शहीद पियली फुकन और जीउराम दुलिया बरुआ को शिवसागर में श्रद्धांजलि—बरपुखुरी तट पर वीर सपूतों के बलिदान को किया नमन : 24 सितंबर 1830 को ब्रिटिश शासन ने शिवसागर बरपुखुरी के तट पर दोनों वीरों को दी थी फांसी—स्मृति दिवस पर ऐतिहासिक संघर्ष और बलिदान को किया गया याद : पियली फुकन की प्रतिमा और जीउराम दुलिया बरुआ की समाधि पर दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण—छात्र-छात्राओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने दी श्रद्धांजलि
‘देश के प्रथम शहीदों के रूप में मिले आधिकारिक मान्यता’—रंगपुर प्राचीन कीर्तिचिह्न संरक्षण समिति ने भारत सरकार से उठाई मांग

शिवसागर, 24 सितंबर : ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष और बलिदान के लिए असम के इतिहास में विशेष स्थान रखने वाले शहीद पियली फुकन और जीउराम दुलिया बरुआ को बुधवार को उनके स्मृति दिवस पर शिवसागर में श्रद्धापूर्वक याद किया गया। शिवसागर बरपुखुरी के तट पर स्थित उनके स्मृति स्थलों पर आयोजित कार्यक्रम में रंगपुर प्राचीन कीर्तिचिह्न संरक्षण समिति के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों, पत्रकारों, गणमान्य लोगों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने दोनों वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

24 सितंबर 1830 के बलिदान को किया याद
आयोजकों के अनुसार, 24 सितंबर 1830 को ब्रिटिश शासन ने शिवसागर बरपुखुरी के तट पर पियली फुकन और जीउराम दुलिया बरुआ को फांसी दी थी। इसी ऐतिहासिक घटना और दोनों वीरों के बलिदान की स्मृति में हर वर्ष 24 सितंबर को श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
स्मृति दिवस के अवसर पर उपस्थित लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनके संघर्ष, साहस और बलिदान को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने कहा कि असम के इतिहास से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण घटनाओं और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले वीरों की स्मृतियों को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

प्रतिमा और समाधि पर दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण
बुधवार सुबह शिवसागर बरपुखुरी के तट पर स्थित शहीद पियली फुकन की प्रतिमा और जीउराम दुलिया बरुआ की समाधि पर विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने दीप प्रज्वलित किए तथा माल्यार्पण कर दोनों वीर सपूतों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
इस दौरान उनके संघर्ष और बलिदान से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को सहेजने तथा भावी पीढ़ियों को इससे परिचित कराने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की भागीदारी के माध्यम से युवाओं के बीच दोनों वीरों के योगदान और इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी दिया गया।

‘देश के प्रथम शहीदों के रूप में मिले मान्यता’
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान रंगपुर प्राचीन कीर्तिचिह्न संरक्षण समिति ने भारत सरकार के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग भी रखी। समिति ने पियली फुकन और जीउराम दुलिया बरुआ को देश के प्रथम शहीदों के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की मांग की।
समिति के पदाधिकारियों का कहना था कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ दोनों वीरों के संघर्ष और बलिदान की ऐतिहासिक भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर उचित स्थान मिलना चाहिए। समिति ने उनके योगदान को व्यापक स्तर पर सामने लाने और उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों एवं स्मृतियों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
शिक्षाविदों, पत्रकारों और विद्यार्थियों की रही उपस्थिति
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में रंगपुर प्राचीन कीर्तिचिह्न संरक्षण समिति के अध्यक्ष फूलबर दिहिंगिया, कार्यकारी अध्यक्ष जयंत पातर, सचिव अनुप गोगोई, वरिष्ठ पत्रकार भैरव मुंडा, शिवसागर कॉमर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सौमार ज्योति महंत, शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रतीम शर्मा, संजय दास, प्रवीण शर्मा और डॉ. सीमांत बरुवा सहित कई विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित रहे।
इसके अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर दोनों वीरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उपस्थित लोगों ने उनके साहस, संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेने तथा उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने का संदेश
कार्यक्रम के माध्यम से शहीद पियली फुकन और जीउराम दुलिया बरुआ के बलिदान को नमन करने के साथ-साथ उनसे जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे स्मृति कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से नई पीढ़ी को परिचित कराने का भी माध्यम हैं।
स्मृति दिवस पर शिवसागर बरपुखुरी के ऐतिहासिक तट से दोनों वीरों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए उनकी स्मृतियों को जीवंत रखने तथा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने की आवश्यकता दोहराई गई।




