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यशोदा एआई के माध्यम से महिलाओं को तकनीक से जोड़ने की पहल : राष्ट्रीय महिला आयोग एवं असम राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में शिवसागर में आयोजित हुआ विशेष जागरूकता कार्यक्रम : महिला सशक्तिकरण, डिजिटल साक्षरता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अवसरों पर हुआ व्यापक संवाद

डिजिटल युग में तकनीकी रूप से सक्षम होना महिलाओं के लिए समय की मांग – अंगूरलता डेका

शिवसागर, 18 जून : महिलाओं को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) से जोड़ने तथा उन्हें डिजिटल युग की नई संभावनाओं के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के सभागार में “यशोदा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Yashoda AI)” विषयक एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) एवं असम राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्राओं, शिक्षकों तथा विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और युवतियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों के बारे में जानकारी प्रदान करना तथा उन्हें डिजिटल विकास और नवाचार की मुख्यधारा से जोड़ना था।

महिलाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर दिया गया विशेष जोर

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि असम राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अंगूरलता डेका ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दौर डिजिटल क्रांति का दौर है और ऐसे समय में महिलाओं का तकनीकी रूप से सक्षम होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तकनीक केवल रोजगार और शिक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के आत्मनिर्भर और सशक्त बनने का एक महत्वपूर्ण उपकरण भी है।

उन्होंने आयोग द्वारा महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, कानूनी सहायता, परामर्श सेवाओं तथा महिला कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि समाज में महिलाओं की सक्रिय और सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है।

यशोदा एआई पहल: महिलाओं के लिए तकनीक को सरल बनाने का प्रयास

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि “यशोदा एआई” पहल का उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराना तथा उन्हें यह समझाना है कि एआई तकनीक भविष्य के रोजगार, शिक्षा, उद्यमिता, स्वास्थ्य, प्रशासन और शोध जैसे क्षेत्रों में किस प्रकार नई संभावनाएं पैदा कर रही है।

विशेषज्ञों ने कहा कि एआई केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामान्य नागरिकों, विद्यार्थियों और महिलाओं के लिए भी अनेक अवसर लेकर आया है। यदि समय रहते महिलाएं इन तकनीकों को अपनाती हैं तो वे डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

प्राचार्य डॉ. प्रतीम शर्मा ने किया स्वागत

कार्यक्रम का शुभारंभ शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रतीम शर्मा के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की सबसे प्रभावशाली और परिवर्तनकारी तकनीकों में से एक है।

उन्होंने कहा कि आज की छात्राओं को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें एआई, डेटा साइंस, डिजिटल नवाचार और उभरती तकनीकों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें।

महिला आयोग की वरिष्ठ पदाधिकारी रहीं उपस्थित

कार्यक्रम में असम राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष वर्णाली सैकिया बोरा, आयोग की सदस्य विनीता सैकिया डे एवं कविता सैकिया रॉय, तथा सदस्या सचिव अंतरा गोगोई सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं ग्राफिक्स डिजाइनर यीशु नीलकमल बोरा भी मौजूद रहे।

सभी अतिथियों ने छात्राओं को डिजिटल साक्षरता, तकनीकी नवाचार, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति के बिना समावेशी और विकसित समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।

सैयद मोहसिन रज़ा ने एआई की संभावनाओं पर डाली रोशनी

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं रिसोर्स पर्सन के रूप में डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ एवं परामर्शदाता तथा शिक्षक सैयद मोहसिन रज़ा ने “यशोदा एआई” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अवधारणा, उसके वर्तमान उपयोग, भविष्य की संभावनाओं तथा समाज पर उसके प्रभावों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि एआई तकनीक आज शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, उद्योग, मीडिया और प्रशासन सहित लगभग हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने छात्राओं को एआई के सुरक्षित, नैतिक और सकारात्मक उपयोग के बारे में भी जानकारी दी तथा बताया कि यह तकनीक व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में कैसे सहायक हो सकती है।

रज़ा ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित कौशल रोजगार बाजार की सबसे बड़ी मांगों में शामिल होंगे, इसलिए विद्यार्थियों को अभी से इसके प्रति जागरूक होना चाहिए।

छात्राओं और शिक्षकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

कार्यक्रम में शिवसागर गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं के अलावा विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों की छात्राएं तथा शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर एआई से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे और नई तकनीकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम का संचालन शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के प्राणी विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. चित्रलेखा गोगोई ने किया।

डिजिटल भागीदारी और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है और ऐसे जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं को डिजिटल परिवर्तन की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम ने न केवल छात्राओं और शिक्षकों को एआई जैसी उभरती तकनीकों के प्रति जागरूक किया, बल्कि महिलाओं की डिजिटल भागीदारी, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार आधारित विकास के महत्व को भी रेखांकित किया।

तकनीक आधारित भविष्य को समझने का मिला अवसर

“यशोदा एआई” जागरूकता कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को तकनीक आधारित भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को समझने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि यदि महिलाओं को तकनीकी शिक्षा और डिजिटल संसाधनों तक समान पहुंच मिले, तो वे नवाचार, नेतृत्व और सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

यह कार्यक्रम महिलाओं को तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।

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