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टियोक नगर पालिका की आरटीआई रिपोर्ट ने खड़े किए कई अहम सवाल : तीन वर्षों में 1.32 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह, लेकिन विकास कार्यों का स्पष्ट ब्यौरा नहीं : प्रशासनिक खर्चों पर भारी व्यय के बीच जनता पूछ रही— नगर विकास पर कितना हुआ निवेश?

"अन्य मद" से लाखों की आय, एनओसी जारी करने से बढ़ी कमाई, संपत्ति कर संग्रह में भी दर्ज हुई बड़ी छलांग

टियोक, 14 जून : सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त टियोक नगर पालिका की वित्तीय जानकारी ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली, राजस्व संग्रह और व्यय की पारदर्शिता को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पालिका द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान करोड़ों रुपये का राजस्व संग्रह किया गया, लेकिन इस धनराशि से किए गए विकास कार्यों का विस्तृत और मदवार विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। स्थानीय स्तर पर इस रिपोर्ट को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

नागरिकों, सामाजिक संगठनों तथा जागरूक वर्ग का कहना है कि नगर पालिका द्वारा राजस्व संग्रह के आंकड़े तो प्रस्तुत किए गए हैं, लेकिन इन पैसों का उपयोग किस प्रकार किया गया और जनता को इसका प्रत्यक्ष लाभ कितना मिला, यह अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

आरटीआई के जवाब में उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार टियोक नगर पालिका ने वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक भूमि बिक्री अनुमति, संपत्ति कर, भवन निर्माण अनुमति शुल्क, सेवा शुल्क, टेंडर पेपर बिक्री तथा अन्य स्रोतों से कुल 1 करोड़ 32 लाख 74 हजार 288 रुपये 56 पैसे का राजस्व संग्रह किया। यह राशि नगर पालिका के लिए एक महत्वपूर्ण आय स्रोत मानी जा रही है। हालांकि इस राशि के उपयोग, विकास योजनाओं तथा परियोजनाओं पर हुए खर्च का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे कई प्रश्न जन्म ले रहे हैं।

आरटीआई रिपोर्ट का सबसे चर्चित पहलू “अन्य मद” से प्राप्त राजस्व है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस मद से 10.40 लाख रुपये तथा वर्ष 2024-25 में 23.66 लाख रुपये की आय दर्ज की गई। मात्र एक वर्ष में इस मद से प्राप्त आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि नगर पालिका ने यह स्पष्ट नहीं किया कि “अन्य मद” में कौन-कौन से राजस्व स्रोत शामिल हैं और यह राशि किन गतिविधियों या शुल्कों से प्राप्त हुई। इस अस्पष्टता के कारण स्थानीय लोगों के बीच पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भूमि बिक्री के लिए जारी किए जाने वाले अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नगर पालिका के प्रमुख राजस्व स्रोतों में से एक बनकर उभरे हैं। वर्ष 2022-23 में एनओसी शुल्क से 10.33 लाख रुपये, वर्ष 2023-24 में 11.90 लाख रुपये तथा वर्ष 2024-25 में 16.70 लाख रुपये की आय दर्ज की गई। तीनों वर्षों में लगातार वृद्धि दर्ज होने के बावजूद नगर पालिका ने यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई कि कुल कितने एनओसी जारी किए गए, किन व्यक्तियों या संस्थाओं को जारी किए गए तथा निर्धारित शुल्क के अनुसार राशि वसूली गई या नहीं। नागरिकों का मानना है कि यदि एनओसी से इतनी बड़ी राशि प्राप्त हुई है तो इसकी विस्तृत सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए।

संपत्ति कर संग्रह के आंकड़े भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आरटीआई के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में जहां संपत्ति कर संग्रह 10.12 लाख रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 21.85 लाख रुपये पहुंच गया। मात्र एक वर्ष में कर संग्रह लगभग दोगुना हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह वृद्धि पुराने बकाया करों की वसूली के कारण हुई, क्या नगर क्षेत्र में नए करदाताओं को जोड़ा गया, अथवा कर निर्धारण प्रक्रिया में कोई बदलाव किया गया? इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर आरटीआई दस्तावेज में नहीं दिया गया है।

नगर पालिका को भवन निर्माण अनुमति शुल्क से भी अच्छी आय प्राप्त हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान इस मद से लगभग 6.01 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। हालांकि इस अवधि में कितने आवासीय, व्यावसायिक अथवा संस्थागत भवनों को निर्माण अनुमति प्रदान की गई, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे निर्माण गतिविधियों और राजस्व संग्रह की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो गया है।

आरटीआई के जवाब में नगर पालिका ने स्पष्ट किया है कि उसकी स्वयं की निधि मुख्य रूप से कर्मचारियों का वेतन, आउटसोर्स कर्मियों का भुगतान, वाहन ईंधन, बिजली बिल, कार्यालय सामग्री तथा अन्य प्रशासनिक व्यय पर खर्च की जाती है। यहीं से सबसे बड़ा प्रश्न सामने आता है कि यदि राजस्व का अधिकांश हिस्सा प्रशासनिक खर्चों में व्यय हो जाता है, तो नगर क्षेत्र के विकास के लिए स्वयं की निधि से कितना निवेश किया गया?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर क्षेत्र में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक सुविधाओं तथा अन्य आधारभूत संरचना के विकास के लिए नगर पालिका की स्वयं की आय से कौन-कौन से कार्य किए गए, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। लोगों का तर्क है कि तीन वर्षों में एकत्रित 1.32 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का उपयोग केवल प्रशासनिक खर्चों तक सीमित नहीं होना चाहिए। जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके द्वारा दिए गए करों और शुल्कों का उपयोग नगर विकास में किस स्तर तक किया गया।

नगर पालिका ने अपने जवाब में यह भी बताया है कि वर्तमान समय तक उसके विरुद्ध कोई ऑडिट आपत्ति लंबित नहीं है। इसके बावजूद नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि पारदर्शिता केवल ऑडिट आपत्तियों की अनुपस्थिति से सुनिश्चित नहीं होती। राजस्व संग्रह और व्यय का विस्तृत सार्वजनिक खुलासा प्रशासन में जनता के विश्वास को और मजबूत करता है।

आरटीआई रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर कई प्रश्न चर्चा का विषय बने हुए हैं। इनमें “अन्य मद” से प्राप्त आय का वास्तविक स्रोत, तीन वर्षों में जारी किए गए कुल एनओसी की संख्या, संपत्ति कर संग्रह में अचानक हुई वृद्धि का आधार, भवन निर्माण अनुमतियों का विवरण तथा स्वयं की निधि से किए गए विकास कार्यों की जानकारी प्रमुख हैं।

फिलहाल आरटीआई के माध्यम से सामने आए आंकड़ों ने टियोक नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अब लोगों की निगाहें नगर पालिका प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और नगर विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी किस प्रकार जनता के समक्ष रखता है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि संबंधित अधिकारी इन मुद्दों पर स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब देते हैं, तो इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि नगर प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास भी और मजबूत होगा।

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