सेंसेक्स धड़ाम: 1,000 अंकों से ज्यादा टूटा बाजार, निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ से अधिक स्वाहा : निफ्टी 23,200 के नीचे फिसला, सभी सेक्टर लाल निशान में; निवेशकों में बढ़ी चिंता
अमेरिका-ईरान तनाव, महंगा कच्चा तेल, टीसीएस में भारी गिरावट और विदेशी बिकवाली से दहला दलाल स्ट्रीट

न्यूज डेस्क, 3 जून : भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी उथल-पुथल देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,000 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 23,200 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस बड़ी गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में ₹6 लाख करोड़ से अधिक की कमी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा।
दलाल स्ट्रीट पर पूरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा और लगभग सभी प्रमुख सेक्टर नुकसान में कारोबार करते दिखे। आईटी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में व्यापक गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के पीछे क्या हैं बड़े कारण ?
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता – मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और अस्थिरता के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतें 97 डॉलर के करीब – ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी।
आईटी सेक्टर में जबरदस्त बिकवाली – बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी शेयरों से आया। आईटी इंडेक्स में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। विशेष रूप से Tata Consultancy Services (टीसीएस) के शेयरों में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। कोविड काल के बाद यह टीसीएस की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली – विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी विदेशी कंपनियों और विकसित बाजारों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव बना हुआ है।
रुपये की कमजोरी और बढ़ती बॉन्ड यील्ड – रुपये में कमजोरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इससे विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है और बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
सभी सेक्टर लाल निशान में
बुधवार के कारोबार में लगभग सभी 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स नुकसान में रहे। आईटी शेयरों के अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो, धातु और उपभोक्ता क्षेत्र के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी व्यापक बिकवाली रही।
पिछले कुछ दिनों से जारी है गिरावट
बाजार में कमजोरी कोई एक दिन की घटना नहीं है। पिछले चार से पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स हजारों अंक टूट चुका है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊंची तेल कीमतों और विदेशी बिकवाली ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश ?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट अल्पकालिक जोखिमों और वैश्विक अनिश्चितताओं का परिणाम है। उनका कहना है कि दीर्घकालिक निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। वहीं अल्पकालिक कारोबारियों को उच्च अस्थिरता के दौर में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
आगे किस पर रहेगी नजर ?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य-पूर्व की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल और वैश्विक आईटी और एआई सेक्टर से जुड़े संकेतों के कारकों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल दलाल स्ट्रीट पर डर और अनिश्चितता का माहौल है। निवेशकों की निगाहें अब वैश्विक घटनाक्रमों और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई हैं, जो तय करेंगे कि बाजार में यह गिरावट अस्थायी है या आगे और दबाव देखने को मिल सकता है।




