शिवसागर विश्वविद्यालय के समग्र विकास पर शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू का मंथन : 10 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की समीक्षा, चार वर्षीय पाठ्यक्रम और पीएम-उषा योजना की प्रगति का लिया जायजा : स्कूल यूनिफॉर्म में पॉलिएस्टर के मुद्दे पर बोले— ‘सीमित बजट में 100 प्रतिशत कॉटन संभव नहीं’

शिवसागर, 27 जून : असम सरकार राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, आधुनिक आधारभूत संरचना और नई शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू ने शनिवार को शिवसागर विश्वविद्यालय का दौरा कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, विकास परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ लंबी बैठक कर शैक्षणिक गतिविधियों, अधोसंरचना विस्तार तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की।

कुलपति और प्रशासन के साथ हुई विस्तृत समीक्षा बैठक
विश्वविद्यालय पहुंचने पर शिक्षा मंत्री का स्वागत कुलपति प्रो. महादेव पाटगिरी तथा कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल चंद्र कलिता ने किया। इसके बाद आयोजित समीक्षा बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक तथा आधारभूत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में शिक्षा मंत्री ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के 19 विभागों में सफलतापूर्वक संचालित चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUGP) तथा विभिन्न स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के संचालन की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने नई शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक शिक्षण प्रणाली ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

10 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय की स्थापना के समय आधारभूत संरचना के विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई 10 करोड़ रुपये की अनुदान राशि के उपयोग का विस्तृत ब्यौरा प्राप्त किया। उन्होंने इसी राशि से निर्माणाधीन नए शैक्षणिक भवन की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए आधुनिक भवन, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और अन्य सुविधाओं का विकास अत्यंत आवश्यक है तथा निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पीएम-उषा योजना के छात्रावास निर्माण पर भी विशेष ध्यान
शिक्षा मंत्री ने पीएम-उषा (PM-USHA) योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन छात्रावास परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति, समयसीमा तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की और परियोजना को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना उच्च शिक्षा के विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार इस दिशा में हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है।
संबद्ध महाविद्यालयों की गुणवत्ता पर भी हुई चर्चा
बैठक में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था, अकादमिक गुणवत्ता तथा प्रशासनिक समन्वय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि नवगठित शिवसागर विश्वविद्यालय ने कम समय में उल्लेखनीय प्रगति की है और राज्य सरकार इसे असम के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में विकसित करने के लिए हरसंभव सहयोग देती रहेगी।
विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की शिक्षा मंत्री ने की सराहना
समीक्षा बैठक के बाद शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू ने कहा कि शिवसागर विश्वविद्यालय ने अपेक्षाकृत कम समय में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कुलपति, कुलसचिव, शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता तथा अधोसंरचना विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक अधोसंरचना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था और बेहतर अकादमिक वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य में और अधिक अवसर प्राप्त होंगे तथा विश्वविद्यालय राज्य के अग्रणी संस्थानों में अपनी पहचान स्थापित करेगा।
स्कूल यूनिफॉर्म में पॉलिएस्टर को लेकर उठे सवाल
विश्वविद्यालय दौरे के दौरान पत्रकारों ने सरकारी विद्यालयों में वितरित किए जा रहे यूनिफॉर्म में 30–33 प्रतिशत कॉटन तथा 67–70 प्रतिशत पॉलिएस्टर के उपयोग को लेकर भी शिक्षा मंत्री से सवाल किया।
हाल ही में कुछ त्वचा रोग विशेषज्ञों ने असम जैसी गर्म और आर्द्र जलवायु में अत्यधिक पॉलिएस्टर मिश्रित कपड़े को विद्यार्थियों के लिए कम उपयुक्त बताया था। इसी संदर्भ में सरकार की नीति पर मंत्री से प्रतिक्रिया मांगी गई।
‘सीमित बजट में 100 प्रतिशत कॉटन संभव नहीं’
इस प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू ने स्पष्ट किया कि सरकार निर्धारित बजट के भीतर प्रत्येक विद्यार्थी को दो-दो यूनिफॉर्म उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि प्रति विद्यार्थी लगभग 600 रुपये की लागत में दो जोड़ी यूनिफॉर्म उपलब्ध करानी होती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्तीय व्यवस्था में 100 प्रतिशत कॉटन से बनी यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूनिफॉर्म निर्माण का कार्य सरकारी दिशा-निर्देशों, गुणवत्ता परीक्षण तथा विधिवत निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित एजेंसी को सौंपा जाता है।
शिकायतों पर सरकार करेगी नियमानुसार कार्रवाई
पत्रकारों द्वारा शिवसागर में यूनिफॉर्म की गुणवत्ता को लेकर दर्ज लिखित शिकायतों का उल्लेख किए जाने पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि संबंधित शिकायत जिला आयुक्त के माध्यम से सरकार तक पहुंच चुकी है और उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
हालांकि उन्होंने इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी से परहेज करते हुए कहा कि सरकार सभी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही लेती है।
उच्च शिक्षा और विद्यालयी शिक्षा—दोनों पर सरकार का समान फोकस
शिवसागर विश्वविद्यालय के इस दौरे के दौरान एक ओर जहां शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक और आधारभूत विकास को सरकार की प्राथमिकता बताया, वहीं दूसरी ओर विद्यालयी शिक्षा से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर भी सरकार की वित्तीय सीमाओं और नीतिगत दृष्टिकोण को स्पष्ट किया।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में आधुनिक अधोसंरचना, नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन तथा विद्यालय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं की उपलब्धता—इन सभी क्षेत्रों में समान रूप से ध्यान दिए जाने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।




