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असम–नागालैंड सीमा पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई : तस्करों के चंगुल से हाथी मुक्त : गेलकी सीमा से हाथी की अवैध तस्करी की कोशिश नाकाम, दो कथित तस्कर गिरफ्तार : वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज : संगठित तस्करी नेटवर्क की जांच में जुटा वन विभाग

शिवसागर, 27 जून : असम के शिवसागर जिले के नाजिरा सहजिला अंतर्गत असम–नागालैंड सीमा पर वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हाथी की अवैध तस्करी के प्रयास को विफल कर दिया। गुप्त सूचना के आधार पर चलाए गए विशेष अभियान में विभाग ने एक हाथी को सुरक्षित मुक्त कराते हुए दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, जबकि वन विभाग अब पूरे तस्करी नेटवर्क की गहन जांच में जुट गया है।

गुप्त सूचना के आधार पर चलाया गया विशेष अभियान

वन विभाग को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि असम–नागालैंड की गेलकी सीमा के रास्ते एक हाथी को अवैध रूप से सीमा पार ले जाने की तैयारी की जा रही है। सूचना मिलते ही विभाग ने तत्काल रणनीति बनाकर सीमावर्ती क्षेत्र में घेराबंदी की और विशेष अभियान शुरू किया।

अभियान के दौरान वन विभाग की टीम ने हाथी को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया तथा मौके पर मौजूद दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर तस्करी के प्रयास को पूरी तरह विफल कर दिया।

दो कथित तस्कर गिरफ्तार

वन विभाग द्वारा गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भूपेन गोगोई और बिपिन चंद्र सैकिया के रूप में हुई है। दोनों को हाथी की अवैध तस्करी के प्रयास के आरोप में हिरासत में लिया गया।

प्रारंभिक पूछताछ में वन विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि आरोपी किसी बड़े तस्करी गिरोह से जुड़े हैं या स्वतंत्र रूप से इस अवैध गतिविधि में शामिल थे।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला

वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 48(ए) के तहत मामला दर्ज किया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध अधिनियम की धारा 57 भी जोड़ दी है, जिससे जांच को और अधिक कानूनी मजबूती मिलेगी।

संगठित तस्करी नेटवर्क की जांच तेज

वन विभाग अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि बरामद हाथी को कहां से लाया गया था, उसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था और इस अवैध तस्करी रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

प्रारंभिक संकेतों के आधार पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि सीमांत क्षेत्र में वन्यजीवों की तस्करी करने वाला कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ाई जाएगी निगरानी

वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि असम–नागालैंड सीमा पर वन्यजीवों की अवैध तस्करी रोकने के लिए निगरानी और विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। विभाग ने चेतावनी दी है कि वन्यजीवों की तस्करी या संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति सख्त संदेश

गेलकी सीमा पर हाथी की तस्करी की कोशिश को नाकाम बनाना वन विभाग की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वन्यजीवों की तस्करी के खिलाफ विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है और सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय तस्करी नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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