मोरानहाट में श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक एकता के संकल्प के साथ मनाई गई महाराजा अग्रसेन जयंती : मारवाड़ी सम्मेलन मोरानहाट शाखा के तत्वावधान में भव्य समारोह : महाराजा अग्रसेन के समाजवाद, अहिंसा और भाईचारे के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान : सत्यनारायण खाखोलिया और राधेश्याम पारीक ‘विशिष्ट अग्रसेन समाजबंधु’ तथा प्रेमलता तोदी ‘विशिष्ट अग्रसेन मातृशक्ति’ सम्मान से अलंकृत
‘एक रुपया, एक ईंट’ की प्रेरणादायी परंपरा आज भी प्रासंगिक—सामाजिक समरसता, परस्पर सहयोग और सेवा का दिया संदेश

मोरानहाट, 12 अक्टूबर : अग्रकुल शिरोमणि महाराजा अग्रसेन के समाजवाद, अहिंसा, समानता, भाईचारे और परस्पर सहयोग के महान आदर्शों को आत्मसात करने के संकल्प के साथ मारवाड़ी सम्मेलन की मोरानहाट शाखा के आतिथ्य में रविवार, 11 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन की 5152वीं जन्म जयंती श्रद्धा, विश्वास, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। मोरान स्थित श्री राधाकृष्ण विवाह भवन परिसर में संध्या 6:45 बजे से रात्रि 8:45 बजे तक आयोजित इस समारोह में समाज के वरिष्ठजनों, गणमान्य व्यक्तियों, मातृशक्ति एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
समारोह के दौरान महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को वर्तमान सामाजिक परिवेश में प्रासंगिक बताते हुए समाज में एकता, सहयोग, अहिंसा एवं सामूहिक विकास की भावना को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर समाज के तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों का विशेष अभिनंदन करने के साथ अनेक समाजबंधुओं को सम्मानित किया गया।

गरिमामय वातावरण में समारोह का शुभारंभ, वरिष्ठ समाजबंधु हुए मंचासीन
मारवाड़ी सम्मेलन की मोरानहाट शाखा के अध्यक्ष बिनोद अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में वरिष्ठ समाजबंधु सत्यनारायण बेड़िया, श्री राधाकृष्ण विवाह भवन समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष बिनोद भरतिया, प्रांतीय कार्यशाला संयोजक बिमल अग्रवाल, प्रांतीय संयुक्त मंत्री पवन मोर तथा शाखा सचिव छगनलाल माड़ोदिया को मंचासीन कर सम्मान प्रदान किया गया।
समारोह के प्रारंभ में शाखा सचिव छगनलाल माड़ोदिया ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए आयोजन के उद्देश्य एवं महाराजा अग्रसेन जयंती के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन की जयंती केवल एक धार्मिक अथवा पारंपरिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने, नई पीढ़ी को गौरवशाली विरासत से परिचित कराने और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
इसके पश्चात अध्यक्ष बिनोद अग्रवाल ने अपने संबोधन में महाराजा अग्रसेन के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक भाईचारे, समानता और जीवदया के लिए जो आदर्श स्थापित किए थे, वे आज भी मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने सभी समाजबंधुओं से महाराजा अग्रसेन द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर सामाजिक समरसता और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने का आग्रह किया।

दिवंगत समाजबंधुओं को श्रद्धांजलि, दीप प्रज्ज्वलन और सामूहिक आरती से भक्तिमय हुआ वातावरण
समारोह के दौरान शाखा के जनसंपर्क अधिकारी पवन मोर ने दिवंगत समाजबंधुओं की स्मृति में शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने खड़े होकर कुछ क्षणों का मौन धारण किया और दिवंगत आत्माओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके उपरांत महाराजा अग्रसेन के चित्रपट पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। सभी उपस्थित समाजबंधुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर महाराजा अग्रसेन के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त की।
इसके बाद सामूहिक रूप से महाराजा अग्रसेन की आरती का गायन किया गया। आरती के दौरान संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा।

‘एक रुपया, एक ईंट’ का सिद्धांत आज भी सामाजिक समरसता और सहयोग की मिसाल
समारोह के विचार-विमर्श सत्र में विभिन्न वक्ताओं ने महाराजा अग्रसेन के जीवन चरित्र, सामाजिक दर्शन और उनके द्वारा स्थापित आदर्शों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व महाराजा अग्रसेन द्वारा स्थापित सामाजिक सहयोग और समानता की परंपराएं आज के आधुनिक युग में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। विशेष रूप से उनका प्रसिद्ध ‘एक रुपया, एक ईंट’ का सिद्धांत समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहारा देने और सामूहिक विकास सुनिश्चित करने का अनुपम उदाहरण है।
वक्ताओं ने कहा कि महाराजा अग्रसेन ने जिस प्रकार पशुवध का विरोध करते हुए अहिंसा और जीवदया का संदेश दिया तथा समाजवाद और समानता की भावना को प्रोत्साहित किया, उन आदर्शों को वर्तमान समय में व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर पवन मोर, बिमल अग्रवाल, ओमप्रकाश गाड़ोदिया, सत्यनारायण बेड़िया तथा प्रभा अग्रवाल सहित विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महाराजा अग्रसेन के सिद्धांत केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक अनुसरण समाज के प्रत्येक परिवार और व्यक्ति के आचरण में दिखाई देना चाहिए।

तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों का नागरिक अभिनंदन—साफा, शाल, फुलाम गमछा और प्रशस्ति पत्र से सम्मान
समारोह का विशेष आकर्षण समाज के तीन प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के सम्मान में आयोजित नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम रहा। इस विशेष सम्मान समारोह का संचालन शाखा के जनसंपर्क अधिकारी पवन मोर ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजबंधु श्री सत्यनारायण खाखोलिया और श्री राधेश्याम पारीक को ‘विशिष्ट अग्रसेन समाजबंधु’ तथा श्रीमती प्रेमलता तोदी को ‘विशिष्ट अग्रसेन मातृशक्ति’ के विशेष अलंकरण से विभूषित किया गया।

तीनों सम्मानित व्यक्तित्वों के सामाजिक योगदान एवं समाज के प्रति समर्पण को सम्मान देते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। साथ ही पारंपरिक साफा पहनाकर, असमिया संस्कृति के प्रतीक फुलाम गमछा एवं शाल ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया गया।
सम्मान ग्रहण करने के लिए सत्यनारायण खाखोलिया अपनी धर्मपत्नी, पुत्र एवं पुत्रवधू के साथ समारोह में उपस्थित हुए। वहीं राधेश्याम पारीक ने स्वयं उपस्थित होकर सम्मान स्वीकार किया।
श्रीमती प्रेमलता तोदी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण मोरान से बाहर होने के चलते समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकीं। उनके प्रतिनिधि के रूप में उनकी पुत्रवधू श्रीमती कविता तोदी एवं भतीजावधू श्रीमती काजल तोदी ने सम्मान ग्रहण किया।
इस गरिमामय सम्मान समारोह के माध्यम से समाज के प्रति निष्ठा, सक्रिय सहभागिता और योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।

10 समाजबंधुओं का भी विशेष अभिनंदन—फुलाम गमछा पहनाकर दिया सम्मान
सम्मान समारोह की अगली कड़ी में समाज के विभिन्न व्यक्तित्वों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर श्रीमती गीता खाखोलिया, श्री प्रकाश खाखोलिया, श्रीमती रोशनी खाखोलिया, श्रीमती प्रभा अग्रवाल, श्री बिनोद भरतिया, श्री सत्यनारायण बेड़िया, श्री ओमप्रकाश गाड़ोदिया, श्री श्यामलाल मोर, श्री सुशील बेड़िया तथा श्री अरविंद गाड़ोदिया को पारंपरिक फुलाम गमछा पहनाकर सम्मानित किया गया।
इस अभिनंदन कार्यक्रम के माध्यम से समाज में सक्रिय सहभागिता, पारस्परिक सम्मान और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।

गुवाहाटी में निर्माणाधीन छात्रावास का मार्च 2027 तक लोकार्पण करने का लक्ष्य
समारोह के अन्यान्य विषयों पर चर्चा के दौरान पवन मोर ने प्रांतीय प्रतिनिधि के रूप में प्रांतीय संयुक्त मंत्री की ओर से गुवाहाटी में निर्माणाधीन महत्वाकांक्षी छात्रावास परियोजना की जानकारी प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य समाज के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक सहयोग को सुदृढ़ करना है।
उन्होंने जानकारी दी कि मार्च 2027 तक इस छात्रावास का लोकार्पण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आर्थिक एवं नैतिक सहयोग के साथ सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि छात्रावास जैसी परियोजनाएं समाज की भावी पीढ़ी के शैक्षणिक विकास और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए इस महत्वाकांक्षी पहल को सफल बनाना सभी समाजबंधुओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।

7 नवंबर को प्रस्तावित प्रांतीय भाग्यशाली दानपत्र परियोजना में भागीदारी का आह्वान
इसी क्रम में पवन मोर ने आगामी 7 नवंबर को प्रस्तावित प्रांतीय भाग्यशाली दानपत्र परियोजना के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना में मोरानहाट शाखा को बढ़-चढ़कर सहभागिता निभानी चाहिए, ताकि प्रांतीय संगठन के साथ-साथ स्थानीय शाखा की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया जा सके।
उन्होंने विशेष रूप से अपनी गृह शाखा मोरानहाट के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करने की अपील की।
उनका कहना था कि समाज के संगठनात्मक कार्यों और जनकल्याणकारी गतिविधियों को निरंतर गति देने के लिए मजबूत आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस प्रकार की परियोजनाओं में सामूहिक सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सार्वजनिक दुर्गापूजा आयोजन में भी समाज से सहयोग की अपील
समारोह के दौरान शाखा सचिव छगनलाल माड़ोदिया ने आगामी श्री श्री सार्वजनिक दुर्गापूजा आयोजन का उल्लेख करते हुए समाज के सभी सदस्यों से सहयोग एवं सहभागिता की अपेक्षा व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों की सफलता समाज के प्रत्येक सदस्य की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। इसलिए सभी को आपसी सहयोग और समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाने में योगदान देना चाहिए।

महाराजा अग्रसेन के वास्तविक समाजवाद को अपनाने की आवश्यकता : बिनोद अग्रवाल
अपने अध्यक्षीय संबोधन में शाखा अध्यक्ष बिनोद अग्रवाल ने महाराजा अग्रसेन के सामाजिक दर्शन को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
उन्होंने कहा कि आज समाज के सामने अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं और इन चुनौतियों का समाधान आपसी भाईचारे, सहयोग, समानता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन ने अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से जिस समाजवाद की परिकल्पना की थी, उसका वास्तविक अर्थ समाज के प्रत्येक व्यक्ति को साथ लेकर चलना और जरूरतमंदों की सहायता करना है।
बिनोद अग्रवाल ने सभी समाजबंधुओं से आह्वान किया कि वे महाराजा अग्रसेन के पदचिह्नों पर चलते हुए उनके आदर्शों को केवल भाषणों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दैनिक जीवन और सामाजिक गतिविधियों में भी उनका अनुसरण करें।

श्री राधाकृष्ण विवाह भवन समिति के निःशुल्क सहयोग के लिए विशेष आभार
समारोह के समापन अवसर पर शाखा सचिव छगनलाल माड़ोदिया ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
उन्होंने आयोजन में उपस्थित सभी वरिष्ठ समाजबंधुओं, सम्मानित अतिथियों, मातृशक्ति, पदाधिकारियों और सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग और सहभागिता के बिना इस आयोजन को सफल बनाना संभव नहीं था।
उन्होंने विशेष रूप से श्री राधाकृष्ण विवाह भवन समिति का आभार व्यक्त किया, जिसने महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह के आयोजन के लिए भवन निःशुल्क उपलब्ध कराया।
इस अवसर पर माड़ोदिया ने महाराजा अग्रसेन के प्रति अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा एवं भावनाओं को भी उपस्थित समाजबंधुओं के साथ साझा किया और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।

राष्ट्रगान के साथ समारोह का गरिमामय समापन
लगभग दो घंटे तक चले इस श्रद्धामय एवं प्रेरणादायी समारोह का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पश्चात सभा की समाप्ति की विधिवत घोषणा की गई।
समारोह ने जहां महाराजा अग्रसेन की गौरवशाली विरासत और उनके सामाजिक दर्शन को स्मरण करने का अवसर प्रदान किया, वहीं समाज के वरिष्ठ एवं समर्पित व्यक्तित्वों के सम्मान, सामाजिक एकता, शिक्षा के विकास और संगठनात्मक सुदृढ़ता के प्रति सामूहिक संकल्प को भी नई दिशा दी।

मारवाड़ी सम्मेलन की मोरानहाट शाखा द्वारा आयोजित यह समारोह श्रद्धा, सम्मान, सामाजिक समरसता और परस्पर सहयोग का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।
इस आशय की जानकारी मारवाड़ी सम्मेलन, मोरानहाट शाखा के जनसंपर्क अधिकारी पवन मोर ने दी।




