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रतनपुर चाय बागान फैक्ट्री पर आखिरकार लगा ताला : बैंक ऋण नहीं चुकाने पर कैनरा बैंक की बड़ी कार्रवाई :  प्रशासन की मौजूदगी में फैक्ट्री सील : मजदूरों के भविष्य पर मंडराया संकट : मालिक पर वेतन बकाया छोड़कर फरार होने का आरोप

सोनारी, 24 जून : ऊपरी असम के चराईदेव जिले स्थित रतनपुर चाय बागान से जुड़ा लंबे समय से चला आ रहा आर्थिक और प्रशासनिक संकट मंगलवार को एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब कैनरा बैंक ने कानूनी प्रक्रिया के तहत बागान की फैक्ट्री को अपने कब्जे में लेते हुए सील कर दिया। स्थानीय प्रशासन, बैंक अधिकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में की गई इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चिंता और अनिश्चितता का माहौल व्याप्त हो गया है।

ऋण बकाया के कारण बैंक की कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार रतनपुर चाय बागान प्रबंधन ने कैनरा बैंक से लाखों रुपये का ऋण लिया था, जिसका भुगतान लंबे समय से लंबित था। बैंक द्वारा कई बार नोटिस जारी किए जाने और बकाया राशि जमा कराने के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद ऋण का निपटान नहीं किया गया। इसके बाद बैंक ने कानूनी प्रावधानों के तहत फैक्ट्री को अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया शुरू की और मंगलवार को आधिकारिक रूप से फैक्ट्री को सील कर दिया।

नवंबर 2025 से बंद पड़ी थी फैक्ट्री

स्थानीय सूत्रों के अनुसार रतनपुर चाय बागान की फैक्ट्री नवंबर 2025 से ही बंद पड़ी थी। उत्पादन कार्य पूरी तरह ठप होने के कारण बागान से जुड़े सैकड़ों श्रमिकों और उनके परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था। फैक्ट्री बंद होने के बाद से ही श्रमिकों को नियमित आय का कोई स्रोत नहीं मिल पाया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती गई।

बकाया वेतन नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

श्रमिकों का आरोप है कि फैक्ट्री बंद होने के बावजूद उन्हें उनका बकाया वेतन नहीं दिया गया। कई महीनों से मजदूरी का भुगतान न होने के कारण श्रमिक परिवारों को कर्ज, आर्थिक तंगी और दैनिक जरूरतों की पूर्ति में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि बागान में कार्यरत अधिकांश परिवार पूरी तरह इसी रोजगार पर निर्भर थे और अब उनके सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है।

मालिक पर क्षेत्र छोड़कर फरार होने का आरोप

बागान के स्वामित्व से जुड़े कारोबारी डेनिस कुकुरासुवा पर आरोप है कि वे श्रमिकों का बकाया भुगतान किए बिना ही क्षेत्र छोड़कर चले गए। स्थानीय लोगों और श्रमिक नेताओं का कहना है कि प्रबंधन की लापरवाही और आर्थिक अनियमितताओं का खामियाजा अब मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि इस संबंध में प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

प्रशासन की मौजूदगी में सील हुआ मुख्य द्वार

मंगलवार को बैंक अधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा बलों की उपस्थिति में फैक्ट्री परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे परिसर को औपचारिक रूप से बैंक के नियंत्रण में लिया गया। इस दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी।

श्रमिकों ने सरकार से लगाई गुहार

फैक्ट्री सील होने के बाद श्रमिकों ने राज्य सरकार, श्रम विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि सबसे पहले श्रमिकों का बकाया वेतन दिलाया जाए और उनके रोजगार को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। श्रमिकों का मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर स्थायी संकट खड़ा हो सकता है।

स्थानीय संगठनों ने भी की हस्तक्षेप की मांग

रतनपुर क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों ने भी सरकार से मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उनका कहना है कि चाय उद्योग असम की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में रतनपुर चाय बागान जैसे प्रतिष्ठानों के बंद होने से केवल श्रमिक ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या मिलेगा नया प्रबंधन ?

फैक्ट्री सील होने के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने खड़े हो गए हैं। क्या बागान को नया प्रबंधन मिलेगा? क्या कैनरा बैंक किसी पुनर्गठन या पुनरुद्धार योजना पर विचार करेगा? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या श्रमिकों का बकाया वेतन उन्हें मिल पाएगा?

फिलहाल इन सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन रतनपुर चाय बागान के सैकड़ों श्रमिक और उनके परिवार अब सरकार, बैंक और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर उम्मीद भरी निगाहें लगाए हुए हैं।

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