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आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत होजाई पहुंचे : तीन दिवसीय कार्यक्रम: कायकर्ता विकास वर्ग (द्वितीय वर्ष) प्रशिक्षण शिविर में 14-16 मई को उपस्थिति

होजाई 14 मई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत कल 13 मई को असम पहुंच गए। उन्होंने गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाम को लैंडिंग के बाद सीधे होजाई के गीताश्रम संस्कार मंदिर प्रोजेक्ट परिसर पहुंचकर 13 से 17 मई तक चार रातों का प्रवास शुरू कर दिया है।

उत्तर असम प्रांत के प्रचार प्रमुख किशोर शिवम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार डॉ. भागवत तीन दिवसीय कार्यक्रम के साथ असम आए हैं। वे होजाई के संस्कार मंदिर प्रोजेक्ट चौराहद (गीताश्रम) में 11 मई से चल रहे कायकर्ता विकास वर्ग-एक (द्वितीय वर्ष) प्रशिक्षण शिविर में 14, 15 और 16 मई को पूर्ण रूप से उपस्थित रहेंगे और स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। 17 मई की सुबह वे होजाई से गुवाहाटी लौटेंगे।

प्रशिक्षण शिविर का विस्तृत विवरण

होजाई के संस्कार मंदिर प्रोजेक्ट परिसर में यह 20 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 11 मई 2026 को शुरू हुआ था और 1 जून 2026 को समाप्त होगा। इस शिविर में केवल वे स्वयंसेवक ही भाग ले सकते हैं जिन्होंने पहले संघ शिक्षा वर्ग पूरा किया हो। असम क्षेत्र के पांच प्रांतों से कुल 103 स्वयंसेवक इसमें शामिल हैं। जिनकी प्रांतवार संख्या क्रमशः उत्तर असम प्रांत से 56, त्रिपुरा प्रांत से 20, मणिपुर प्रांत से 13, दक्षिण असम प्रांत से 8 और अरुणाचल प्रांत से 6 स्वयंसेवक है।

सुरक्षा व्यवस्था

डॉ. भागवत की उपस्थिति को देखते हुए होजाई जिला प्रशासन और पुलिस ने कड़ी सुरक्षा घेराबंदी की है। गीताश्रम क्षेत्र से तीन किलोमीटर के दायरे में 13 से 17 मई तक ड्रोन, यूएवी, गुब्बारे या किसी भी हवाई यान के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। आसपास भारी पुलिस तैनाती की गई है।

आगे की यात्रा योजना

होजाई में कार्यक्रम समाप्त करने के बाद 17 मई सुबह डॉ. भागवत गुवाहाटी के बरबाड़ी स्थित सुदर्शनालय में कुछ समय विश्राम करेंगे, उसके बाद नागपुर के लिए रवाना हो जाएंगे।

यह दौरा आरएसएस के नियमित कायकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है। सरसंघचालक हर वर्ष विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों में स्वयंसेवकों के साथ समय बिताते हैं और संगठनात्मक चर्चाएं करते हैं। इस बार का पूर्वोत्तर दौरा कार्यकर्ता विकास और क्षेत्रीय विस्तार पर केंद्रित है।

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