थुकुबिल के गोवालापथार में जंगली हाथियों का आतंक, एक ही परिवार का घर छठी बार तबाह, ग्रामीणों में भारी आक्रोश : बेहद गरीब बलराम ठाकुर के परिवार पर फिर टूटा कहर—चार आवासीय ढांचे क्षतिग्रस्त, चावल और अन्य खाद्य सामग्री भी नष्ट : सिर्फ दो दिनों में इलाके के सात घरों को हाथियों ने पहुंचाया नुकसान : हमले के दौरान बाल-बाल बची परिवार की जान : ‘छह बार घर उजड़ा, फिर भी नहीं मिला सरकारी मुआवजा’—पीड़ित परिवार का दावा, वन विभाग पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप
उचित मुआवजा, घर के पुनर्निर्माण में मदद और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग—लगातार हाथियों की आवाजाही से दहशत में ग्रामीण

सोनारी, 24 सितंबर : चराईदेव जिले के सोनारी क्षेत्र के थुकुबिल अंतर्गत गोवालापथार में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हाथियों के झुंड ने एक परिवार के चार आवासीय ढांचों को क्षतिग्रस्त कर भारी नुकसान पहुंचाया है। लगातार हो रही घटनाओं के कारण गोवालापथार और आसपास के इलाकों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

इस बार जंगली हाथियों के हमले का सबसे अधिक नुकसान स्थानीय निवासी बलराम ठाकुर के परिवार को उठाना पड़ा। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर बताए जा रहे इस परिवार का दावा है कि हाथियों के हमले में उनका घर अब तक छह बार क्षतिग्रस्त अथवा ध्वस्त हो चुका है।

चार आवासीय ढांचे क्षतिग्रस्त—खाद्य सामग्री भी नष्ट
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बीती रात जंगली हाथियों का झुंड आबादी वाले इलाके में पहुंच गया और बलराम ठाकुर के घर पर हमला कर दिया। हाथियों ने परिवार के चार आवासीय ढांचों को क्षतिग्रस्त कर दिया। घर में रखा चावल और अन्य खाद्य पदार्थ भी हाथियों ने खा लिए या नष्ट कर दिए, जबकि घरेलू सामान को भी नुकसान पहुंचा।

पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रहे परिवार के लिए इस घटना ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। घर और खाद्य सामग्री के नुकसान के बाद परिवार के सामने अपने आशियाने को दोबारा खड़ा करने की चुनौती पैदा हो गई है।

हमले में बाल-बाल बची परिवार की जान
घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि हाथियों के हमले के समय परिवार के सदस्य घर के आसपास मौजूद थे। बताया गया कि हाथियों का झुंड अचानक घर के पास पहुंचा, जिसके बाद परिवार के सदस्यों ने किसी तरह वहां से निकलकर अपनी जान बचाई।
इस घटना के बाद परिवार के साथ आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण विशेष रूप से रात के समय उन्हें भय के बीच रहना पड़ रहा है।

एक ही परिवार का घर छठी बार उजड़ने का दावा
बलराम ठाकुर के परिवार के अनुसार, जंगली हाथियों ने उनके घर को पहली बार निशाना नहीं बनाया है। परिवार का दावा है कि अब तक छह बार हाथियों के हमले में उनका घर क्षतिग्रस्त या ध्वस्त हो चुका है।

बार-बार घर बनाने और उसके बाद हाथियों के हमले में नुकसान उठाने से परिवार गंभीर आर्थिक संकट में पहुंच गया है। पीड़ितों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बीच हर बार घर का पुनर्निर्माण करना उनके लिए बेहद कठिन हो रहा है।

‘छह बार नुकसान के बाद भी नहीं मिला मुआवजा’
पीड़ित परिवार का दावा है कि इतनी बार नुकसान उठाने के बावजूद उन्हें अब तक किसी प्रकार का सरकारी मुआवजा नहीं मिला है। परिवार का कहना है कि प्रत्येक घटना के बाद संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
परिवार ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा उपलब्ध कराने और क्षतिग्रस्त घर के पुनर्निर्माण में सहायता देने की मांग की है।

दो दिनों में सात घरों को नुकसान पहुंचाने का दावा
गोवालापथार में मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्थानीय लोगों के अनुसार केवल पिछले दो दिनों में जंगली हाथियों ने क्षेत्र के सात आवासीय घरों को नुकसान पहुंचाया है।

लगातार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों को आशंका बनी रहती है कि हाथियों का झुंड किसी भी समय आबादी वाले इलाके में प्रवेश कर सकता है। खासतौर पर रात के समय लोगों को अपने परिवार और घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि हाथियों के लगातार आबादी वाले इलाकों में प्रवेश करने और घरों को नुकसान पहुंचाने की सूचना देने के बावजूद समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में केवल हाथियों को आबादी से दूर भगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित इलाकों में ऐसी प्रभावी और सुरक्षित व्यवस्था की जरूरत है जिससे ग्रामीणों तथा वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि समय रहते सुरक्षा के ठोस उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में किसी गंभीर घटना या जनहानि का खतरा बढ़ सकता है।

मुआवजा और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की मांग
पीड़ित बलराम ठाकुर के परिवार और स्थानीय लोगों ने प्रशासन तथा वन विभाग से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। उन्होंने बार-बार नुकसान झेल रहे परिवार को उचित सरकारी मुआवजा, क्षतिग्रस्त घर के पुनर्निर्माण में सहायता तथा गोवालापथार में हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग उठाई है।

महज दो दिनों में सात घरों के क्षतिग्रस्त होने के स्थानीय दावे और बलराम ठाकुर के परिवार का घर छठी बार उजड़ने की घटना के बाद क्षेत्र में भय के साथ ग्रामीणों का आक्रोश भी बढ़ रहा है। अब स्थानीय लोगों की निगाह इस बात पर है कि वन विभाग और प्रशासन प्रभावित परिवारों को राहत देने तथा मानव-हाथी संघर्ष की ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।




