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असम में साइबर ठगी के खिलाफ बड़ा डिजिटल हथियार : ‘ई-ज़ीरो एफआईआर’ व्यवस्था लागू : अब शिकायत मिलते ही शुरू होगी कार्रवाई : 10 लाख से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर स्वतः दर्ज होगी ज़ीरो एफआईआर

एनसीआरपी पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से जुड़ी नई व्यवस्था से अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

न्यूज डेस्क, 23 जून : बढ़ते साइबर अपराधों, ऑनलाइन वित्तीय ठगी और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में असम सरकार ने एक महत्वपूर्ण और तकनीक आधारित पहल करते हुए राज्य में ‘ई-ज़ीरो एफआईआर (e-Zero FIR)’ प्रणाली लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही असम देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जिन्होंने साइबर वित्तीय अपराधों के मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तंत्र अपनाया है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम देश को साइबर अपराधों से सुरक्षित बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘साइबर-सुरक्षित भारत’ विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

क्या है ई-ज़ीरो एफआईआर व्यवस्था ?

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई व्यक्ति ₹10 लाख या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है और वह अपनी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) अथवा साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज कराता है, तो वह शिकायत स्वतः ‘ज़ीरो एफआईआर’ में परिवर्तित हो जाएगी। इसके बाद पुलिस को अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से संबंधित औपचारिकताओं की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल जांच शुरू करने का अधिकार मिल जाएगा।

सरकार का मानना है कि साइबर अपराधों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। ठग अक्सर धन प्राप्त होते ही रकम को विभिन्न बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट्स या अन्य माध्यमों में स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे धन की बरामदगी बेहद कठिन हो जाती है। ऐसे मामलों में देरी सीधे पीड़ित की आर्थिक क्षति बढ़ा देती है।

अब नहीं होगी क्षेत्राधिकार की बाधा

ई-ज़ीरो एफआईआर प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि साइबर अपराध के मामलों में ज्यूरिस्डिक्शन की बाधा समाप्त हो जाएगी। पीड़ित को यह चिंता नहीं करनी होगी कि अपराध किस जिले, राज्य या पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुआ है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित एजेंसियां कार्रवाई शुरू कर सकेंगी और बाद में मामला आवश्यकतानुसार संबंधित थाना या जांच इकाई को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों की प्रकृति अंतरराज्यीय और कई बार अंतरराष्ट्रीय होती है। ऐसे में अधिकार क्षेत्र से जुड़ी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय जांच को प्रभावित करता है। नई व्यवस्था इस चुनौती को काफी हद तक दूर करेगी।

धनराशि फ्रीज़ करने और वसूली की बढ़ेगी संभावना

अधिकारियों के अनुसार, ई-ज़ीरो एफआईआर प्रणाली के माध्यम से शिकायत दर्ज होते ही पुलिस, बैंकिंग संस्थानों और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय तेजी से स्थापित किया जा सकेगा। इससे संदिग्ध खातों को समय रहते फ्रीज़ करने तथा ठगी गई रकम को सुरक्षित रखने की संभावना बढ़ जाएगी।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई हो जाए तो कई मामलों में पीड़ित की राशि को आगे स्थानांतरित होने से रोका जा सकता है। यही कारण है कि त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को साइबर अपराधों के विरुद्ध सबसे प्रभावी हथियार माना जाता है।

केंद्र सरकार और असम पुलिस की भूमिका की सराहना

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इस नई व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा असम पुलिस के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड समय में इस तकनीकी व्यवस्था को लागू किया गया है, जो राज्य की कानून-व्यवस्था और साइबर सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान और ई-कॉमर्स गतिविधियों के बढ़ते उपयोग के बीच नागरिकों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से साइबर अपराधों के खिलाफ तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र विकसित किया गया है।

आम नागरिकों को होगा सीधा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि ई-ज़ीरो एफआईआर प्रणाली लागू होने से साइबर ठगी के मामलों में शिकायत दर्ज करने, एफआईआर शुरू करने और जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। इससे न केवल अपराधियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई संभव होगी, बल्कि आम नागरिकों का डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन पर विश्वास भी मजबूत होगा।

साथ ही, पीड़ितों को न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सरल और तेज होगी। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी और प्रभावित लोगों को शीघ्र आर्थिक राहत उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

साइबर सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर

डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच असम सरकार की यह पहल राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। ई-ज़ीरो एफआईआर प्रणाली न केवल जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता बढ़ाएगी, बल्कि साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। इससे भविष्य में साइबर ठगी के मामलों पर अंकुश लगाने और नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है।

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