फर्जी डॉक्टरों पर सरकार का शिकंजा : मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद एक्शन में सोनारी पुलिस : पूछताछ के लिए दो डॉक्टर हिरासत में : चाय बागानों में चिकित्सकीय सेवाओं की भी होगी जांच : टाउकाक टी एस्टेट के डॉ. अरिंदम गांगुली और मंजुश्री टी एस्टेट के डॉ. बेणु चक्रवर्ती से दस्तावेजों को लेकर पूछताछ

सोनारी, 27 जून : असम में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए अभियान का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के निर्देश के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग राज्यभर में बिना वैध डिग्री अथवा आवश्यक पंजीकरण के चिकित्सकीय सेवाएं देने वालों की जांच में जुट गए हैं। इसी अभियान के तहत चराइदेव जिले के सोनारी क्षेत्र में पुलिस ने पूछताछ के लिए दो चिकित्सकों को हिरासत में लेकर उनके शैक्षणिक एवं पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन शुरू किया है।

दो चिकित्सकों से दस्तावेजों को लेकर पूछताछ
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोनारी पुलिस ने टाउकाक टी एस्टेट के डॉ. अरिंदम गांगुली तथा मंजुश्री टी एस्टेट के डॉ. बेणु चक्रवर्ती को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

दोनों से उनकी मेडिकल डिग्री, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, मेडिकल काउंसिल पंजीकरण तथा चिकित्सकीय कार्य से संबंधित अन्य आवश्यक दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की जा रही है। फिलहाल पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि दोनों के विरुद्ध कोई औपचारिक मामला दर्ज किया गया है या नहीं। अभी जांच प्रारंभिक चरण में है और दस्तावेजों का सत्यापन जारी है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज हुआ अभियान
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने राज्य में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की घोषणा करते हुए स्पष्ट कहा था कि लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग, पुलिस तथा संबंधित एजेंसियों ने राज्य के विभिन्न जिलों में चिकित्सकों की योग्यता, मेडिकल काउंसिल पंजीकरण और शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन का अभियान तेज कर दिया है।
चाय बागानों के अस्पताल भी जांच के दायरे में
सोनारी क्षेत्र के अनेक चाय बागानों में हजारों श्रमिक और उनके परिवार प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बागान अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि किसी चिकित्सक की योग्यता या पंजीकरण को लेकर संदेह उत्पन्न होता है, तो इसका सीधा प्रभाव बड़ी आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।
इसी कारण जांच एजेंसियां अब चाय बागानों में कार्यरत चिकित्सकों के शैक्षणिक दस्तावेज, पंजीकरण प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेखों का भी गहन सत्यापन कर रही हैं।
दस्तावेजों की वैधता के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस और संबंधित विभाग दोनों चिकित्सकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, मेडिकल काउंसिल पंजीकरण तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रहे हैं।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, फर्जीवाड़ा अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित कानूनी धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि दस्तावेज वैध पाए जाते हैं, तो नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह कार्रवाई केवल पूछताछ और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट सूचना या अफवाह से बचें। पूरे मामले की जांच फिलहाल जारी है तथा जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।




