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असम कैबिनेट के बड़े फैसले: पर्यटन, शिक्षा, उद्योग और जनकल्याण को नई गति : होटल पंजीकरण से लेकर निजी विश्वविद्यालयों तक, कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी : उद्योग स्थापना होगी आसान, राशन व्यवस्था को मिली स्थिरता, शिक्षा क्षेत्र में निवेश का रास्ता खुला

न्यूज डेस्क, 23 जून : मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में आयोजित असम मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के पर्यटन, शिक्षा, उद्योग, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा चाय क्षेत्र से जुड़े कई दूरगामी प्रभाव वाले निर्णय लिए गए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से राज्य में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सरल और पारदर्शी बनेंगी।

कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णयों को राज्य की आर्थिक विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। विशेष रूप से पर्यटन, औद्योगिक निवेश, निजी शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र में इन फैसलों का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

पर्यटन क्षेत्र के लिए नई नीति, पंजीकरण प्रक्रिया होगी आसान

असम सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को और अधिक संगठित एवं निवेश अनुकूल बनाने के उद्देश्य से असम पर्यटन आवास (विकास एवं पंजीकरण) नियम, 2026 को मंजूरी प्रदान की है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य में संचालित विभिन्न प्रकार के पर्यटन प्रतिष्ठानों के लिए एक सुव्यवस्थित पंजीकरण प्रणाली विकसित की जाएगी।

नई नीति के अंतर्गत होटल, रिसॉर्ट, मोटल, लॉज, गेस्ट हाउस, सर्विस अपार्टमेंट, होमस्टे, टेंटेड आवास, वेकेशन रेंटल यूनिट तथा हेरिटेज होटल जैसे प्रतिष्ठानों को एकीकृत ढांचे के अंतर्गत लाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पर्यटन उद्योग को औपचारिक स्वरूप प्रदान करना और पर्यटकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब पर्यटन प्रतिष्ठानों के लिए सिंगल-विंडो रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी। इसके साथ ही हर तीन वर्ष बाद लाइसेंस के स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की व्यवस्था भी लागू होगी, जिससे उद्यमियों को प्रशासनिक राहत मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से राज्य में पर्यटन निवेश बढ़ेगा और असम की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर बेहतर पहचान मिल सकेगी।

उद्योग स्थापना को बढ़ावा, भूमि रूपांतरण प्रक्रिया हुई सरल

राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश को गति देने के उद्देश्य से भूमि उपयोग परिवर्तन संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। कैबिनेट ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों, खादी एवं ग्रामोद्योग इकाइयों तथा सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कृषि भूमि के स्वचालित रूपांतरण को मंजूरी दे दी है।

अब ऐसे मामलों में जिला आयुक्त (डीसी) की पूर्व स्वीकृति लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इससे निवेशकों को लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत मिलेगी तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

सरकार का मानना है कि यह निर्णय विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग स्थापना को बढ़ावा देगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में मदद करेगा। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

राशन व्यवस्था को मिला स्थायित्व, लाइसेंस अवधि बढ़ाई गई

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट ने राज्य की सभी उचित मूल्य दुकानों (Fair Price Shops) के लाइसेंस की वैधता अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है।

पहले इन लाइसेंसों की अवधि 30 जून 2026 तक निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से राशन वितरण प्रणाली में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न नहीं होगा तथा लाभार्थियों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध होता रहेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय राज्य की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

निजी विश्वविद्यालयों के लिए आसान होगा रास्ता

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने असम निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी है।

संशोधित प्रावधानों के तहत निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम भूमि तथा एंडोमेंट फंड की अनिवार्य शर्तों में राहत दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों को असम में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

राज्य में उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार होने से छात्रों को बेहतर शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध होंगे और उन्हें अन्य राज्यों में पलायन करने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में रोजगार और अनुसंधान गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

निजी स्कूलों को भी मिली बड़ी राहत

स्कूल शिक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने निजी विद्यालयों के लिए कई नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने का निर्णय लिया है।

नई व्यवस्था के तहत भूमि स्वामित्व, भवन संबंधी आवश्यकताओं, उपकरणों की उपलब्धता तथा विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्रों से जुड़ी कई जटिलताओं को कम किया जाएगा। इससे नए निजी विद्यालयों की स्थापना में आने वाली प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण विद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

असम टी कॉरपोरेशन के पुनर्गठन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कैबिनेट ने Assam Tea Corporation Limited के अधिकारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत ₹9.75 करोड़ की वित्तीय सहायता को मंजूरी प्रदान की है।

सरकार का उद्देश्य निगम के प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाना तथा वित्तीय प्रबंधन में सुधार करना है। अधिकारियों का मानना है कि इस पैकेज से संस्थागत पुनर्गठन की प्रक्रिया को गति मिलेगी और निगम की कार्यक्षमता में सुधार होगा।

असम का चाय उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और सरकार इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधारों पर विशेष ध्यान दे रही है।

निवेश, रोजगार और विकास को मिलेगी नई दिशा

कैबिनेट बैठक में लिए गए सभी निर्णयों का मूल उद्देश्य राज्य में निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा आर्थिक गतिविधियों को गति देना है।

सरकार का मानना है कि पर्यटन, शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और चाय क्षेत्र से जुड़े इन निर्णयों का सकारात्मक प्रभाव राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इससे न केवल निजी निवेश आकर्षित होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

विकास की नई रणनीति का संकेत

विश्लेषकों का मानना है कि असम सरकार के ये फैसले राज्य को पूर्वोत्तर भारत के एक प्रमुख निवेश और विकास केंद्र के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। पर्यटन अवसंरचना के विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में उठाए गए ये कदम आने वाले वर्षों में राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति प्रदान कर सकते हैं।

असम मंत्रिमंडल की इस बैठक को राज्य के विकास एजेंडा की दृष्टि से हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक माना जा रहा है, जिसके प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय तक देखने को मिल सकते हैं।

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