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शिवसागर में हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ : नागालैंड कनेक्शन से अवैध पिस्तौल की सप्लाई : चार आरोपी गिरफ्तार : डिब्रूगढ़ के किराए के मकान से देसी पिस्तौल बरामद

वाहन चोरी से हथियार तस्करी तक पहुंचा गिरोह : पुलिस की समय रहते कार्रवाई से संभावित बड़ी वारदात टली

शिवसागर, 12 जून : शिवसागर पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री और आपूर्ति से जुड़े एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले की सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि यदि इस नेटवर्क को शुरुआती चरण में नहीं पकड़ा जाता, तो आने वाले दिनों में यह गिरोह किसी गंभीर आपराधिक घटना को अंजाम दे सकता था।

गुप्त सूचना के आधार पर रात में चला अभियान

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से शिवसागर में अवैध हथियारों की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान मिली गुप्त सूचना के आधार पर 11 जून की रात शिवसागर पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पापोरी चेतिया के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध शाखा मौइदुल इस्लाम, सदर थाना प्रभारी बाबुल कुमार मेधी, नगर उपनिरीक्षक देवाशीष शर्मा और खुफिया शाखा की टीम ने संयुक्त रूप से अभियान चलाकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवसागर शहर के गनकपट्टी निवासी अचिंत बरुआ, कार्बी आंगलोंग जिले के खटखटी निवासी अमर दास उर्फ जॉन मेस, शिवसागर के सेरेकापार निवासी बॉबी विक्रम बरुआ और भोटियापार निवासी पापू दास के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, अचिंत बरुआ को इस नेटवर्क का मुख्य संचालक माना जा रहा है। उससे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने डिब्रूगढ़ जिले के एक किराए के मकान से एक हस्तनिर्मित देसी पिस्तौल बरामद की।

नागालैंड से हथियार लाने का खुलासा

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पड़ोसी राज्य नागालैंड से अवैध हथियारों की सप्लाई कराने में सक्रिय था। पुलिस के अनुसार, अमर दास उर्फ जॉन मेस सीमावर्ती क्षेत्र से संबंध रखता है और उसके जरिए हथियार नागालैंड से शिवसागर तक लाया गया था।

बाकी आरोपियों ने हथियार को छिपाने, आपूर्ति करने और संभावित इस्तेमाल की योजना में सहयोग किया। पुलिस यह जांच कर रही है कि बरामद पिस्तौल का उपयोग वाहन चोरी, डराने-धमकाने या किसी बड़े अपराध में किया जाना था या नहीं।

वाहन चोरी गिरोह से भी जुड़ाव का संदेह

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मौइदुल इस्लाम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी केवल हथियार तस्करी तक सीमित नहीं थे, बल्कि वाहन चोरी के संगठित नेटवर्क से भी जुड़े होने का संदेह है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पहले वाहन चोरी से जुड़ा था और बाद में अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री में सक्रिय हो गया।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी के वाहनों और अवैध हथियारों का उपयोग किन आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जाना था।

मोबाइल फोन जब्त, मैराथन पूछताछ जारी

गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। उनके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को जब्त कर तकनीकी जांच की जा रही है।

पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। हथियारों के स्रोत, संभावित खरीदारों, वित्तीय लेन-देन और अन्य सहयोगियों की पहचान के लिए जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

बाहरी राज्यों और सीमा क्षेत्रों तक फैल सकता है नेटवर्क

पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल शिवसागर या डिब्रूगढ़ तक सीमित नहीं है। असम के सीमावर्ती क्षेत्रों, नागालैंड और संभवतः बाहरी राज्यों से जुड़े संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

हाल के महीनों में शिवसागर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध हथियारों और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़ी कई घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ाई है। मई 2026 में शिवसागर पुलिस ने एक संदिग्ध ULFA-I कैडर को गिरफ्तार कर हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। उस कार्रवाई में 9 एमएम पिस्तौल, ग्रेनेड, कारतूस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद होने की रिपोर्ट सामने आई थी।

अखिल गोगोई की सुरक्षा बढ़ोतरी से संबंध नहीं

प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस से यह भी पूछा गया कि क्या इस हथियार तस्करी गिरोह का संबंध शिवसागर विधायक अखिल गोगोई की हालिया सुरक्षा बढ़ोतरी से है। इस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मौइदुल इस्लाम ने स्पष्ट किया कि अब तक पुलिस के पास ऐसा कोई ठोस इनपुट नहीं है, जिससे यह साबित हो कि गिरोह किसी राजनीतिक नेता को निशाना बनाने की योजना बना रहा था।

उन्होंने कहा कि विधायक की सुरक्षा व्यवस्था उच्च स्तर पर नियमित समीक्षा के तहत बढ़ाई गई है और शिवसागर पुलिस की ओर से इस संदर्भ में कोई विशेष प्रस्ताव नहीं भेजा गया था।

संभावित बड़ी साजिश समय रहते नाकाम

पुलिस का मानना है कि प्रारंभिक स्तर पर ही इस गिरोह को गिरफ्तार कर लेना एक बड़ी सफलता है। अधिकारियों के अनुसार, यदि यह हथियार अपराधियों के हाथों सक्रिय रूप से इस्तेमाल होने लगता, तो जिले में कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पैदा हो सकती थी।

अब पुलिस का ध्यान इस बात पर है कि हथियार किस स्रोत से आया, किसके लिए लाया गया था और इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या थी।

जांच में और खुलासों की संभावना

शिवसागर पुलिस ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस हथियार तस्करी, वाहन चोरी और संभावित अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

यह कार्रवाई शिवसागर पुलिस की हालिया बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध हथियार, वाहन चोरी और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।हिंदी टैग्स

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