देरगांव में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार शिवदयाल काबरा का भव्य सम्मान : ‘असम की शान राजस्थानी रचनाकार’ संस्था ने शॉल, स्मृति-चिह्न एवं पुस्तकों का सेट भेंट कर किया अभिनंदन
65 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में समर्पित हैं शिवदयाल काबरा, नई पीढ़ी के लिए बने प्रेरणास्रोत

देरगांव, 29 जून : असम के वरिष्ठतम हिंदी पत्रकारों एवं साहित्यकारों में अग्रणी स्थान रखने वाले लगभग 80 वर्षीय शिवदयाल काबरा का शनिवार को देरगांव स्थित उनके निवास पर गरिमामय वातावरण में सम्मान किया गया। “असम की शान राजस्थानी रचनाकार” संस्था की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती ममता गिनोरिया तथा जोरहाट की प्रसिद्ध लेखिका श्रीमती सरिता सिंह ने शिष्टाचार भेंट कर उनके दीर्घकालीन साहित्यिक एवं पत्रकारिता योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

गरिमामय समारोह में किया गया अभिनंदन
सम्मान समारोह के दौरान संस्था की ओर से शिवदयाल काबरा को शॉल ओढ़ाकर, पुष्पगुच्छ, गिफ्ट हैम्पर, स्मृति-चिह्न तथा पुस्तकों का विशेष सेट भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने समर्पण, अनुशासन और सतत साहित्य साधना से हिंदी भाषा एवं पत्रकारिता को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं।
हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि श्री काबरा ने अपने जीवन के छह दशक से अधिक समय हिंदी पत्रकारिता, साहित्य सृजन और अनुवाद के क्षेत्र को समर्पित किए हैं। उन्होंने अनेक साहित्यिक कृतियों का लेखन एवं अनुवाद कर हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाया है। साथ ही असम में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
अतिथियों ने यह भी कहा कि श्री काबरा का जीवन संघर्ष, सादगी, साहित्य साधना और सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनका व्यक्तित्व युवा साहित्यकारों, लेखकों और पत्रकारों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

सम्मान से मिला नई ऊर्जा का संचार : शिवदयाल काबरा
अपने सम्मान से भावुक एवं अभिभूत श्री शिवदयाल काबरा ने संस्था के पदाधिकारियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के लिए इस प्रकार का सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज द्वारा उनके कार्यों की स्वीकृति और प्रेरणा का प्रतीक होता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान साहित्य सृजन और पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहने की नई ऊर्जा, उत्साह और जिम्मेदारी का अहसास कराते हैं।
65 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता और साहित्य की सतत साधना
गौरतलब है कि लगभग 80 वर्षीय शिवदयाल काबरा पिछले 65 वर्षों से असम में हिंदी पत्रकारिता और हिंदी साहित्य की निरंतर सेवा कर रहे हैं। उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों की रचना करने के साथ-साथ विभिन्न भाषाओं की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद भी किया है। ऊपरी असम के वरिष्ठतम हिंदी पत्रकारों एवं साहित्यकारों में उनकी विशिष्ट पहचान है और साहित्य जगत में उन्हें अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

साहित्यिक एवं सामाजिक क्षेत्र में हर्ष का वातावरण
शिवदयाल काबरा के सम्मान की खबर से देरगांव सहित पूरे क्षेत्र के साहित्यिक, सामाजिक एवं बौद्धिक वर्ग में हर्ष का वातावरण है। स्थानीय बुद्धिजीवियों, साहित्य प्रेमियों एवं सामाजिक संगठनों ने इस सम्मान को न केवल श्री काबरा के व्यक्तित्व का सम्मान बताया, बल्कि इसे पूरे क्षेत्र और असम के हिंदी साहित्य जगत के लिए गौरव का विषय भी माना।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्री काबरा का अनुभव, साहित्य साधना और पत्रकारिता के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को भी समाज, भाषा और साहित्य की सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
देरगांव से दीपक जैन की रिपोर्ट।




