बंगाईगांव में पहली बार निकली 51 मीटर लंबी भव्य चुनरी शोभायात्रा : माँ बागेश्वरी के जयकारों से गूंज उठा पूरा शहर : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम—सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में की सहभागिता : पगलास्थान के प्राचीन शिव मंदिर से माँ बागेश्वरी मंदिर तक निकली भव्य शोभायात्रा
मुख्य यजमान विमल शर्मा एवं स्वाति शर्मा ने विधि-विधान से किया शुभारंभ : माता की भव्य झांकी और इस्कॉन भक्तों के भजनों ने मोहा मन : माँ बागेश्वरी को अर्पित की गई 51 मीटर लंबी पवित्र चुनरी : विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती के बाद 31 भक्तों को प्रसाद स्वरूप वितरित की गई चुनरी

बंगाईगांव, 12 अक्टूबर : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर असम के बंगाईगांव शहर में रविवार, 11 अक्टूबर को श्रद्धा, भक्ति, आस्था और सनातन संस्कृति का एक ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने पूरे शहर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। माँ बागेश्वरी की असीम कृपा और देश के 51 शक्तिपीठों की प्रेरणा से बंगाईगांव के इतिहास में पहली बार 51 मीटर लंबी चुनरी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और माता के भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी अटूट आस्था और श्रद्धा का परिचय दिया।
माँ के जयकारों, भक्तिमय भजनों, पारंपरिक वेशभूषा और माता रानी की मनमोहक झांकी के साथ निकली इस विशाल शोभायात्रा ने बंगाईगांव की सड़कों पर धार्मिक उत्सव का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं का उत्साह और आयोजन की भव्यता देखते ही बन रही थी।

पगलास्थान के प्राचीन शिव मंदिर से हुआ ऐतिहासिक चुनरी शोभायात्रा का शुभारंभ
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, रविवार दोपहर बंगाईगांव के पगलास्थान स्थित प्राचीन शिव मंदिर से 51 मीटर लंबी चुनरी शोभायात्रा का विधिवत शुभारंभ हुआ। आयोजन के मुख्य यजमान विमल शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी स्वाति शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा इस ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा का श्रीगणेश किया।
पूजा-अर्चना के पश्चात श्रद्धालुओं ने माँ बागेश्वरी के जयकारों के बीच पवित्र चुनरी को लेकर शोभायात्रा प्रारंभ की। भक्तों के हाथों में सजी 51 मीटर लंबी चुनरी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक बनकर आकर्षण का केंद्र रही।
पगलास्थान के प्राचीन शिव मंदिर से प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा मायापुरी सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए प्रसिद्ध माँ बागेश्वरी मंदिर पहुँची। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर माता के जयकारों और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही।
माता के जयकारों और भजनों से भक्तिमय हुआ बंगाईगांव
शोभायात्रा के दौरान पूरा वातावरण माँ दुर्गा और माँ बागेश्वरी की भक्ति में रंगा नजर आया। श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धाभाव के साथ माता के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
“चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है!” जैसे लोकप्रिय भक्ति गीतों ने श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह का संचार किया। भजनों की मधुर स्वर लहरियों और माता के जयघोष ने शहर के प्रमुख मार्गों को मानो एक विशाल धार्मिक उत्सव स्थल में परिवर्तित कर दिया।
शोभायात्रा में विशेष रूप से सजाए गए रथ पर माता रानी की भव्य झांकी विराजमान थी। रथ पर सुसज्जित माता का मनोहारी स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। वहीं, इस्कॉन मंदिर से जुड़े भक्तगण भी शोभायात्रा में सम्मिलित हुए और अपने भक्तिमय भजनों के माध्यम से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया।
माता रानी की झांकी, भक्तों के जयकारे और संगीतमय भजन-कीर्तन ने पूरे आयोजन को विशेष धार्मिक गरिमा प्रदान की।

लाल-पीली चुनरियों में मातृशक्ति और सफेद परिधानों में पुरुष श्रद्धालु बने आकर्षण का केंद्र
इस ऐतिहासिक चुनरी शोभायात्रा की एक प्रमुख विशेषता इसमें शामिल श्रद्धालुओं की अनुशासित सहभागिता और आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा रही।
बड़ी संख्या में महिलाओं ने लाल और पीले रंग की पारंपरिक साड़ियों, चुनरियों तथा अन्य परिधानों में सुसज्जित होकर शोभायात्रा में भाग लिया। माता के प्रति उनकी आस्था, उत्साह और सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को विशेष भव्यता प्रदान की।
वहीं, पुरुष श्रद्धालुओं ने पूर्णतः श्वेत वस्त्र धारण कर इस धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता दर्ज कराई। महिलाओं के लाल-पीले परिधानों और पुरुषों के श्वेत वस्त्रों का सुंदर संगम बंगाईगांव की सड़कों पर एक अत्यंत आकर्षक और मनोहारी दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने अनुशासन, धार्मिक मर्यादा और सामूहिक एकजुटता का परिचय दिया। विशेष रूप से मातृशक्ति की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा और भव्यता को नई ऊँचाई प्रदान की।
माँ बागेश्वरी के चरणों में अर्पित की गई 51 मीटर लंबी पवित्र चुनरी
नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जब विशाल चुनरी शोभायात्रा माँ बागेश्वरी मंदिर पहुँची, तो श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भावविभोर कर देने वाला भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ 51 मीटर लंबी पवित्र चुनरी माँ बागेश्वरी को अर्पित की गई। इसके पश्चात माता का भव्य श्रृंगार किया गया।
माँ बाघेश्वरी के इस विशेष श्रृंगार के उपरांत मंदिर परिसर में सामूहिक विशेष आरती का आयोजन किया गया। आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माता की आराधना की और अपने परिवार तथा समाज की सुख-समृद्धि, शांति एवं मंगलकामना के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। माता के जयकारों और आरती की मंगलध्वनि से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।

31 विशेष भक्तों को प्रसाद स्वरूप वितरित की गई पवित्र चुनरी
इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन की एक और विशेषता माँ बागेश्वरी को अर्पित की गई पवित्र चुनरी का प्रसाद स्वरूप वितरण रहा। आयोजकों द्वारा पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार, माता को अर्पित की गई 51 मीटर लंबी चुनरी को बाद में 31 विशेष भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में सालासर भक्त मंडल द्वारा भव्य भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। मंडल के भक्तों ने माता रानी की महिमा का गुणगान करते हुए भजनों की ऐसी अमृतवर्षा की कि उपस्थित श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर हो उठे। भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के पश्चात सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया।
मनोज सिंघी, महेश अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग
बंगाईगांव में पहली बार आयोजित इस ऐतिहासिक 51 मीटर चुनरी शोभायात्रा को सफल बनाने में अनेक समाजसेवियों, धर्मप्रेमियों और धार्मिक संगठनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में मनोज सिंघी, महेश कुमार अग्रवाल, सुनील सिंघी, महेश सेन, पंडित विष्णु प्रसाद उपाध्याय तथा जय माता दी महिला मंडल के सदस्यों ने विशेष सक्रिय भूमिका निभाई।
इसके अतिरिक्त स्थानीय समाज के विभिन्न वर्गों, महिला श्रद्धालुओं, युवाओं और धर्मप्रेमी नागरिकों ने भी आयोजन में उत्साहपूर्वक सहयोग प्रदान किया। आयोजन की व्यवस्थाओं से लेकर शोभायात्रा के संचालन, पूजा-अर्चना, माता के श्रृंगार, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण तक सभी गतिविधियों में श्रद्धालुओं की सामूहिक सहभागिता देखने को मिली।

51 शक्तिपीठों की प्रेरणा से सनातन संस्कृति और सामूहिक आस्था का संदेश
उल्लेखनीय है कि बंगाईगांव में इस प्रकार की 51 मीटर लंबी चुनरी शोभायात्रा का आयोजन पहली बार किया गया। आयोजकों ने इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान को देश के 51 शक्तिपीठों की प्रेरणा और माँ बागेश्वरी की कृपा से जोड़ते हुए सामूहिक आस्था एवं भक्ति का संदेश दिया।
आयोजन का मूल भाव “करने वाली माँ, कराने वाली माँ” रहा। इसी भावना के साथ श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम की सफलता का संपूर्ण श्रेय माता रानी की कृपा और आशीर्वाद को समर्पित किया।
आयोजकों के अनुसार, यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, मातृशक्ति के सम्मान, सामाजिक एकता और सामूहिक भक्ति का प्रतीक भी रही।
इस आयोजन ने यह भी प्रदर्शित किया कि बंगाईगांव के नागरिकों में अपनी धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक धार्मिक अनुष्ठानों के प्रति गहरी श्रद्धा एवं समर्पण की भावना विद्यमान है।

मुख्य यजमान स्वाति शर्मा ने जताया सभी श्रद्धालुओं का आभार
शोभायात्रा और धार्मिक कार्यक्रमों के सफल समापन के अवसर पर मुख्य यजमान स्वाति शर्मा ने आयोजन को ऐतिहासिक सफलता प्रदान करने वाले सभी श्रद्धालुओं, मातृशक्ति, युवाओं, समाजसेवियों, धार्मिक संगठनों और सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
उन्होंने आयोजन में सहभागी बने सभी भक्तों के उत्साह, समर्पण और सहयोग की सराहना करते हुए इसे माँ बागेश्वरी की असीम कृपा का परिणाम बताया।
इस अवसर पर आयोजकों ने भी सभी सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और सामूहिक धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में एकता, सद्भावना और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की भावना को महत्वपूर्ण बताया।

बंगाईगांव के धार्मिक इतिहास में जुड़ा आस्था का नया अध्याय
शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित इस पहली 51 मीटर लंबी चुनरी शोभायात्रा ने बंगाईगांव के धार्मिक एवं सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
माँ बागेश्वरी के प्रति अटूट श्रद्धा, 51 शक्तिपीठों की प्रेरणा, मातृशक्ति की उल्लेखनीय सहभागिता, माता रानी की भव्य झांकी, इस्कॉन भक्तों के संकीर्तन और सालासर भक्त मंडल की भजन प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
पगलास्थान के प्राचीन शिव मंदिर से माँ बागेश्वरी मंदिर तक निकली यह भव्य यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का अनुपम उदाहरण बनी, बल्कि सामूहिक एकता, अनुशासन, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का भी सशक्त संदेश देकर संपन्न हुई।
माँ के जयकारों के बीच संपन्न हुआ यह ऐतिहासिक आयोजन बंगाईगांव के श्रद्धालुओं के लिए शारदीय नवरात्र की एक अविस्मरणीय स्मृति बन गया।




