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डिब्रूगढ़ एएमसीएच में शवों की अदला-बदली का गंभीर मामला : सोनारी के परिवार को अपने बेटे की जगह सौंपा गया दूसरे व्यक्ति का शव : अंतिम संस्कार से पहले खुली बड़ी प्रशासनिक चूक : बाइक दुर्घटना में घायल 19 वर्षीय मनोज बाउरी की इलाज के दौरान हुई थी मौत

गलत शव मिलने से मचा हड़कंप, दोनों परिवारों को झेलनी पड़ी भारी मानसिक पीड़ा : जांच, जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की उठी मांग : अस्पताल प्रबंधन अब भी मौन

शिवसागर, 16 जून : ऊपरी असम के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एएमसीएच) में शवों की कथित अदला-बदली का एक गंभीर और अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है। आरोप है कि चराईदेव जिले के सोनारी क्षेत्र के एक परिवार को उनके मृत पुत्र के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का शव सौंप दिया गया। यह चौंकाने वाली घटना उस समय उजागर हुई जब परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान शव की पहचान करने लगा।

इस घटना ने न केवल दो शोकाकुल परिवारों को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया है, बल्कि अस्पताल की शव पहचान, टैगिंग और हैंडओवर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सड़क दुर्घटना के बाद एएमसीएच में चल रहा था इलाज

प्राप्त जानकारी के अनुसार चराईदेव जिले के सोनारी क्षेत्र के मंजुश्री अंतर्गत खामलांग चाय बागान निवासी 19 वर्षीय मनोज बाउरी 7 जून को हुई एक बाइक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना के बाद उन्हें उपचार के लिए डिब्रूगढ़ स्थित एएमसीएच में भर्ती कराया गया था।

परिजनों के अनुसार मनोज बाउरी दुर्घटना के बाद से कोमा में थे और कई दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करते रहे। अंततः 14 जून की देर शाम इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया शव

मृत्यु के बाद अस्पताल की नियमित प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम किया गया और उसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शोकग्रस्त परिवार एम्बुलेंस के माध्यम से शव को सोनारी स्थित अपने घर लेकर पहुंचा।

परिवार और स्थानीय लोगों के अनुसार युवक की असामयिक मृत्यु से पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ था। इसी कारण घर पर शव को नहीं खोला गया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं।

अंतिम संस्कार से पहले खुली चौंकाने वाली सच्चाई

घटना ने उस समय अप्रत्याशित मोड़ ले लिया जब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान शव की पहचान को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ। परिजनों और स्थानीय लोगों ने जब शव की बारीकी से जांच की तो स्पष्ट हुआ कि वह शव मनोज बाउरी का नहीं था।

यह जानकारी सामने आते ही परिवार में शोक के साथ-साथ भारी आक्रोश फैल गया। उपस्थित लोगों में भी हड़कंप मच गया और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।

दूसरे परिवार को सौंप दिया गया था मनोज का शव

स्थानीय सूत्रों और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार मनोज बाउरी का शव कथित रूप से तिनसुकिया जिले के दुमदुमा निवासी एक अन्य मृत युवक सुनील नायक के परिवार को सौंप दिया गया था, जबकि सुनील नायक का शव मनोज बाउरी के परिजनों को दे दिया गया।

हालांकि इस संबंध में एएमसीएच प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या स्पष्टीकरण अभी तक जारी नहीं किया गया है।

सूचना मिलते ही शुरू हुई अफरा-तफरी

घटना सामने आने के बाद दोनों परिवारों ने स्थानीय पुलिस तथा अस्पताल प्रशासन को मामले की जानकारी दी। इसके बाद अस्पताल अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास शुरू किया।

सूत्रों के अनुसार सोनारी और दुमदुमा दोनों स्थानों से गलत तरीके से भेजे गए शवों को वापस डिब्रूगढ़ लाया गया, जहां उनकी पुनः पहचान की गई और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद सही शव संबंधित परिवारों को सौंपे गए।

बताया जा रहा है कि 15 जून की देर रात अथवा 16 जून की सुबह दोनों परिवारों को उनके परिजनों के सही शव उपलब्ध करा दिए गए।

दोनों परिवारों को झेलनी पड़ी असहनीय मानसिक पीड़ा

इस पूरी घटना के कारण दोनों परिवारों को भारी मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से मनोज बाउरी का परिवार, जो आर्थिक रूप से भी कमजोर बताया जा रहा है, अतिरिक्त परेशानी और खर्च का सामना करने को मजबूर हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी प्रियजन को खोने का दुख अपने आप में अत्यंत बड़ा होता है, लेकिन इस प्रकार की प्रशासनिक चूक ने परिवारों के दुख को कई गुना बढ़ा दिया।

स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

घटना की जानकारी फैलते ही सोनारी, चराईदेव, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

लोगों का कहना है कि एएमसीएच जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में शवों की पहचान और हैंडओवर जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में इस स्तर की गलती बेहद चिंताजनक है।

अस्पताल की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी अस्पताल में शव सौंपने से पहले बहुस्तरीय सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें शव टैगिंग, पहचान रिकॉर्ड, दस्तावेजों का मिलान, शवगृह रजिस्टर का सत्यापन तथा परिजनों द्वारा अंतिम पुष्टि जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।

ऐसे में यह घटना अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था, शवगृह प्रबंधन और निगरानी प्रणाली में संभावित खामियों की ओर संकेत करती है।

पहली बार नहीं उठा ऐसा सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि सोनारी क्षेत्र से जुड़े मामलों में पहले भी गलत शव सौंपे जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। एक पुराने मामले में कथित रूप से गलत शव को दफनाने के बाद दोबारा निकालना पड़ा था।

फिर भी स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पहले की घटनाओं से सबक लिया गया होता तो संभवतः ऐसी पुनरावृत्ति रोकी जा सकती थी।

उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

परिजनों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

साथ ही अस्पतालों में शव पहचान, टैगिंग, रिकॉर्ड सत्यापन और हैंडओवर प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त तथा पारदर्शी बनाने की मांग भी उठ रही है।

प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन अब भी मौन

इस मामले को लेकर समाचार लिखे जाने तक एएमसीएच प्रशासन, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान, जांच रिपोर्ट अथवा कार्रवाई संबंधी सूचना जारी नहीं की गई थी।

ऐसे में अब सभी की निगाहें अस्पताल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

संवेदनाओं से जुड़ा मामला, जवाबदेही तय होना जरूरी

यह मामला केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि दो शोकाकुल परिवारों की भावनाओं, विश्वास और संवेदनाओं से जुड़ा विषय बन गया है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही, संवेदनशीलता और प्रक्रियागत पारदर्शिता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

लोगों का मानना है कि दोषियों की जवाबदेही तय कर और व्यवस्थागत सुधार लागू कर ही भविष्य में ऐसी पीड़ादायक घटनाओं को रोका जा सकता है।

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