शिवसागर में 16 अक्टूबर से श्री श्री नवयुवक दुर्गोत्सव समिति का 66वां दुर्गोत्सव : भक्ति, संस्कृति, संस्कार और सामाजिक एकता का होगा अनूठा संगम : प्रलयंकारी बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए इस वर्ष सादगीपूर्ण आयोजन : धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और नई पीढ़ी को सनातन संस्कारों से जोड़ने पर विशेष जोर : मातृशक्ति और युवाओं की सक्रिय सहभागिता से सजेगा छह दिवसीय दुर्गोत्सव
महाषष्ठी पर सामूहिक शंखनाद, बच्चों का मंत्रोच्चार, धार्मिक नृत्य और वरिष्ठजनों एवं मातृशक्ति का नागरिक अभिनंदन : महासप्तमी पर आकर्षक डांडिया प्रस्तुतियां, महाअष्टमी पर संगीतमय महाआरती और महानवमी पर सामूहिक कन्या पूजन : विजया दशमी पर सिंदूर खेला एवं धूपिया आरती का विशेष आयोजन

थाना रोड स्थित आशीर्वाद भवन में 16 से 21 अक्टूबर तक धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला : अध्यक्ष अधिवक्ता विष्णु शर्मा एवं सचिव सुशील अग्रवाल ने श्रद्धालुओं से की सपरिवार सहभागिता की अपील
शिवसागर, 14 अक्टूबर : धार्मिक आस्था, सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण के प्रति समर्पित श्री श्री नवयुवक दुर्गोत्सव समिति, शिवसागर द्वारा इस वर्ष अपना 66वां श्री श्री दुर्गोत्सव विशेष श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा। शिवसागर नगर के थाना रोड स्थित आशीर्वाद भवन में आगामी 16 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले छह दिवसीय दुर्गोत्सव में इस बार बच्चों, युवाओं और मातृशक्ति की सक्रिय सहभागिता को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
हालांकि इस वर्ष शिवसागर सहित ऊपरी असम में आई प्रलयंकारी बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समिति ने आयोजन को अत्यंत सादगीपूर्ण, सीमित एवं संयमित स्वरूप में संपन्न करने का निर्णय लिया है। इसके बावजूद धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की निरंतरता बनाए रखते हुए विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं संस्कारपरक कार्यक्रमों की विशेष रूपरेखा तैयार की गई है।
वर्ष 1961 में स्थापित श्री श्री नवयुवक दुर्गोत्सव समिति अपनी छह दशक से अधिक पुरानी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ‘स्वर्ण जयंती से हीरक जयंती की ओर’ की भावना के साथ निरंतर अग्रसर है। समिति का प्रयास है कि दुर्गोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहकर नई पीढ़ी में सनातन संस्कारों के संवर्धन, महिलाओं की नेतृत्व क्षमता के विकास, वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान तथा समाज में आपसी सहयोग एवं एकता को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम बने।

महाषष्ठी पर सामूहिक शंखनाद से होगा मां दुर्गा के पट का अनावरण—बच्चों की धार्मिक प्रस्तुतियां रहेंगी विशेष आकर्षण
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को महाषष्ठी के पावन अवसर पर सायं 6:30 बजे महिलाओं द्वारा सामूहिक शंखनाद के साथ मां दुर्गा के पट का विधिवत अनावरण किया जाएगा। शंखध्वनि, देवी आराधना और भक्तिमय वातावरण के बीच छह दिवसीय दुर्गोत्सव के विशेष कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा।
इसके पश्चात बच्चों द्वारा सामूहिक मंत्रोच्चार एवं स्तोत्र पाठ प्रस्तुत किया जाएगा। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य बाल्यावस्था से ही बच्चों को धार्मिक संस्कारों, वैदिक मंत्रों और सनातन परंपराओं से परिचित कराना है।
इसी अवसर पर सामूहिक धार्मिक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भक्ति संगीत एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा प्रकट की जाएगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने तथा सार्वजनिक मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

वरिष्ठ समाजबंधुओं एवं वरिष्ठ मातृशक्ति का होगा सार्वजनिक नागरिक अभिनंदन—नई पीढ़ी को मिलेगा प्रेरणादायक संदेश
महाषष्ठी के विशेष कार्यक्रमों के अंतर्गत समिति अपनी पूर्व स्थापित गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज के प्रबुद्ध एवं वरिष्ठ समाजबंधुओं तथा वरिष्ठ मातृशक्ति का सार्वजनिक नागरिक अभिनंदन भी करेगी।
इस अभिनंदन समारोह के माध्यम से उन वरिष्ठजनों के प्रति आदर एवं कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी, जिन्होंने अपने जीवन में धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के संरक्षण एवं विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
समिति का मानना है कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसके वरिष्ठजनों के अनुभव, मार्गदर्शन और जीवन मूल्यों में निहित होती है। वरिष्ठ पीढ़ी के त्याग, समर्पण और समाजसेवा को सार्वजनिक सम्मान प्रदान करना न केवल उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश भी देता है।
इस विशेष अभिनंदन समारोह के माध्यम से पीढ़ियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव, पारिवारिक संस्कारों के संरक्षण तथा सामाजिक एकता को और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया जाएगा।

महासप्तमी पर माता रानी के दरबार में सजेगा डांडिया का रंग—बच्चों, युवतियों और महिलाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां
शनिवार, 17 अक्टूबर को महासप्तमी के अवसर पर सायं 6:15 बजे से माता रानी के पावन दरबार में सामूहिक डांडिया प्रस्तुतियों का विशेष आयोजन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में बच्चों, युवतियों एवं महिलाओं के चयनित समूह पारंपरिक परिधानों में भक्तिमय संगीत की धुनों पर आकर्षक डांडिया प्रस्तुतियां देंगे।
भारतीय लोकसंस्कृति, धार्मिक उत्साह और सामूहिक सहभागिता के सुंदर समन्वय के रूप में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम मातृशक्ति और युवा पीढ़ी की सांस्कृतिक प्रतिभा को प्रोत्साहित करेगा।
समिति का उद्देश्य डांडिया जैसे पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की विविधता, सामूहिक उत्सव की भावना और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना है।

महाअष्टमी पर पारंपरिक वेशभूषा में होगी सामूहिक संगीतमय महाआरती—दीपों की ज्योति से आलोकित होगा मां दुर्गा का दरबार
सोमवार, 19 अक्टूबर को महाअष्टमी के पावन अवसर पर सायं 7 बजे सामूहिक संगीतमय महाआरती का विशेष आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर श्रद्धालु महिलाएं पारंपरिक भारतीय परिधानों में सुसज्जित होकर मंगल आरती की थालियों में दीप प्रज्वलित करेंगी तथा भक्तिमय संगीत एवं आरती के साथ मां दुर्गा की सामूहिक आराधना करेंगी।
दीपों की पवित्र ज्योति, आरती के मधुर स्वर और श्रद्धालुओं की सामूहिक उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्तिभाव से परिपूर्ण होगा।
इस आयोजन के माध्यम से सनातन धर्म की पारंपरिक पूजा पद्धतियों के संरक्षण, सामूहिक उपासना की भावना और मातृशक्ति की धार्मिक सहभागिता को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा।

महानवमी पर सामूहिक कन्या पूजन—नारीशक्ति के सम्मान और सनातन संस्कारों का दिया जाएगा संदेश
मंगलवार, 20 अक्टूबर को महानवमी के पावन अवसर पर प्रातः 11 बजे सामूहिक कन्या पूजन का आयोजन किया जाएगा।
सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं के अनुरूप कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका विधिवत पूजन, सम्मान एवं सत्कार किया जाएगा।
कन्या पूजन का यह आयोजन नारीशक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और भारतीय संस्कृति में कन्याओं के विशिष्ट स्थान को रेखांकित करेगा।
समिति का मानना है कि कन्या पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में नारी के सम्मान, गरिमा और उसके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संदेश भी है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों और युवाओं को मातृशक्ति के प्रति आदर तथा भारतीय धार्मिक परंपराओं में निहित जीवन मूल्यों से परिचित कराया जाएगा।
विजया दशमी पर सामूहिक सिंदूर खेला और धूपिया आरती—पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होगा दुर्गोत्सव का समापन
बुधवार, 21 अक्टूबर को विजया दशमी के पावन अवसर पर पारंपरिक सामूहिक सिंदूर खेला एवं धूपिया आरती का विशेष आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य, पारिवारिक सुख-समृद्धि, मंगल एवं कल्याण की कामना के साथ पारंपरिक सिंदूर खेला में भाग लेंगी।
इसके साथ ही धूपिया आरती की भक्तिमय प्रस्तुति के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण व्यक्त किया जाएगा।
इन पारंपरिक अनुष्ठानों के माध्यम से धार्मिक आस्था, नारीशक्ति के सम्मान, पारिवारिक मंगलकामना और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया जाएगा।
विजया दशमी के इन विशेष आयोजनों के साथ छह दिवसीय दुर्गोत्सव का समापन भक्तिमय एवं पारंपरिक वातावरण में होगा।
मातृशक्ति को सौंपी गई विभिन्न आयोजनों की जिम्मेदारी—महिला नेतृत्व और संगठनात्मक सक्रियता को मिलेगा प्रोत्साहन
इस वर्ष के दुर्गोत्सव की एक महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संचालन में मातृशक्ति की सक्रिय एवं नेतृत्वकारी भूमिका रहेगी।
समिति द्वारा सामूहिक शंखनाद, बच्चों के मंत्रोच्चार एवं स्तोत्र पाठ, धार्मिक नृत्य, डांडिया प्रस्तुतियों, संगीतमय महाआरती, कन्या पूजन, सिंदूर खेला और धूपिया आरती जैसे कार्यक्रमों की जिम्मेदारियां महिला संयोजिकाओं को सौंपी गई हैं।
सभी संयोजिकाएं अपने-अपने कार्यक्रमों को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटी हुई हैं।
इस पहल के माध्यम से महिलाओं को न केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर प्रदान किया जा रहा है, बल्कि उनकी संगठनात्मक क्षमता, नेतृत्व कौशल, सामूहिक निर्णय लेने की भावना और सामाजिक सक्रियता को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
समिति का विश्वास है कि किसी भी धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन की सफलता में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं की सक्रिय सहभागिता से जहां पारंपरिक आयोजनों को नई ऊर्जा मिलती है, वहीं बच्चों और युवाओं को भी संस्कार एवं संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
बाढ़ की विभीषिका के बीच सादगीपूर्ण आयोजन—भव्यता के बजाय श्रद्धा, संस्कार और सामाजिक संवेदनशीलता को प्राथमिकता
इस वर्ष ऊपरी असम एवं शिवसागर जिले में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़ी संख्या में परिवारों को प्रभावित किया है। बाढ़ से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों और प्रभावित परिवारों की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए समिति ने दुर्गोत्सव को अत्यंत सीमित एवं सादगीपूर्ण स्वरूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है।
समिति ने बाहरी भव्यता के स्थान पर धार्मिक अनुष्ठानों की पवित्रता, पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण और समाज की सामूहिक सहभागिता को प्राथमिकता दी है।
इसी भावना के अनुरूप आयोजन की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि अनावश्यक तामझाम से बचते हुए बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।
समिति का यह प्रयास धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता, परिस्थितियों के प्रति जिम्मेदारी और सामुदायिक एकजुटता का संदेश भी प्रस्तुत करता है।
छह दशकों से अधिक की गौरवशाली यात्रा—नई पीढ़ी तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत पहुंचाने का संकल्प
वर्ष 1961 से निरंतर धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ा रही श्री श्री नवयुवक दुर्गोत्सव समिति शिवसागर के सामाजिक एवं धार्मिक जीवन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
समिति का उद्देश्य दुर्गोत्सव के माध्यम से केवल मां दुर्गा की आराधना करना ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा सांस्कृतिक मंच पर एकत्रित करना भी है।
इस वर्ष विशेष रूप से बच्चों में धार्मिक संस्कार, युवाओं में सांस्कृतिक चेतना, महिलाओं में नेतृत्व क्षमता और वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया है।
समिति का मानना है कि धार्मिक उत्सवों की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनके माध्यम से समाज में प्रेम, सहयोग, सेवा, सम्मान और पारस्परिक सद्भाव की भावना सुदृढ़ हो।
अध्यक्ष विष्णु शर्मा एवं सचिव सुशील अग्रवाल ने किया सपरिवार सहभागिता का आह्वान
श्री श्री नवयुवक दुर्गोत्सव समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता विष्णु शर्मा एवं सचिव सुशील अग्रवाल ने शिवसागर सहित आसपास के क्षेत्रों के समस्त श्रद्धालुओं, समाजबंधुओं, मातृशक्ति, युवाओं, बच्चों एवं वरिष्ठजनों को छह दिवसीय श्री श्री दुर्गोत्सव में सपरिवार सम्मिलित होने का सादर आमंत्रण दिया है।
दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि इस वर्ष बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए आयोजन का स्वरूप भले ही सीमित रखा गया है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा, धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक एकता की भावना में कोई कमी नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि समिति का विशेष प्रयास है कि दुर्गोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा जाए तथा महिलाओं और वरिष्ठजनों की सहभागिता को सम्मानजनक स्थान प्रदान किया जाए।
अध्यक्ष एवं सचिव ने आयोजन की तैयारियों में जुटी सभी महिला संयोजिकाओं, समिति के सदस्यों, युवा कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक सहयोग से 66वां श्री श्री दुर्गोत्सव श्रद्धा, संस्कार, संस्कृति, सम्मान और सामाजिक एकता का प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।
उन्होंने समस्त श्रद्धालुओं से निर्धारित कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक सहभागिता करने, मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने तथा आयोजन को सफल बनाने की अपील की।
समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि सादगीपूर्ण आयोजन के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था, मातृशक्ति की सक्रियता, युवाओं का उत्साह और वरिष्ठजनों का आशीर्वाद इस वर्ष के 66वें दुर्गोत्सव को विशेष एवं स्मरणीय बनाएगा।




