप और साधना के स्वर : 36 दिनों की कठिन तपस्या से लेकर 32, 16 और 10 उपवास तक—तपस्वियों ने पेश किया संयम का अनुपम उदाहरण
सोलह कारण व दसलक्षण महामंडल विधान के साथ प्रवचन, तत्त्वार्थसूत्र कक्षाएं और धार्मिक प्रतियोगिताएं आयोजित

सिलचर, 6 अक्टूबर : श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जी, मेहरपुर, सिलचर में जैन धर्म के महान आध्यात्मिक पर्व श्री दसलक्षण महापर्व की आराधना इस वर्ष विशेष श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। सिलचर के इतिहास में पहली बार आर्यिका रत्न श्री 105 गरिमा मती माता जी एवं आर्यिका रत्न श्री 105 गंभीर मती माता जी ससंघ के मंगलमय सानिध्य एवं निर्देशन में 16 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक दस दिवसीय धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।

सोलह कारण व दसलक्षण महामंडल विधान का भव्य आयोजन
आर्यिका संघ के पावन सानिध्य में श्री सोलह कारण महामंडल विधान एवं श्री दसलक्षण महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। दस दिनों तक मंदिर परिसर धर्ममय वातावरण से सराबोर रहा। सिलचर जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने बड़ी संख्या में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर धर्मलाभ और पुण्य लाभ अर्जित किया।
36 दिनों की कठिन तपस्या बनी विशेष आकर्षण
दसलक्षण महापर्व के दौरान तप और संयम की अनुपम साधना भी देखने को मिली। माता जी के आशीर्वाद से सिलचर नगर की गौरव एवं सप्तम प्रतिमाधारी ब्र. मुन्नी बाई जी ने लगातार 36 दिनों की कठिन तपस्या कर धर्म साधना का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
इसी प्रकार श्रीमती बबीता जी विनायक्या ने सोलह कारण के अंतर्गत 32 दिनों की कठोर तपस्या की। वहीं श्री राजकुमार जी बाकलीवाल के सुपुत्र श्री पंकज जी की धर्मपत्नी श्रीमती नीलम जी बाकलीवाल ने सोलह कारण के 16 उपवास पूर्ण कर अपनी श्रद्धा एवं तप साधना का परिचय दिया।

पांच श्रद्धालुओं ने किए दसलक्षण के 10 उपवास
महापर्व के दौरान श्रीमती कविता जी गंगवाल, श्री नरेश कुमार जी बज, श्रीमती मंजू देवी जी बगड़ा, कु. नम्रता सेठी एवं कु. यशस्वी छाबड़ा ने दसलक्षण महापर्व के 10 उपवास पूर्ण किए। इन सभी तपस्वियों की कठिन साधना ने पूरे जैन समाज को धर्म, संयम और आत्मशुद्धि की दिशा में प्रेरित किया।
तपस्वियों का जैन समाज ने किया सम्मान
तप साधना पूर्ण करने वाले सभी तपस्वियों का सिलचर दिगम्बर जैन समाज कमेटी की ओर से सम्मान किया गया। कमेटी के अध्यक्ष श्री पवन कुमार जी पांड्या, मंत्री श्री दिलीप कुमार जी विनायक्या, संयोजक श्री मनोज जी पाटनी एवं श्री आकाश जी गंगवाल, महिला मंडल तथा समस्त सिलचर जैन समाज ने तपस्वियों की कठिन तप साधना की हृदय से अनुमोदना करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया और पुण्य लाभ अर्जित किया।

सोलह भावनाओं और दस धर्मों पर प्रतिदिन प्रवचन
दस दिवसीय महापर्व के दौरान आर्यिका संघ द्वारा प्रतिदिन सोलह भावनाओं एवं दस धर्मों पर प्रेरणादायी प्रवचन दिए गए। इसके साथ ही जैन दर्शन और सिद्धांतों की गहन समझ विकसित करने के उद्देश्य से तत्त्वार्थसूत्र की नियमित कक्षाएं भी आयोजित की गईं।
धार्मिक ज्ञान को रोचक और प्रेरक बनाने के उद्देश्य से अनेक धार्मिक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिनमें समाज के बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं अन्य श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
श्रद्धा-भक्ति के साथ समाज ने की धर्म प्रभावना
पूरे दस दिनों तक श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जी में श्रद्धा, भक्ति, तप, त्याग और संयम का विशेष वातावरण बना रहा। सिलचर के श्रावक-श्राविकाओं ने सभी धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया और धर्म प्रभावना करते हुए पुण्य लाभ प्राप्त किया।
आर्यिका रत्न श्री 105 गरिमा मती माता जी एवं गंभीर मती माता जी ससंघ के मंगल सानिध्य में संपन्न यह आयोजन सिलचर जैन समाज के लिए विशेष और ऐतिहासिक अवसर बन गया। दसलक्षण महापर्व के माध्यम से उत्तम क्षमा से लेकर उत्तम ब्रह्मचर्य तक दस धर्मों के संदेश के साथ तप, त्याग, संयम और आत्मकल्याण की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।




