
कोलकाता 5 मई :
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी सुप्रीमो तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करारी हार के साथ ही एक साधारण घरेलू नौकरानी की कहानी ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है।
38 वर्षीय कलिता माझी, जो महज 2,500 से 4,000 रुपये मासिक कमाकर चार घरों में बर्तन मांजने, झाड़ू-पोछा करने का काम करती थीं, आज 273-औसग्राम (अनुसूचित जाति आरक्षित) विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की विधायक चुनी गई हैं।

उनकी यह जीत न सिर्फ व्यक्तिगत संघर्ष की मिसाल है, बल्कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को मौका देने वाली बीजेपी की रणनीति का भी प्रतीक बन गई है।
कलिता माझी गुस्कारा क्षेत्र के मझपुकुर पार की रहने वाली हैं। उनके पति सुब्रता माझी मजदूर हैं। खुद कलिता ने चुनावी हलफनामे में अपनी आय शून्य बताई है, जबकि कुल संपत्ति मात्र 4.9 लाख रुपये (चल संपत्ति 1.9 लाख, अचल 3 लाख) है। उन पर 2 आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन कोई गंभीर नहीं। शिक्षा की बात करें तो वे साक्षर हैं।
लगभग 10-20 साल से बीजेपी की बूथ स्तर की कार्यकर्ता रही कलिता ने 2021 के विधानसभा चुनाव में भी औसग्राम सीट से बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने करीब 88,577 वोट हासिल किए, लेकिन टीएमसी के अभेदानंद थंडर से 11,815 वोटों से हार गईं। इस बार पार्टी ने उन्हें फिर मौका दिया और उन्होंने इसे शानदार जीत में बदल दिया।
चुनावी अभियान के दौरान कलिता ने घरेलू काम के साथ-साथ प्रचार भी किया। परिवार का सहयोग मिलने से वे पूरे समय मैदान में डट रहीं। उन्होंने आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं की कमी और सत्तारूढ़ टीएमसी पर भ्रष्टाचार व लूट के गंभीर आरोप लगाए।
29 अप्रैल 2026 को मतदान के बाद 4 मई को नतीजे घोषित हुए। कलिता माझी को 1,07,692 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी टीएमसी के श्यामा प्रसन्न लोहार को 95,157 वोट मिले। जीत का अंतर 12,535 वोट रहा। अन्य उम्मीदवारों में सीपीआई(एम) के चंचल कुमार माझी और कांग्रेस के तपस बराल रहे।
इस बड़ी जीत के बाद कलिता ने कहा कि इस जीत से बहुत खुश हूं। मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। यह आम लोगों की जीत है। यह अकेले मेरी जीत नहीं है। मेरे सास, ससुर, पति सहित पूरे परिवार ने मुझे आगे बढ़ाया था और औसग्राम क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद मिला है।
औसग्राम सीट पर लंबे समय तक वामपंथी पार्टी सीपीआई (एम) का सुरक्षित गढ़ थी। इस सीट पर 2016 और 2021 में टीएमसी ने कब्जा किया था। लेकिन 2026 में पूरे बंगाल के साथ ही औसग्राम सीट पर भी पहली बार कमल खिला। बीजेपी की कलिता माझी ने बड़ी जीत दर्ज की।
कलिता की जीत को बीजेपी बंगाल की ‘घर से विधानसभा तक’ की कहानी के रूप में देखा जा रहा है। कई सांसदों और नेताओं ने इसे लोकतंत्र की मिसाल बताया।
कलिता की कहानी गरीब, दलित और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा बन गई है। पूर्व बर्धमान जिले के इस आरक्षित सीट पर उनकी सफलता से जमीनी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर गई है।
कलिता माझी की यह जीत साबित करती है कि मेहनत, समर्पण और जन-समर्थन से कोई भी ऊंचाई छू सकता है। घरेलू काम से निकली यह महिला अब औसग्राम के विकास की दिशा तय करेगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह 2026 चुनाव का सबसे चर्चित किस्सा बन गया है।




