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भक्ति, समर्पण और पाक-कला का अद्भुत संगम : असम के शिवसागर की रेखा बुखरेड़िया ने रचा एशियाई कीर्तिमान : एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम : मात्र 5 घंटे 5 मिनट में तैयार किए ‘छप्पन भोग’ के 56 व्यंजन

असम की गृहिणी की उपलब्धि से प्रदेश और समाज में हर्ष की लहर : असम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिलाई नई पहचान : विभिन्न संगठनों ने दी बधाई

शिवसागर, 11 जून : असम के ऐतिहासिक नगर शिवसागर की प्रतिष्ठित समाजसेवी, लेखिका और सांस्कृतिक कार्यकर्ता रेखा बुखरेड़िया ने अपनी अद्भुत पाक-कला, धार्मिक आस्था और अथक परिश्रम के बल पर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे राज्य को गौरवान्वित कर दिया है। उन्होंने पारंपरिक ‘छप्पन भोग’ के सभी 56 व्यंजन मात्र 5 घंटे 5 मिनट में तैयार कर एक नया इतिहास रच दिया है। उनकी इस असाधारण उपलब्धि को पहले इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और बाद में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता प्रदान की गई है।

रेखा बुखरेड़िया की इस उपलब्धि को केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, महिला सशक्तिकरण और असम की समृद्ध पाक विरासत के वैश्विक सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

हनुमान जयंती के पावन अवसर पर बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

यह रिकॉर्ड 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जयंती के अवसर पर शिवसागर में बनाया गया। भगवान श्री हनुमान जी को प्रसाद अर्पित करने के उद्देश्य से रेखा बुखरेड़िया ने छप्पन भोग के सभी 56 पारंपरिक व्यंजन तैयार करने का संकल्प लिया। सामान्यतः इतने बड़े स्तर पर छप्पन भोग तैयार करने में पूरा दिन लग जाता है, लेकिन उन्होंने अपनी कुशल योजना, वर्षों के अनुभव और अनुशासित कार्यशैली के बल पर इस कठिन कार्य को मात्र 5 घंटे 5 मिनट में पूरा कर दिखाया।

धार्मिक विधि-विधान के साथ तैयार किए गए इन व्यंजनों को भगवान हनुमान को भोग स्वरूप अर्पित किया गया। उनकी इस उपलब्धि ने धार्मिक आस्था और पाक-कौशल का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।

56 व्यंजनों में झलकी भारतीय पाक परंपरा की समृद्धि

रेखा बुखरेड़िया द्वारा तैयार किए गए छप्पन भोग में पेड़ा, लड्डू, हलवा, रबड़ी, खीर, पकौड़ा, पूरी, आलू की सब्जी सहित अनेक पारंपरिक मीठे और नमकीन व्यंजन शामिल थे। प्रत्येक व्यंजन को निर्धारित समय में तैयार करना अपने आप में बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने सभी व्यंजनों को गुणवत्ता और परंपरा के अनुरूप तैयार कर अपनी दक्षता का परिचय दिया।

खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि छप्पन भोग केवल भोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। ऐसे में रिकॉर्ड समय में सभी व्यंजनों का निर्माण एक असाधारण उपलब्धि है।

पहले राष्ट्रीय, फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान

रेखा बुखरेड़िया की इस उपलब्धि को सबसे पहले इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 ने मान्यता प्रदान की। 27 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक प्रमाण-पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि उन्होंने सबसे कम समय में सभी 56 छप्पन भोग व्यंजन तैयार कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया है।

यह प्रमाण-पत्र इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के चीफ एडिटर डॉ. बिस्वरूप राय चौधरी द्वारा हस्ताक्षरित है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें विशेष सम्मान पैकेज भी प्रदान किया गया, जिसमें आधिकारिक प्रमाण-पत्र, IBR Medal of Achievement, रिकॉर्ड होल्डर आईडी कार्ड, विशेष डिज़ाइनर पेन, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की वार्षिक पुस्तक की प्रति, आईबीआर बैज तथा दो आईबीआर कार स्टिकर शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि के बाद उनकी सफलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इसे आधिकारिक रिकॉर्ड के रूप में स्वीकार किया।

एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने दी अंतरराष्ट्रीय मान्यता

एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा जारी प्रमाण-पत्र के अनुसार रेखा बुखरेड़िया की उपलब्धि का सत्यापन 15 अप्रैल 2026 को किया गया और 15 मई 2026 को उन्हें आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।

इस प्रमाण-पत्र पर विभिन्न देशों की रिकॉर्ड संस्थाओं से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें India Book of Records के Editor-in-Chief डॉ. बिस्वरूप राय चौधरी, Vietnam Records Organization के Vice President Dr. Nguyen Hoang Anh (Julia), Nepal Records Book के Editor-in-Chief डॉ. दीपक चंद्र सेन और Museum Rekor-Dunia Indonesia (MURI) के Vice Director Osmar Susilo शामिल हैं। इन प्रतिष्ठित अधिकारियों द्वारा प्रमाणित यह उपलब्धि रेखा बुखरेड़िया के रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करती है।

सिर्फ पाक-कला नहीं, साहित्य और समाजसेवा में भी सक्रिय पहचान

रेखा बुखरेड़िया केवल एक कुशल गृहिणी या पाक-विशेषज्ञ ही नहीं हैं, बल्कि वे एक प्रतिष्ठित लेखिका, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक योगदानकर्ता के रूप में भी जानी जाती हैं। वर्षों से वे विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं तथा समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।

महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। यही कारण है कि उनकी इस उपलब्धि को समाज की सामूहिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

भावुक हुईं रेखा बुखरेड़िया, कहा— यह सम्मान आगे बढ़ने की प्रेरणा

अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रेखा बुखरेड़िया ने कहा कि वह स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली और धन्य महसूस कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “मैं इस सम्मान और उपलब्धि के लिए ईश्वर, अपने परिवार, शुभचिंतकों और सभी सहयोगियों की हृदय से आभारी हूँ। यह उपलब्धि मुझे आगे और अधिक अच्छा कार्य करने की प्रेरणा देती है। मैं चाहती हूँ कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भारतीय पाक विरासत को विश्व स्तर पर और अधिक पहचान मिले।”

उनकी इस विनम्र प्रतिक्रिया ने उनकी सादगी और समर्पण को और अधिक उजागर किया।

शिवसागर के प्रतिष्ठित परिवार की बहू हैं रेखा बुखरेड़िया

रेखा बुखरेड़िया शिवसागर शहर के मारवाड़ी ठाकुरबाड़ी चाराली स्थित प्रतिष्ठित व्यावसायिक परिवार से संबंध रखती हैं। वे मैसर्स फूलचंद नारायण दास परिवार की ज्येष्ठ पुत्रवधू हैं।

वे प्रतिष्ठित व्यवसायी राजकुमार बुखरेड़िया एवं पान्ना देवी बुखरेड़िया की ज्येष्ठ पुत्रवधू तथा प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए प्रकाश बुखरेड़िया की धर्मपत्नी हैं। परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन ने उनकी सफलता की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गुवाहाटी के बजाज परिवार की बेटी 

गुवाहाटी के प्रतिष्ठित बजाज परिवार के स्वर्गीय ओमप्रकाश बजाज एवं द्रौपदी देवी बजाजा की चार संतान में सबसे छोटी रेखा बुखरेडिया का जन्म 1973 में हुआ था। उन्होंने अपनी हाईस्कूल तक की शिक्षा गुवाहाटी के सनफ्लावर इंग्लिश हाईस्कूल से पूरी करने के उपरांत गुवाहाटी कॉमर्स कॉलेज से वाणिज्य संकाय में ऑनर्स के साथ ही उन्होंने स्नातक डिग्री हासिल की। उन्होंने फैशन आर्ट्स का दो वर्ष का डिप्लोमा कोर्स भी किया है।

असम की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊँचाई

रेखा बुखरेड़िया की इस उपलब्धि ने असम की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है। छप्पन भोग जैसी पारंपरिक भारतीय व्यवस्था को रिकॉर्ड समय में तैयार कर उन्होंने यह साबित किया कि परंपरा और आधुनिक दक्षता का अद्भुत समन्वय संभव है।

उनकी सफलता को असम की सांस्कृतिक शक्ति और भारतीय परंपराओं के वैश्विक सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

सामाजिक संगठनों ने दी बधाइयाँ

रेखा बुखरेड़िया की इस उपलब्धि पर शिवसागर सहित पूरे असम में खुशी और गर्व का माहौल है। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों ने उन्हें शुभकामनाएँ और बधाई संदेश प्रेषित किए हैं।

विशेष रूप से एकल अभियान महिला समिति शिवसागर अंचल, मारवाड़ी महिला समिति शिवसागर शाखा, मारवाड़ी सम्मेलन शिवसागर शाखा, मारवाड़ी युवा मंच शिवसागर शाखा तथा मारवाड़ी युवा मंच शिवसागर प्रगति शाखा अग्रवाल सभा, अग्रवाल महिला समिति सहित अनेक संगठनों और संस्कृति प्रेमियों ने उनकी उपलब्धि को असम के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।

महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि

रेखा बुखरेड़िया की सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर अभ्यास और समर्पण के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने यह साबित कर दिया कि महिलाएँ घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित कर सकती हैं।

उनकी उपलब्धि आज हजारों महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है और आने वाले समय में भी लोगों को अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

एक रिकॉर्ड नहीं, असम की गौरवगाथा

रेखा बुखरेड़िया की यह सफलता केवल एक प्रमाण-पत्र या रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। यह भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था, महिला शक्ति, पाक-कला और सामाजिक समर्पण की एक ऐसी गौरवगाथा है जिसने असम का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानपूर्वक स्थापित किया है।

वास्तव में यह उपलब्धि इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब प्रतिभा को समर्पण, संस्कृति और विश्वास का साथ मिलता है, तब इतिहास रचा जाता है।

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